Kadha side effects : काढ़ा बनाते समय ध्यान में रखें ये 6 बातें नहीं तो हो सकता है फायदे से ज्यादा नुकसान

आम सर्दी-जुकाम हो या कोरोना से लड़ने के लिए इम्यूनिटी बढ़ानी हो, हमें काढ़े की ही याद आती है.

आइए जानें कि काढ़ा बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए.

जब आप काढ़ा (kadha) बनाएं तो किसी भी सामग्री को जरूरत से ज्यादा ना डालें खासकर मसालों को. ज्यादा मात्रा में मसाले डालने से कब्ज की समस्या भी हो सकती है. साथ ही, मासिक धर्म का अनियमित होना भी इसका एक दुष्प्रभाव है.

काढ़ा रोजाना एक से ज्यादा बार, वो भी केवल एक कप से ज्यादा, नहीं पीना चाहिए. रोजाना ज्यादा काढ़ा (kadha) पीने से लीवर में इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है. ये लीवर फेलियर का कारण भी बन सकता है.

काढ़ा एक-साथ ना बहुत ज्यादा मात्रा में बनाना चाहिए और ना बहुत ज्यादा पीना चाहिए. कोरोना के डर से काढ़े (kadha) को आप पानी का रिप्लेसेंट बनाकर ना पीने लगें इस बात का ध्यान रखें. इससे हार्टबर्न की समस्या हो सकती है.

लौंग, दालचीनी, सोंठ, काली मिर्च, इलायची आदि गर्म होते हैं जिससे शरीर में जरूरत से ज्यादा गर्माहट होने पर नाक से खून निकलने, छाले और एसिडिटी की समस्या हो सकती है.

प्राकृतिक के नाम पर किसी भी चीज का काढ़ा ना बनाने लगें. जैसे हर पीली चीज सोना नहीं होती वैसे ही हर हरी चीज सेहत के लिए फायदेमंद नहीं होती.

काढ़े में एक चुटकी से ज्यादा काली मिर्च ना डालें, अदरक और हल्दी कम डालें. हल्दी ज्यादा डालने से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है.

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