ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe PDF Download Book by Manav Kaul

ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe PDF Download Free in this Post from Google Drive Link and Telegram Link , मानव कौल / Manav Kaul all Hindi PDF Books Download Free, ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe Summary, ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe book Review , Manav Kaul Written Books Theek Tumhare Peeche Pdf, Prem Kabootar Pdf, Tumhare Baare Mein Pdf, Bahut Door Kitna Door Hota Hain Pdf, Chalta Phirta Pret Pdf, Antima Pdf, Shirt Ka Teesra Button Pdf Also Available for download.

पुस्तक का विवरण (Description of Book ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe PDF Download) :-

नाम : ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe Book PDF Download
लेखक :
आकार : 1.4 MB
कुल पृष्ठ : 162
श्रेणी : कहानियाँ / Stories
भाषा : हिंदी | Hindi
Download Link Working

[adinserter block=”1″]

Yah Manav Kaul dwara likhit 12 Hindi kahaniyon ka sangrah hai. Log Manav ko ek Natakkar, Natak-nirdeshak, Film actor, Nirdeshak awam Lekhak ke taur par pehchanate rahe hain. Magar Hind Yugm pehli baar inki kahaniyon ko pathakon ke samaksh lekar aaya hai.

ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe PDF Download Free in this Post from Telegram Link and Google Drive Link , मानव कौल / Manav Kaul all Hindi PDF Books Download Free, ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe PDF in Hindi, ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe Summary, ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe book Review

[adinserter block=”1″]

पुस्तक का कुछ अंश (ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe PDF Download)

मैंने हर बार रख दिया है
खुद को पूरा का पूरा खोलकर खुला खुलासा बिखरा हुआ पड़ा रहता हूँ कभी तुम्हारे घुटनों पर कभी तुम्हारी पलकों पर तो कभी ठीक तुम्हारे पीछे।
बिखरने के बाद का
सिमटा हुआ-सा मैं ‘था’ से लेकर ‘हूँ’ तक पूरा का पूरा जी लेता हूँ खुद को फिर से मेरे जाने के बाद तुम शायद मुझे पढ़ लेती होगी कभी अपने घुटनों पर कभी अपनी पलकों पर पर जो कभी ‘ठीक तुम्हारे पीछे’ बिखरा पड़ा था मैं
वो…?
मैं खुद को समेटे हुए
फिर से आता हूँ तुम्हारे पास फिर
वो शायद पड़ा होगा अभी भी’ की आशा में 4 बार-बार और हर बार छोड़ जाता हूँ थोड़ा-सा खुद को ठीक तुम्हारे पीछे ।…..

i put it every time
Opening myself completely, I lay scattered openly, sometimes on your knees, sometimes on your eyelids and sometimes right behind you.
post disintegration
I am confined, from ‘was’ to ‘am’, I live myself completely again after my departure, you might have read me, sometimes on your knees, sometimes on your eyelids, but sometimes ‘right behind you’ I was scattered
They…?
i hold myself
come back to you again
He must have been lying still in hope 4 times and every time I leave a little bit of myself right behind you.

ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe PDF Download Free in this Post from Telegram Link and Google Drive Link , मानव कौल / Manav Kaul all Hindi PDF Books Download Free, ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe PDF in Hindi, ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe Book Summary, ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe book Review

[adinserter block=”1″]

हमने ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe PDF Book Free में डाउनलोड करने के लिए Google Drive की link नीचे दिया है , जहाँ से आप आसानी से PDF अपने मोबाइल और कंप्यूटर में Save कर सकते है। इस क़िताब का साइज 1.4 MB है और कुल पेजों की संख्या 162 है। इस PDF की भाषा हिंदी है। इस पुस्तक के लेखक मानव कौल / Manav Kaul हैं। यह बिलकुल मुफ्त है और आपको इसे डाउनलोड करने के लिए कोई भी चार्ज नहीं देना होगा। यह किताब PDF में अच्छी quality में है जिससे आपको पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। आशा करते है कि आपको हमारी यह कोशिश पसंद आएगी और आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe की PDF को जरूर शेयर करेंगे।

Q. ठीक तुम्हारे पीछे | Theek Tumhare Peechhe किताब के लेखक कौन है?
 

Answer.
[adinserter block=”1″]

Download
[adinserter block=”1″]

Read Online
[adinserter block=”1″]

 


आप इस किताब को 5 Stars में कितने Star देंगे? कृपया नीचे Rating देकर अपनी पसंद/नापसंदगी ज़ाहिर करें। साथ ही कमेंट करके जरूर बताएँ कि आपको यह किताब कैसी लगी?

4.8/5 - (2190 votes)