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द इंटेलीजेंट इन्वेस्टर / The Intelligent Investor PDF Download Free Hindi Book by Benjamin Graham

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

नाम / Nameद इंटेलीजेंट इन्वेस्टर / The Intelligent Investor
लेखक / Author
आकार / Size2.5 MB
कुल पृष्ठ / Pages136
Last UpdatedMarch 13, 2022
भाषा / Language Hindi
श्रेणी / Category,

दस लाख से अधिक प्रतियों की बिक्री का रिकॉर्ड इस शानदार पुस्तक में ग्राहम के सदाबहार ज्ञान का आज के बाज़ार की परिस्थितियों के आधार पर वर्णन किया गया है बीसवीं शताब्दी के सबसे महान निवेश सलाहकार बेंजामिन ग्राहम ने दुनिया भर में लोगों को सिखाया व प्रेरित किया है । ग्राहम के “वैल्यू इन्वेस्टिंग” के सिद्धांत (जो निवेशकों को बड़ी गलतियां करने से बचाता है और उन्हें दीर्घकालीन रणनीति विकसित करना सिखाता है) ने द इंटेलिजेंट इन्वेस्टर को इसके मूल प्रकाशन वर्ष 1949 से ही स्टॉक मार्केट की बाइबिल बना दिया है। समय के साथ विकसित होते बाज़ार ने ग्राहम की रणनीतियों के ज्ञान को प्रमाणित किया है। ग्राहम के मूल लेखन को संरक्षित रखते हुए, इस संशोधित संस्करण में विख्यात वित्तीय पत्रकार जेसन ज़्वाइग की टिप्पणी भी शामिल है। उनके नज़रिये में आज के बाज़ार की वास्तविकताएं भी समाहित हैं, जो ग्राहम के उदाहरणों व आज की वित्तीय परिस्थितियों के बीच संबंध दर्शा कर पाठकों के लिए ग्राहम के सिद्धांतों का उपयोग करना और आसान बनाते हैं। द इंटेलिजेंट इन्वेस्टर का यह संस्करण अति महत्वपूर्ण व अनिवार्य है, जो आपके द्वारा अब तक अपने वित्तीय लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए पढ़ी गई सभी पुस्तकों में सबसे अहम है। “ग्राहम के अत्यधिक सफल व लोकप्रिय निवेश दृष्टिकोण के बुनियादी सिद्धांतों का पूर्ण वर्णन।” मनी मैगज़ीन.

पुस्तक का कुछ अंश

परिचय पर टिप्पणी
अगर आपने हवा में महल बना दिए हैं, तो आपका काम बर्बाद नहीं होना चाहिए, वे वहीं क़ायम रहें। अब इनके नीचे नींव बनाना शुरू करें।
—हेनरी डेविड थोरो, वॉल्डन
ध्यान दें, कि ग्राहम ने शुरुआत में ही घोषणा की है कि यह पुस्तक आपको बाज़ार को नियंत्रित करना नहीं सिखाएगी। कोई भी सच्ची पुस्तक ऐसा नहीं कर सकती।
बल्कि यह पुस्तक आपको तीन शक्तिशाली पाठ सिखाएगी:
आप भरपाई न हो सकने योग्य नुक़सान से कैसे बच सकते हैं।
आप निरंतर मुनाफ़ा पाने को कैसे अधिकतम कर सकते हैं।
आप अपने को नुक़सान पहुँचाने वाले व्यवहार को कैसे नियंत्रित कर सकते हैं, जिसके कारण निवेशक अपनी पूर्ण क्षमता का उपयोग नहीं कर पाते।
1990 के दशक के अंत में मज़बूती के दौर में जब टेक्नोलॉजी शेयरों का भाव हर दिन दोगुना होता लगता था, उस वक़्त आपका अपने सारे पैसे गँवा बैठने का विचार बेतुका लगता था। लेकिन 2002 का अंत आने तक, अनेक डॉटकॉम व टेलीकॉम शेयरों का भाव 95% या इससे ज़्यादा तक घट गया। एक बार 95% का नुक़सान होने पर आपको 1,900% मुनाफ़ा कमाना होता है, जिससे वहाँ पहुँच सकें जहाँ से आपने शुरू किया था।1 कोई भी मूर्खतापूर्ण जोखिम आपको ऐसे गड्ढे में धकेल सकता है, जहाँ से निकलना असंभव हो। यही कारण है कि ग्राहम ने हमेशा नुक़सान से बचने के महत्त्व पर ज़ोर दिया है - न केवल अध्याय 6, 14 और 20 में, बल्कि उन चेतावनियों में भी, जो उन्होंने पूरी पुस्तक में जहाँ-तहाँ दी हैं।
लेकिन आप कितना भी सावधान क्यों न रहें, आपके निवेश का मूल्य समय-समय पर घटता रहेगा। चूँकि कोई भी इस जोखिम से बच नहीं सकता, ग्राहम आपको बताएँगे कि इसका कैसे प्रबंधन करें और किस तरह अपने सभी डरों पर क़ाबू पाएँ।
क्या आप इंटेलिजेंट इन्वेस्टर हैं?
अब एक अहम सवाल का जवाब दें। यहाँ ग्राहम का ‘इंटेलिजेंट’ इन्वेस्टर से क्या मतलब है? इस पुस्तक के पहले संस्करण में ग्राहम ने इसे परिभाषित किया है और उन्होंने साफ़ कर दिया है कि इस तरह की इंटेलिजेंस (बुद्धिमानी) का आईक्यू या एसएटी से कोई संबंध नहीं है। इसका मतलब बस धैर्य, अनुशासन तथा सीखने की ललक से है। आपको अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखने तथा ख़ुद सोचने में भी सक्षम होना होगा। इस तरह की बुद्धिमत्ता की व्याख्या ग्राहम ने इस तरह की है कि “यह दिमाग़ से ज़्यादा व्यक्तित्व की विशेषता है।”2
यह साबित हो चुका है कि अधिक आईक्यू और उच्च शिक्षा निवेशक को बुद्धिमान बनाने के लिए काफ़ी नहीं हैं। 1998 में, हेज फ़ंड, लांग-टर्म कैपिटल मैनेजमेंट एलपी को गणितज्ञों, कंप्यूटर वैज्ञानिकों और दो नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्रियों की बटालियन चलाती थी। उन्होंने कुछ ही हफ़्तों में बांड बाज़ार के वापस ‘सामान्य’ हो जाने के बड़े दाँव में 2 बिलियन डॉलर गँवा दिए, लेकिन बांड बाज़ार लगातार ज़्यादा से ज़्यादा असामान्य होता गया - और एलटीसीएम ने इतना अधिक धन उधार ले लिया कि इसके सिमटने से वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को भी उलट-पलट दिया।3
बहुत पहले 1720 के वसंत में, सर आइजैक न्यूटन ने साउथ सी कंपनी के शेयर ख़रीदे, जो इंग्लैंड में सबसे लोकप्रिय शेयर थे। बाज़ार के हाथ से बाहर निकलने का आभास होने पर इस महान भौतिक विज्ञानी के कहा कि “वे बाहरी ग्रहों की गति की तो गणना कर सकते हैं, लेकिन लोगों के पागलपन की नहीं।” न्यूटन ने अपने साउथ सी के शेयर 100% मुनाफ़े पर £7,000 में बेच दिए, लेकिन कुछ ही महीनों बाद, बाज़ार में आए उछाल से अभिभूत होकर, न्यूटन ने पुनः इन्हें अधिक क़ीमत पर ख़रीद लिया और उन्हें £20,000 (आज के 3 मिलियन डॉलर) का नुक़सान हुआ। बाक़ी की सारी ज़िंदगी उन्होंने किसी को भी उनके सामने साउथ सी का नाम भी लेने से मना कर दिया।4
जहाँ तक हम बुद्धिमानी की बात करें, तो सर आइजैक न्यूटन अब तक हुए सबसे बुद्धिमान व्यक्तियों में से एक थे, फिर भी ग्राहम के हिसाब से न्यूटन इंटेलिजेंट इन्वेस्टर होने से कोसों दूर थे। भीड़ की गर्जना का असर उन्होंने अपने फ़ैसले पर पड़ने दिया। ऐसा करके दुनिया के सबसे महान वैज्ञानिक मूर्खों जैसा काम कर बैठे।
संक्षेप में कहें तो, अगर आप अब तक निवेश में विफल रहे हैं, तो इसलिए नहीं कि आप बेवकूफ हैं, बल्कि इसलिए कि आप भी सर आइजैक न्यूटन की तरह वैसा भावनात्मक अनुशासन विकसित नहीं कर पाए हैं, जैसा निवेश में सफलता के लिए होना चाहिए। अध्याय 8 में ग्राहम बताते हैं कि किस तरह आप अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखते हुए और बाज़ार के स्तर की तर्कहीनता के अधीन होने से इनकार करते हुए अपनी बुद्धिमानी बढ़ा सकते हैं। यहाँ आप इस सबक़ में माहिर हो जाएँगे कि इंटेलिजेंट इन्वेस्टर बनने के लिए ‘दिमाग़’ से ज़्यादा ‘व्यक्तित्व’ महत्त्व रखता है।
आपदा का इतिहास
तो आइए अब बीते समय में हुए कुछ प्रमुख वित्तीय घटनाक्रमों पर नज़र डालते हैं:
महामंदी के बाद सबसे बड़े बाज़ार क्रैश में अमेरिकी शेयरों का मूल्य मार्च, 2000 से अक्टूबर, 2002 के बीच, 50.2% या $7.4 ट्रिलियन तक कम हो गया था।
1990 के दशक में सबसे लोकप्रिय कंपनियाँ, जिनके शेयरों के भाव में ज़बरदस्त गिरावट आई थी, उनमें एओएल, सिस्को, जेडीएस यूनिफेज़, ल्यूसेंट और कवेलकॉम-प्लस शामिल थीं। इसके साथ ही सैकड़ों इंटरनेट कंपनियों के शेयरों को भी भारी नुक़सान पहुँचा था।
अमेरिका में एनरॉन, टाइको और ज़ीरॉक्स समेत अनेक बड़ी व सम्मानित कॉर्पोरेशनों पर बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप लगे।
कॉन्सेको, ग्लोबल क्रॉसिंग, वर्ल्डकॉम जैसी एक वक़्त पर चमकती कंपनियाँ दिवालिया हो गईं।
अकाउंटिंग फ़र्मों पर अपने ग्राहकों, निवेश करने वाली जनता को गुमराह करने के लिए खातों में हेरफेर करने के साथ ही रिकॉर्ड नष्ट करने तक के आरोप लगे।
प्रमुख कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों पर अपने निजी लाभ के लिए सैकड़ों मिलियन डॉलर बेईमानी से निकालने के इल्ज़ाम लगे।
प्रमाणित हुआ कि वॉल स्ट्रीट के सिक्योरिटी ऐनलिस्ट सार्वजनिक रूप से जिन शेयरों की प्रशंसा करते थे, निजी तौर स्वीकार करते थे कि वे दरअसल, कूड़ा थे।
एक शेयर बाज़ार, जो भयावह गिरावट के बावजूद ऐतिहासिक पैमानों पर कुछ ज़्यादा ही वैल्यू वाला लगता है, अनेक विशेषज्ञ उसके लिए ऐसा मानते हैं कि शेयर अभी और गिरने वाले हैं।
ब्याज दरों में निरंतर गिरावट से निवेशकों के पास शेयरों के अलावा अन्य कोई आकर्षक विकल्प नहीं बचा।
निवेश का वातावरण, वैश्विक आतंकवाद और मध्य पूर्व में युद्ध के अप्रत्याशित ख़तरे से भरा हुआ था।
ग्राहम के सिद्धांतों को सीखने और उनका अनुपालन करने वाले निवेशक इस तरह के नुक़सान से काफ़ी हद तक बच गए थे। जैसा कि ग्राहम ने कहा है, “यद्यपि महान उपलब्धियों के लिए उत्साह होना ज़रूरी है, लेकिन वॉल स्ट्रीट में यह निश्चित ही बर्बादी की ओर ले जाता है।” इंटरनेट शेयरों, ‘अधिक वृद्धि’ वाले शेयरों और कुल मिलाकर शेयरों के प्रवाह में बहने वालों ने वही ग़लती की, जो सर आइजैक न्यूटन ने की थी। उन्होंने अन्य निवेशकों के फ़ैसलों को अपने फ़ैसलों पर हावी होने दिया। उन्होंने ग्राहम की उस चेतावनी को अनदेखा किया, जिसमें उन्होंने कहा है कि वास्तव में भयावह नुक़सान हमेशा तभी होते हैं, जब ख़रीदार यह पूछना भूल जाए कि ‘कितनी कमाई होगी?’ और सबसे दुखद कि वे अपना आत्म-नियंत्रण तब खो देते हैं, जब उन्हें उसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है, इन लोगों ने ग्राहम के दावे की पुष्टि की है कि “निवेशक की मुख्य समस्या - और यहाँ तक कि उसका सबसे बड़ा दुश्मन - वह स्वयं होता है”।
बात, जो निश्चित नहीं थी
इनमें से ज़्यादातर लोगों के आवेग में बह जाने का कारण, विशेष रूप से टेक्नोलॉजी और इंटरनेट शेयरों से जुड़े इस प्रचार पर यक़ीन करना रहा कि हमेशा नहीं, तो कम से कम आने वाले कुछ वर्षों तक तो यह इंडस्ट्री सबसे बढ़कर रहेगी।
1999 के मध्य में, वर्ष के पहले पाँच महीनों में ही 117.3% का रिटर्न अर्जित करने के बाद मॉन्यूमेंट इंटरनेट फ़ंड के पोर्टफ़ोलियो मैनेजर अलेक्जेंडर चेउंग ने भविष्यवाणी कर दी कि अगले तीन से पाँच वर्षों तक उनके फ़ंड में 50% तक की वृद्धि होगी और अगले 20 वर्षों से अधिक तक इसका वार्षिक औसत 35% रहेगा।5
1999 में अपने एमेरिन्डो टेक्नोलॉजी फ़ंड में 248.9% की शानदार वृद्धि के बाद, पोर्टफ़ोलियो मैनेजर अल्बर्टो विलर ने ऐसे हर एक व्यक्ति का मज़ाक़ उड़ाया, जिसने इंटरनेट के सतत रूप से धनार्जन मशीन बनने पर संदेह किया था: “अगर आप इस क्षेत्र से बाहर हैं, तो आपका प्रदर्शन इष्टतम नहीं है। आप घोड़ा-गाड़ी में सवार हैं और मैं पॉर्श कार में हूँ। अगर आपको दस गुना तरक़्क़ी नहीं करनी? तो कहीं और निवेश करें।”6
फ़रवरी, 2000 में हेज-फ़ंड मैनेजर जेम्स जे. क्रैमर ने ऐलान किया कि इंटरनेट से संबंधित कंपनियाँ ही ऐसी हैं, जिन्हें अब ख़रीदना चाहिए। “वे ही नए जगत की विजेता हैं”, जैसा कि उन्होंने इन्हें कहा, “केवल वही ऐसी हैं, जो अच्छे और बुरे दोनों वक़्त लगातार बढ़ती रहेंगी।” क्रैमर ने यहाँ तक कि ग्राहम पर प्रहार करते हुए कहा था, “आपको वेब से पहले के अपने सभी फ़ॉर्मूलों और मॉडल को छोड़ देना चाहिए… अगर हमने ग्राहम और डॉड की सिखाई किसी भी चीज़ पर अमल किया, तो सँभालने के लिए एक पैसा भी नहीं बचेगा।”7
इन सब कथित विशेषज्ञों ने ग्राहम की विनम्र चेतावनी को अनदेखा कर दिया कि “व्यवसाय में भौतिक उन्नति की स्पष्ट संभावनाएँ निवेशकों के स्पष्ट मुनाफ़े में परिवर्तित नहीं होतीं।” जहाँ पहले ही यह आसानी से देखा जा सकता है कि कौन सी इंडस्ट्री सबसे तेज़ी से बढ़ेगी, वहाँ इस पूर्वज्ञान का वास्तव में तब कोई मोल नहीं, जब अधिकांश निवेशक पहले ही इसकी उम्मीद लगा चुके हों। जब तक सब फ़ैसला करते हैं कि वह इंडस्ट्री निवेश के लिए स्पष्ट रूप से सर्वोत्तम है, तब तक उसके शेयर के भाव इतने अधिक हो गए होते हैं कि भविष्य में इसका रिटर्न बस नीचे ही जाएगा।
अब कम से कम किसी में इतनी ढिठाई तो नहीं होगी कि वह अभी भी टेक्नोलॉजी को दुनिया की सबसे ज़्यादा तरक़्क़ी करने वाली इंडस्ट्री होने का दावा करने का प्रयास करे, लेकिन आपको यह याद रखना चाहिए कि: “वे लोग जो अब दावा करते हैं कि अब अगली सुनिश्चित चीज़ हेल्थ केयर, या ऊर्जा, या रियल एस्टेट, या स्वर्ण होगा, तो अंत में उनके उसी तरह ग़लत साबित होने की संभावना है, जैसा कि टेक्नोलॉजी के प्रचारक साबित हुए हैं।”
सिल्वर लाइनिंग
अगर 1990 के दशक में शेयरों के लिए कोई भी भाव बहुत ज़्यादा नहीं लगता था, तो 2003 में हम उस बिंदु पर पहुँच गए, जहाँ कोई भी भाव पर्याप्त रूप से कम नहीं लगता था। पेंडुलम तर्कहीन उत्साह से असंगत निराशा तक वैसे ही डोल रहा था, जैसा कि ग्राहम हमेशा से जानते थे। 2002 में, निवेशकों ने स्टॉक म्यूचुअल फ़ंड से 27 बिलियन डॉलर निकाल लिए तथा सिक्योरिटीज़ इंडस्ट्री असोसिएशन ने अपने एक सर्वे में पाया कि हर 10 में से एक निवेशक ने शेयरों में कम से कम 25% कटौती की। वे लोग जो 1990 के अंत के दशक में शेयर ख़रीदने को लालायित थे, जबकि उनके भाव बढ़ रहे थे और जिस कारण वे महँगे थे, उन्होंने शेयरों को तब बेच दिया, जब उनके भाव कम हुए, या वे स्पष्ट रूप से सस्ते थे।
जैसा कि ग्राहम ने अध्याय 8 में शानदार तरीक़े से दर्शाया है, यह ठीक उसके उलट है। इंटेलिजेंट इन्वेस्टर जानता है कि भाव बढ़ने के कारण शेयर, कम नहीं, बल्कि ज़्यादा जोखिम वाला हो जाता है - और भाव गिरने पर, ज़्यादा नहीं, बल्कि कम जोखिमपूर्ण होता है। बुद्धिमान निवेशक तेज़ी के बाज़ार से दूर रहता है, क्योंकि इसमें शेयर ख़रीदना ज़्यादा महँगा होता है। और इसके विपरीत (जब तक आपके पास अपनी ज़रूरतों के लायक़ पर्याप्त धन हो), आपको मंदी के बाज़ार का स्वागत करना चाहिए, क्योंकि इस दौरान शेयर फिर से बिकने लगते हैं।8
तो उत्साह बनाए रखें: तेज़ी के बाज़ार का समापन बुरी ख़बर नहीं है, जैसा कि सब मानते हैं। शेयरों के भाव गिरने के शुक्रगुज़ार रहें, अब यह संपत्ति निर्माण का ज़्यादा सुरक्षित और समझदारी भरा वक़्त है। यह पुस्तक पढ़ें और ग्राहम आपको दिखाएँगे कि यह कैसे करना है।
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1इस कथन को परिप्रेक्ष्य में रखने के लिए, ज़रा विचार करें कि ऐसा कितनी बार होने की संभावना है कि आप 30 डॉलर में एक शेयर ख़रीदें और उसे 600 डॉलर में बेच पाएँ।
2बेंजामिन ग्राहम, द इंटेलिजेंट इन्वेस्टर (हार्पर ऐंड रो, 1949), पृष्ठ 4.
3‘हेज फ़ंड’ धन का पूल होता है। यह काफ़ी हद तक सरकार के नियंत्रण से बाहर होता है। इसे धनी ग्राहकों के वास्ते आक्रामक तरीक़े से निवेश करने के लिए उपयोग किया जाता है। एलटीसीएम कहानी के शानदार विवरण को पढ़ने के लिए रोज़र लोवेनस्टीन द्वारा लिखित ‘व्हेन जीनियस फ़ेल्ड’ (रैंडम हाउस, 2000) देखें।
4जॉन कार्सवेल, द साउथ सी बबल (क्रेसिट प्रेस, लंदन, 1960), पृष्ठ. 131, 199A www.harvard-magazine.com/issues/mj99/damnd.html भी देखें।
5कॉन्स्टेंस लोइज़ोस, “क्यू ऐंड ए: एलेक्स चेउंग,” इन्वेस्टमेंट न्यूज़, 17 मई, 1999 पृष्ठ 38। म्यूचुअल फ़ंड के इतिहास में 20 साल का सबसे अधिक रिटर्न 25.8 प्रतिशत प्रति वर्ष रहा है। फ़िडेलिटी मैगलन के प्रसिद्ध पीटर लिंच ने इस रिटर्न को 31 दिसंबर, 1994 को समाप्त हुए दो दशकों की अवधि में हासिल किया था। लिंच ने अपने प्रदर्शन से 10,000 डॉलर को 20 वर्षों में 982,000 डॉलर में बदल दिया था। चेउंग ने भविष्यवाणी की थी कि उसका फ़ंड इस अवधि में 10,000 डॉलर को 4 मिलियन डॉलर बना देगा।
…चेउंग को अतिआशावादी मानने की बजाय, लोगों ने उस पर पैसों की बौछार कर दी। अगले एक वर्ष में लोगों ने उसके फ़ंड में 100 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया। उधर, मई 1999 में मॉन्यूमेंट इंटरनेट फ़ंड में किया गया 10,000 डॉलर का निवेश 2002 के अंत तक घट कर लगभग 2000 डॉलर हो गया होता। (मोन्यूमेंट फ़ंड अब अपने मूल रूप में अस्तित्व में नहीं है। इसे अब ‘ऑर्बिटेक्स इमर्जिंग टेक्नोलॉजी फ़ंड’ के नाम से जाना जाता है।
6लिसा रीली कुलेन, ट्रिपल डिजिट क्लब, मनी, दिसंबर, 1999, पृष्ठ 170। यदि आपने 1999 के अंत तक में विलर के फ़ंड में 10,000 डॉलर निवेश किया होता तो 2002 के अंत तक आपके पास 1,195 डॉलर बचे होते - यानी यह म्यूचुअल फ़ंड के इतिहास में संपत्ति का सबसे अधिक मूल्य पतन था।
7www.thestreet.com/funds/smarter/891820.html देखें। क्रैमर के पसंदीदा स्टॉक की क़ीमतें अच्छे और बुरे दिनों में लगातार ऊपर नहीं गईं। 2002 के अंत तक क्रैमर के चुने हुए 10 स्टॉक में से एक दिवालिया हो चुका था। यही नहीं, क्रैमर के चुने हुए स्टॉक में किए गए 10,000 डॉलर का निवेश का मूल्य इस दौरान 94 प्रतिशत घट कर मात्र 597.44 डॉलर रह गया होता। शायद क्रैमर का मतलब था कि उनके स्टॉक ‘नए विश्व’ में विजेता नहीं होंगे, बल्कि आने वाले विश्व में होंगे।
8एक ऐसा निवेशक, जिसे सेवानिवृत्त हुए लंबा समय बीत चुका हो और जो बाज़ार में एक लंबी अवधि तक मंदी को देखने के लिए ज़िंदा न रहे, वह इस नियम का एकमात्र अपवाद हो सकता है। हालाँकि एक वृद्ध निवेशक को भी अपने शेयर सिर्फ़ इसलिए नहीं बेच देने चाहिए, क्योंकि उनकी क़ीमतें घट गईं हैं। ऐसा क़दम काग़ज़ पर हुए नुक़सान को न केवल वास्तविक नुक़सान में बदल देता है, बल्कि उनके उत्तराधिकारियों को कर के दृष्टिकोण से कम क़ीमत पर स्टॉक को प्राप्त करने के अवसर से वंचित भी रखता है।
अध्याय 1
निवेश बनाम स्पेक्युलेशन : वे परिणाम, जो इंटेलिजेंट इन्वेस्टर चाहता है
इस अध्याय में उन विचारों का ख़ाका दिया जाएगा, जिन्हें हम आगे पुस्तक में उल्लेखित करेंगे। शुरुआत में हमारी इच्छा ख़ासतौर पर ग़ैर-पेशेवर निजी निवेशक के लिए उचित पोर्टफ़ोलियो पॉलिसी अवधारणा को विकसित करना है।
निवेश बनाम स्पेक्युलेशन
‘निवेशक’ का क्या मतलब है? पूरी पुस्तक में इस शब्द को ‘स्पेक्युलेटर’ के विपरीत इस्तेमाल किया जाएगा। बहुत पहले 1934 में हमारी पुस्तक सिक्योरिटी एनालिसिस,1 में हमने इन दोनों के बीच स्पष्ट अंतर को दर्शाने का प्रयास किया था, जो यह था: “निवेश क्रिया वह है, जिसमें विश्लेषण के माध्यम से मूल पूँजी की सुरक्षा और समुचित रिटर्न को तय किया जाता है। जिन कार्यों में इसकी आवश्यकता नहीं पड़ती, वह स्पेक्युलेशन है।”
हम इस परिभाषा पर अगले 38 वर्षों तक दृढ़ रहे, लेकिन इस अवधि में ‘निवेशक’ शब्द के उपयोग में जो आमूल-चूल परिवर्तन हुए, उन पर चर्चा करना उपयुक्त होगा। 1929-1932 में बाज़ार में बड़ी गिरावट के बाद सभी सामान्य शेयरों को मोटे तौर पर स्पेक्युलेटिव प्रकृति का माना जाने लगा। (एक प्रमुख अधिकारी ने साफ़ तौर पर कहा था कि निवेश के लिए केवल बांड्स ही ख़रीदने चाहिए।2)। इसलिए हमें तब अपनी परिभाषा को इस आरोप से बचाना पड़ा था कि इसने निवेश की धारणा को काफ़ी व्यापक बना दिया था।
अब हमें अलग तरह की चिंता है। हमें अपने पाठकों को इस ‘आम शब्दजाल’ को स्वीकार करने से बचाना है, जो शेयर बाज़ार में किसी को भी और हर किसी को ‘निवेशक’ बता देते हैं। अपने पिछले संस्करण में हमने जून, 1962 की अपनी प्रसिद्ध वित्त पत्रिका के आमुख लेख के निम्न शीर्षक का दृष्टांत दिया था:
छोटे निवेशकों में मंदी का रुख़, बहुत ज़्यादा शॉर्ट सेलिंग में जुटे
अक्टूबर, 1970 में, इसी पत्रिका में ‘असावधान निवेशकों’ पर आलोचनात्मक संपादकीय का प्रकाशन हुआ था, जो उस वक़्त ख़रीदने की होड़ में शामिल थे।
ये उद्धरण उस श्रम को साफ़ तौर पर दर्शाते हैं, जो निवेश और स्पेक्युलेशन शब्दों के उपयोग में अनेक वर्षों से प्रमुख रहा है। हमारी ऊपर बताई निवेश की परिभाषा पर विचार करें और फिर इसकी तुलना समाज के एक ग़ैर-अनुभवी सदस्य द्वारा किसी स्टॉक के कुछ शेयरों की बिक्री से करें, जिसे यह भी न पता हो कि वह क्या बेच रहा है। इस सदस्य को काफ़ी हद तक भावनात्मक आधार पर विश्वास हो कि वह इन्हें बहुत ही कम भाव पर फिर ख़रीद लेगा। (इस बिंदु पर यह कहना अप्रासंगिक नहीं होगा कि जब 1962 में यह लेख बाज़ार में आया, तब तक बाज़ार में पहले ही बड़ी गिरावट आ चुकी थी, और अब वह नई शानदार तेज़ी की तैयारी में था। यह शॉर्ट सेलिंग का जितना संभव हो सके, उतना बुरा वक़्त था)। अधिक सामान्य अर्थों में, बाद में इस्तेमाल हुए ‘असावधान निवेशक’ शब्द को कई बार, ‘ख़र्चीला कंजूस’ जैसे हास्यजनक विरोधाभास के तौर पर लिया जा सकता है, जो शरारत नहीं, बस भाषा का दुरुपयोग है।
अख़बार ‘निवेशक’ शब्द का इसी तरह उपयोग करते हैं, क्योंकि वॉल स्ट्रीट की सरल भाषा में, (प्रतिभूति) सिक्योरिटी ख़रीदने या बेचने वाला हर व्यक्ति निवेशक होता है, फिर भले ही वह कुछ भी या किसी भी उद्देश्य से, या किसी भी भाव पर या नक़द या मार्जिन किसी पर भी ख़रीद रहा हो। इसकी तुलना 1948 में जनता के सामान्य शेयरों के प्रति दृष्टिकोण से कीजिए, जब प्रश्न पूछे जाने वालों में से 90% ने सामान्य शेयरों की ख़रीद का विरोध किया था।3 उनमें से आधे लोगों ने इसका कारण इसका ‘असुरक्षित’ व ‘जुए’ जैसा होना, और शेष आधे ने इसकी जानकारी न होना कारण बताया।* निश्चित ही यह विडंबना है, (हालाँकि हैरानी नहीं) कि हर तरह के सामान्य-शेयर की ख़रीद को आमतौर पर काफ़ी हद तक अत्यधिक स्पेक्युलेटिव या जोखिमपूर्ण माना जाता था, वह भी उस वक़्त जब वे इसे अत्यधिक आकर्षक आधार पर बेच रहे होते थे, और जल्दी ही इतिहास की सबसे बड़ी बढ़त शुरू होने ही वाली थी। इसके उलट तथ्य यह भी था कि वस्तुतः वे स्पष्ट रूप से बीते अनुभवों के कारण ख़तरनाक स्तर माने जाने वाले स्तर से आगे बढ़ गए थे, जो निवेश में परिवर्तित हो गया था, और शेयर ख़रीदने वाली सारी जनता निवेशक हो गई थी।
साधारण शेयरों में निवेश और स्पेक्युलेशन के बीच का अंतर हमेशा से उपयोगी रहा है और इसका लुप्त होना चिंता का कारण होता है। हमने अक्सर वॉल स्ट्रीट को बतौर संस्थान यह सलाह दी है कि वह इस अंतर को पुनः स्थापित करे तथा जनता के साथ अपने सभी कारोबार में इस पर ज़ोर दे, अन्यथा स्पेक्युलेशन से भारी हानि का दोष किसी न किसी दिन स्टॉक एक्सचेंज पर ही आएगा कि इसने शिकार बने लोगों को समुचित चेतावनी नहीं दी। विडंबना देखिए कि एक बार फिर, कुछ स्टॉक एक्सचेंज फ़र्मों में हाल ही में हुई वित्तीय परेशानियों का कारण उनका स्पेक्युलेटिव सामान्य शेयरों को अपने ख़ुद के मूल पूँजी फ़ंड में शामिल करना रहा। हमें विश्वास है कि इस पुस्तक के पाठक सामान्य शेयरों से संबंधित अंतर्निहित जोखिमों के बारे में साफ़ तौर पर समझ जाएँगे। ऐसे जोखिम, जो उनसे मिलने वाले मुनाफ़े के मौक़ों में अनिवार्य रूप से होते हैं तथा इन दोनों को निवेशक को अपनी गणनाओं में अवश्य शामिल करना चाहिए।
हमने अभी जो कहा है, यह इस बात का संकेत है कि साइमन-प्योर इन्वेस्टमेंट पॉलिसी जैसी अब कोई चीज़ नहीं है, जिसमें प्रतिनिधि साधारण शेयर समावेशित हों - इस तरह से कोई व्यक्ति उन्हें इस भाव पर ख़रीदने की प्रतीक्षा कर सके, जिसमें बाज़ार संबंधी जोखिम न हो अथवा ‘कोटेशनल घाटा’ इतना बड़ा हो कि बेचैन कर दे। निवेशक को बहुधा अपनी शेयर होल्डिंग में स्पेक्युलेटिव फ़ैक्टर होने पर नज़र रखनी चाहिए। यह उसका काम है कि वह इस घटक को न्यूनतम सीमा में रखे, और वित्तीय और मानसिक तौर पर बुरे से बुरे परिणामों के लिए तैयार रहे, जो कम या लंबी अवधि के भी हो सकते हैं।
यहाँ स्टॉक स्पेक्युलेशन से संबंधित दो पैरा और होने चाहिए, क्योंकि जैसा कि अब सब जानते हैं कि स्पेक्युलेटिव घटक अधिकांश प्रतिनिधि सामान्य शेयरों में अंतर्निहित होते हैं। स्पष्ट स्पेक्युलेशन न तो अवैध है, न अनैतिक और न ही (अधिकांश लोगों के लिए) इसे सीखना मुश्किल है। इसके अलावा, कुछ हद तक स्पेक्युलेशन आवश्यक व अपरिहार्य है, क्योंकि बहुत से साधारण शेयरों में लाभ और हानि दोनों की पर्याप्त संभावनाएँ होती हैं, तथा इसके जोखिम की भी कल्पना कर लेनी चाहिए।’*इंटेलिजेंट इन्वेस्टमेंट की तरह इंटेलिजेंट स्पेक्युलेशन भी होता है, लेकिन ऐसे भी बहुत से तरीक़े हैं, जिनमें स्पेक्युलेशन बुद्धिमानी नहीं होता। इनमें से कुछ प्रमुख हैं: (1) स्पेक्युलेशन करते हुए इसे निवेश समझना, (2) समुचित ज्ञान और कौशल न होने के के बावजूद स्पेक्युलेशन को विनोद की जगह गंभीरता से लेना, और (3) जितना नुक़सान सह सकते हैं, उससे ज़्यादा धन स्पेक्युलेशन में लगाना।
हमारी रूढ़िवादी सोच के अनुसार प्रत्येक ग़ैर-पेशेवर जो मात्र मार्जिन पर काम कर रहा है† वह स्वतः सिद्ध स्पेक्युलेशन कर रहा है, और यह उसके ब्रोकर का काम है कि उसे सही सलाह दे। और जो कोई भी कथित, ‘लोकप्रिय’ सामान्य-शेयर ख़रीद रहा है, या ऐसी ही कोई चीज़ ख़रीद रहा है, तो यह या तो स्पेक्युलेशन है या जुआ। स्पेक्युलेशन हमेशा से ही मोहक रहा है, और अगर आप इस खेल में माहिर हैं, तो यह बहुत आनंददायी भी है। लेकिन अगर आप इसमें अपना भाग्य आज़माना चाहते हैं, तो अपनी मूल पूँजी का कुछ हिस्सा - जो जितना कम उतना अच्छा है - को इस उद्देश्य से अलग निकाल लें। इस खाते में और ज़्यादा धन केवल इसलिए न जोड़ें, क्योंकि बाज़ार चढ़ रहा है और मुनाफ़ा बढ़ रहा है (यह वक़्त अपने स्पेक्युलेशन फ़ंड से पैसा निकालने का है)। अपने स्पेक्युलेटिव और निवेश परिचालन को एक ही खाते से न करें, न ऐसा सोचें।
रक्षात्मक निवेशक की परिणाम प्रत्याशा
हमने पहले ही बताया है कि रक्षात्मक निवेशक वह है, जो मुख्य रूप से सुरक्षा में रुचि रखता है तथा परेशानियों से मुक्त रहकर निवेश करता है। सामान्य रूप से कहें, तो कि ‘औसत सामान्य हालात’ में उसे कौन सा मार्ग लेना चाहिए और वह कितने रिटर्न की उम्मीद कर सकता है - अगर ऐसे किन्हीं हालात का अस्तित्व वास्तव में है? इस सवालों के जवाब देने से पहले हमें विचार करना होगा कि सात वर्ष पूर्व हमने इस विषय पर क्या लिखा था, दूसरा, तब से अब तक निवेश के आशानुकूल रिटर्न को शासित करने वाले अंतर्निहित कारकों में कौन से अहम बदलाव हो गए हैं और अंत में मौजूदा हालात (1972 की शुरुआत) में उसे क्या करना चाहिए और वह किसकी उम्मीद कर सकता है।
1. हमने छह वर्ष पहले क्या कहा था
हमने अनुशंसा की थी कि निवेशक अपनी होल्डिंग्स को हाई-ग्रेड बांड्स और प्रमुख सामान्य शेयरों में बाँट दे, जिसमें बांड्स का अनुपात 25% से कम तथा 75% से अधिक न हो, तथा सामान्य शेयरों के लिए इससे उलट अनिवार्य रूप से सच होगा। उसका सरलतम विकल्प दोनों के बीच 50-50 का अनुपात बनाए रखना चाहिए, जिसमें तब समानता को संतुलित करना होगा, जब बाज़ार गतिविधियाँ इसमें लगभग 5% का बदलाव कर दें। वैकल्पिक पॉलिसी के तौर पर वह अपने सामान्य शेयरों को 25% तक कम करने का चयन कर सकता है, “अगर उसे महसूस हो कि बाज़ार में ख़तरनाक स्तर की तेज़ी है” और इससे उलट यह इसे अधिकतम 75% तक बढ़ा सकता है, “अगर उसे लगे कि शेयर के भाव में गिरावट उन्हें अत्यधिक आकर्षक बना रही है।”
1965 में, निवेशक 4.5% हाई-ग्रेड टैक्सेबल बांड तथा 3.5% अच्छे टैक्स-फ़्री बांड्स ले सकते थे। प्रमुख सामान्य शेयरों पर यह लाभांश रिटर्न (892 के डीजेआईए के साथ) केवल लगभग 3.2% था। यह व अन्य तथ्य सावधान करते हैं। हमने कहा था कि बाज़ार सामान्य स्तर पर हो, तो निवेशक अपने ख़रीदे शेयरों पर शुरुआती लाभांश रिटर्न 3.5% और 4.5% के बीच हासिल कर सकेगा, जिसमें लगभग उसी राशि की प्रतिनिधि स्टॉक सूची के अंतर्निहित मूल्य में लगातार वृद्धि (और सामान्य बाज़ार भाव में) को जोड़ा जाना चाहिए। इससे लाभांशों और अधिमूल्यनों को जोड़ कर 7.5% सालाना रिटर्न मिलेगा। बांड्स और स्टॉक्स में आधा-आधा विभाजन आयकर में कटौती से पहले क़रीब 6% प्रतिशत लाभ देगा। हमने जोड़ा था कि बड़े पैमाने पर मुद्रास्फीति के कारण क्रय शक्ति के नुक़सान के ख़िलाफ़ स्टॉक घटक में उचित स्तर की सुरक्षा करें।
इसका उल्लेख किया जाना चाहिए कि उपरोक्त अंकगणित शेयर बाज़ार के बढ़ने की बहुत कम दर की उम्मीद को व्यक्त करता है, जबकि इससे कहीं ज़्यादा बढ़त 1949 और 1964 के बीच हासिल कर ली गई थी। सूचीबद्ध स्टॉक्स के लिए यह दर शानदार थी। उनमें औसत बढ़त 10% से ज़्यादा थी। इसे सामान्य तौर पर गारंटी के हिसाब से देखा जाता था कि ऐसे ही संतोषजनक परिणाम आने वाले समय में मिलेंगे, जिन पर भरोसा किया जा सकता है। कुछ ही लोग इस संभावना पर गंभीरता से विचार करने को तैयार थे कि अतीत में बढ़ने की उच्च दरों का मतलब है कि स्टॉक की क़ीमतें ‘अब बहुत अधिक’ हैं। और इसलिए कि 1949 के बाद आश्चर्यजनक परिणामों का मतलब भविष्य के लिए बहुत अच्छे नहीं, बल्कि बुरे परिणाम है।4
2. वर्ष 1964 से अब तक क्या हुआ
1964 के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ कि फ़र्स्ट-ग्रेड बांड्स की ब्याज दरों में रिकॉर्ड उच्च स्तर की वृद्धि हुई, हालाँकि 1970 के न्यूनतम भाव के मुक़ाबले काफ़ी रिकवरी हो चुकी है। अच्छे संस्थागत शेयरों पर प्राप्त रिटर्न अब लगभग 71/2% है, जो 1964 के 41/2% से अधिक ही है। इसी बीच, डीजेआईए-टाइप शेयरों के लाभांश रिटर्न में हो रही अच्छी बढ़त 1969-70 में बाज़ार गिरने के दौरान भी जारी रही, लेकिन हमारे यह लिखते वक़्त (जब डाउ 900 पर है), तब यह 1964 के अंत के 3.2% के मुक़ाबले 3.5% से कम है। इस अवधि के दौरान ब्याज दरों में आए बदलावों से मीडियम-टर्म बांड्स (मानो 20-वर्ष) के बाज़ार भाव में अधिकतम लगभग 38% गिरावट आई।
यह इस तरक़्क़ी का विरोधाभासी पहलू भी है। 1964 में हमने विस्तार से इस संभावना पर चर्चा की थी कि शेयरों के भाव संभवतः काफ़ी अधिक हैं और यह अंततः बड़ी गिरावट का कारण बनेगा, लेकिन हमने इस संभावना पर विशेष रूप से विचार नहीं किया था कि ऐसा ही उच्च-ग्रेड बांड्स के साथ भी हो जाएगा। (न ही हमारे किसी अन्य जानने वाले ने किया) हमने यह चेतावनी दी थी कि “ब्याज दरों में बदलावों के कारण दीर्घावधिक बांड के भाव काफ़ी भिन्न हो सकते हैं।” तब से जो कुछ भी हो रहा है, उस आलोक में सोचें, तो इस चेतावनी पर - संबंधित उदाहरणों सहित - अपर्याप्त रूप से ज़ोर दिया जा रहा है, क्योंकि तथ्य यह है कि अगर निवेशक के पास 1964 में डीजेआईए में 874 के बंद भाव पर उक्त राशि होती, तो 1971 के अंत में उसे बहुत थोड़ा सा मुनाफ़ा हुआ होता। यहाँ तक कि 1970 के न्यूनतम स्तर (631) पर उसकी सांकेतिक हानि अच्छे दीर्घावधिक बांड्स से कम रहती। दूसरी ओर, अगर वह अपने बांड-सरीखे निवेश को यूएस सेविंग्स बांड्स, शॉर्ट-टर्म कॉर्पोरेट इश्यू, या सेविंग्स अकाउंट तक सीमित रखता, तो इस अवधि के दौरान उसकी मूल पूँजी के बाज़ार मूल्य में कोई हानि नहीं होती और वह उससे अधिक रिटर्न हासिल करता, जो किसी अच्छे शेयर से प्राप्त होता। इस तरह, यह पता चलता है कि 1964 में ‘नक़द तुल्य’ निवेश साधारण शेयरों से ज़्यादा बेहतर साबित हुए, जबकि मुद्रास्फीति भी थी, जो सिद्धान्तः शेयरों को नक़द से प्रधान मानती है। अच्छे दीर्घावधिक बांड्स की उद्धृत प्रधान मूल्य में कमी कारण मुद्रा बाज़ार के घटनाक्रम थे। एक दुर्बोध्य क्षेत्र जिसका साधारणतः व्यक्ति की निवेश पॉलिसी पर कोई अहम प्रभाव नहीं होता।
यह समय के साथ मिलने वाले अनुभवों की अनंत श्रंखला में से बस एक है, जो यह दर्शाती है कि प्रतिभूतियों के भावी भाव का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता।* लगभग हमेशा ही बांड्स में शेयरों के भाव की तुलना में बहुत कम अस्थिरता रहती है। निवेशक आमतौर पर बिना बाज़ार मूल्य में अधिक बदलाव की परवाह किए कितने भी वक़्त में परिपक्व होने वाले अच्छे बांड्स को ख़रीद सकते हैं। इस नियम में कुछ अपवाद भी थे, जिसे 1964 के बाद की अवधि ने साबित भी कर दिया। हम आगामी अध्यायों में बांड के भाव परिवर्तन के बारे में और भी बहुत कुछ बताना चाहेंगे।
3. 1971 के अंत व 1972 की शुरुआत में उम्मीदें व नीतियाँ
1971 का अंत होने तक अच्छे मध्यावधिक कॉर्पोरेट बांड्स पर 8% कराधीन ब्याज, और अच्छी राज्य व निगम प्रतिभूतियों पर कर-मुक्त 5.7% ब्याज पाना संभव था। लघु-आवधिक के क्षेत्र में निवेशकों को अमेरिकी सरकार के पाँच वर्षीय इश्यू पर लगभग 6% मिल जाता था। इस दूसरे तरीक़े में क्रेता को इसके बाज़ार मूल्य में संभावित नुक़सान की चिंता नहीं रहती थी, क्योंकि उसे अंत में शॉर्ट-होल्डिंग अवधि की तुलना में 6% ब्याज रिटर्न सहित संपूर्ण धनराशि वापस मिलना निश्चित रहता था। 1971 में डीजेआईए के 900 के आवर्ती मूल्य स्तर पर केवल 3.5% रिटर्न मिलता था।
मान लीजिए हमें आज, पहले ही की तरह, यह आधारभूत नीतिगत फ़ैसला करना है कि पूँजी को हाई-ग्रेड बांड्स (या अन्य कथित नक़द तुल्य) व प्रमुख डीजेआई ए-टाइप शेयरों के बीच किस तरह विभाजित करें, तो अगर हमारे पास निकट भविष्य में बड़ी बढ़ोतरी या बड़ी गिरावट का के पूर्वानुमान का कोई ठोस कारण न हो तो मौजूदा हालात में हम कौन सा रास्ता लेंगे? मान लीजिए हम अनुमान लगाते हैं कि अगर कोई गंभीर प्रतिकूल बदलाव नहीं होते, तो सुरक्षात्मक निवेशक को अपने शेयरों पर चालू 3.5% लाभांश रिटर्न तथा लगभग 4% की औसत वार्षिक वृद्धि का विश्वास रखना चाहिए। हम यह बाद में स्पष्ट करेंगे कि इस वृद्धि का आधार अनिवार्य रूप से विभिन्न कंपनियों का वार्षिक ग़ैर-वितरित मुनाफ़े की राशि को पुनः निवेशित करना होता है। कर-पूर्व आधार पर उसके शेयरों का संयुक्त रिटर्न औसतन 7.5% हो सकता है, जो उसके हाई-ग्रेड बांड्स से थोड़ा कम है।* तथा कर-पश्चात आधार पर शेयरों पर औसत रिटर्न 5.3% के क़रीब आएगा।5 यह लगभग उतना ही है, जितना किसी अच्छे टैक्स-फ़्री मध्यावधिक बांड्स पर मिल सकता है।
आज ये उम्मीदें 1964 में विश्लेषण की तुलना में बांड्स के मुक़ाबले शेयरों की कम पक्षधर हैं। (यह निष्कर्ष अनिवार्य रूप से उस बुनियादी तथ्य का अनुपालन करता है कि 1964 से बांड्स से प्राप्त रिटर्न शेयरों के रिटर्न के मुक़ाबले बहुत अधिक है) हमें यह तथ्य नहीं भूलना चाहिए कि अच्छे बांड्स पर ब्याज और मूल पूँजी भुगतान अधिक सुरक्षित होता है और इस कारण वे लाभांश और शेयरों की भाव वृद्धि से अधिक सुनिश्चित होता है। इसके साथ ही, हम मज़बूरन यह निष्कर्ष दे रहे हैं कि आज, वर्ष 1971 के अंत में, बांड निवेश स्पष्ट रूप से शेयर निवेश से अधिक बेहतर है। अगर हमें इस निष्कर्ष के सही होने का भरोसा है, तो हमें सुरक्षात्मक निवेशक को सुझाव देना चाहिए कि वह अपना सारा धन बांड्स में लगाए न कि साधारण शेयरों में, जब तक चालू रिटर्न के संबंध में महत्त्वपूर्ण बदलाव होकर वह शेयरों के पक्ष में न हो जाए।
लेकिन निश्चित ही, आज के स्तर पर हम पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि बांड्स का प्रदर्शन शेयरों से बेहतर होगा। पाठक तुरंत ही दूसरे पक्ष के तौर पर मुद्रास्फीति कारक को संभावित कारण के तौर पर सोच लेंगे। अगले अध्याय में हम तर्क देंगे कि लाभों में वर्तमान भिन्नताओं को देखते हुए अमेरिकी मुद्रास्फीति पर हमारा विशिष्ट अनुभव इस सदी में बांड्स की जगह शेयरों को चुनने का समर्थन नहीं करता, लेकिन एक संभावना हमेशा रहेगी - हालाँकि हमने इसे दूर की कौड़ी माना है - कि मुद्रास्फीति बढ़ जाए, जो किसी न किसी मायने में शेयर इक्विटीज़ को बांड्स से बेहतर बना देगी, जिसका भुगतान डॉलर में निर्धारित रक़म में है।* एक वैकल्पिक संभावना भी है - जिसे हम काफ़ी हद तक असंभावित मानते हैं - कि अमेरिकी कारोबार इतने अधिक लाभकारी हो जाएँ, बिना मुद्रास्फीति आए, जिससे आने वाले वर्षों में साधारण-शेयरों के मूल्य में बड़े पैमाने पर वृद्धि को औचित्यपूर्ण सिद्ध कर सकें। आख़िर में, इसके अलावा कुछ और ज्ञात संभावनाएँ भी हैं, जिनसे हम शेयर बाज़ार में बिना वास्तविक औचित्य के आधारभूत मूल्यों में अत्यधिक पूर्वानुमानित बढ़त होते देख सकते हैं। इनमें से हमारे ध्यान में न आए किसी अन्य कारण से भी निवेशक को बांड्स पर 100% ध्यान केंद्रित करने पर पछतावा हो सकता है, भले ही उसमें रिटर्न स्तर ज़्यादा अनुकूल हो।
इसलिए अधिक ध्यान रखने योग्य बातों पर इस पूर्वगामी चर्चा के बाद, हम पुनः उसी बुनियादी समझौता नीति पर बात करेंगे, जो सुरक्षात्मक निवेशकों के लिए है - ख़ासकर उन लोगों के लिए, जिन्होंने बड़ी मात्रा में धन बांड-टाइप होल्डिंग्स में और काफ़ी मात्रा में इक्विटी में लगाया है। यह आज भी सत्य है कि वे दोनों घटकों के बीच सरल 50-50 का विभाजन कर सकते हैं, या ऐसा अनुपात रख सकते हैं, जो उनके अनुकूल हो, जिसमें इनके बीच न्यूनतम 25% से अधिकतम 75% का अंतर हो सकता है। हम इन वैकल्पिक नीतियों पर अपने विस्तृत विचार आगामी अध्यायों में प्रस्तुत करेंगे।
चूँकि फ़िलहाल साधारण शेयरों से परिकल्पित कुल रिटर्न बांड्स के लगभग समान ही है, तो फ़िलहाल निवेशक को मिलने वाले अनुमानित रिटर्न (शेयरों के मूल्यों में बढ़त समेत) में कोई ज़्यादा अंतर नहीं होगा, चाहे उसने इन दोनों घटक में धन का बँटवारा किस तरह किया हो। उपरोक्त गणना के अनुसार, दोनों हिस्सों से प्राप्त औसत रिटर्न कर-पूर्व 7.8% या कर-मुक्त आधार (या अनुमानित कर के भुगतान) पर 5.5% रह सकता है। इस व्यवस्था से मिलने वाला रिटर्न उससे अधिक होगा, जो एक पारंपरिक रूढ़िवादी निवेशक ने पूर्व दीर्घावधि में पाया होगा। यह 1949 के बाद से 20 वर्षों के दौरान मुख्य रूप से तेज़ी बाज़ार से प्राप्त लगभग 14% रिटर्न के लिहाज़ से अनाकर्षक लग सकता है, लेकिन यह याद रखना होगा कि 1949 और 1969 के बीच डीजेआईए का भाव पाँच गुना से ज़्यादा हुआ है, जबकि इसकी कमाई और लाभांश दोगुने हुए हैं। अतः उस अवधि के दौरान आकर्षक बाज़ार रिकॉर्ड का कारण मुख्य रूप से निवेशकों व सटोरियों की मानसिकता में आया बदलाव था, न कि इनका आधारभूत कॉर्पोरेट मूल्य। इसे कुछ हद तक ‘बूटस्ट्रैप ऑपरेशन’ भी कहा जा सकता है।
सुरक्षात्मक निवेशक के साधारण-शेयर पोर्टफ़ोलियो की बात करें, तो हमने केवल उन प्रमुख इश्यू के बारे में ही बात की है, जो डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज़ के 30 घटकों में शामिल हैं। हमने ऐसा केवल सुविधा की दृष्टि से किया है, इससे यह कहीं साबित नहीं होता कि केवल ये 30 इश्यू ही ख़रीदने के योग्य हैं। वास्तव में, ऐसी और भी अनेक कंपनियाँ हैं, जिनकी गुणवत्ता डाउ जोंस की सूची में शामिल कंपनियों के औसत के बराबर या उससे बढ़कर ही है। इनमें पब्लिक यूटिलिटी कंपनियाँ भी शामिल हैं (जिन्हें डाउ जोंस का भिन्न एवरेज़ दर्शाता है)।* लेकिन यहाँ मुख्य बिंदु यह है कि सुरक्षात्मक निवेशकों का कुल परिणाम किसी भी अन्य विविधात्मक या प्रतिनिधि सूची से बहुत अलग नहीं होना चाहिए - या यह कहना ठीक रहेगा - कि न तो वह और न ही उसके सलाहकार यह सुनिश्चित पूर्वानुमान कर सकते हैं कि अंततः उनके बीच कितना फ़र्क़ हो सकता है। यह सच है कि दक्ष या चतुर निवेश की कला विशेष रूप से इश्यू के चयन में निहित है, जिससे सामान्य बाज़ार से अधिक बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सके। अन्य कहीं विकसित होने वाले कारणों को देखते हुए हमें सुरक्षात्मक निवेशकों के औसत से बेहतर परिणाम हासिल करने की क्षमता पर संदेह रहता है, जो वास्तव में ख़ुद उनके संपूर्ण प्रदर्शन पर पानी फेरने जैसा है।’ (हमारा संदेह विशेषज्ञों द्वारा बड़ी धनराशि के प्रबंधन तक विस्तृत है।)
हम अपनी बात को एक उदाहरण देकर स्पष्ट करते हैं, जो पहले-पहल देखने में ठीक इसके विपरीत प्रतीत होता है। दिसंबर, 1960 से दिसंबर, 1970 के बीच डीजेआईए में 616 से 839, या 36% की वृद्धि हुई, लेकिन इसी अवधि के दौरान इससे कहीं अधिक बड़े स्टैंडर्स ऐंड पुअर के 500 शेयरों के सूचकांक में 58.11 से 92.15, या 58% की वृद्धि हुई। स्पष्ट है कि दूसरा ग्रुप ख़रीद के लिहाज़ से पहले ग्रुप से बेहतर था, लेकिन 1960 में कौन इतना दुस्साहसी होता कि यह भविष्यवाणी कर सके कि सभी तरह के साधारण शेयरों में जो कई तरह का वर्गीकरण प्रतीत होता है, वह सटीक रूप से डाउ के ‘भव्य तीस तानाशाहों’ से बेहतर प्रदर्शन कर सकेगा? हम ज़ोर देकर कहते हैं कि इससे साबित होता है कि केवल कुछ ही लोग भावों के बदलाव के पूर्ण या सापेक्ष, विश्वसनीय पूर्वानुमान लगा सकते हैं।
हम यहाँ बिना किसी झिझक के फिर से दोहराते हैं कि यह चेतावनी बार-बार नहीं दी जा सकती कि निवेशक को नए, या कैसे भी ‘प्रचलित’ इश्यू अर्थात जिन्हें तुरंत मुनाफ़े के लिए अनुशंसित किया गया हो, को ख़रीदते वक़्त औसत से बेहतर परिणामों की आशा नहीं करनी चाहिए।† दीर्घावधि में इसके उलट होना लगभग सुनिश्चित होता है। सुरक्षात्मक निवेशक को ख़ुद को मज़बूत वित्तीय स्थिति में लाभकारी परिचालन का लंबा रिकॉर्ड रखने वाली महत्त्वपूर्ण कंपनियों के शेयरों तक सीमित रखना चाहिए। (कोई भी प्रतिभूति विश्लेषक जो अपने काम में माहिर हो, इस तरह की सूची बना सकता है।) आक्रामक निवेशक अन्य तरह के साधारण शेयर भी ख़रीद सकते हैं, लेकिन वे भी बुद्धिमत्तापूर्ण विश्लेषण पर आधारित आकर्षक आधार वाले होने चाहिए।
इस खंड को समाप्त करते हुए, हम यहाँ सुरक्षात्मक निवेशक की तीन सहायक अवधारणाओं या अभ्यासों का संक्षेप में उल्लेख करना चाहेंगे। पहला, अपने सामान्य-शेयर पोर्टफ़ोलियो के निर्माण के विकल्प रूप में सुव्यवस्थित निवेश फ़ंड के शेयर ख़रीदना। वह किसी आम ट्रस्ट फ़ंड या कमिंग्लेड फ़ंड्स का भी उपयोग कर सकता है, जिनका परिचालन अनेक राज्यों में ट्रस्ट कंपनियाँ और बैंक करते हैं, या अगर उसके पास धन ज़्यादा हो, तो वह मान्यता प्राप्त निवेश-सलाहकार फ़र्म की सेवाओं का उपयोग करे। इससे उसे अपने निवेश प्रोग्राम पर मानक रेखा सहित पेशेवर प्रबंधन प्राप्त होगा। तीसरा, उपकरण है - ‘डॉलर-कॉस्ट एवरेज़िंग’, जिसका बस यही मतलब है कि व्यक्ति सामान्य शेयरों में प्रति माह या हर तिमाही समान संख्या में डॉलर निवेश करे। इस तरह से, वह उस वक़्त ज़्यादा शेयर ख़रीदेगा, जब बाज़ार नीचे हो बजाय इसके जब बाज़ार में बढ़त हो, और अंत में उसे अपनी सभी होल्डिंग्स पर संतोषप्रद कुल क़ीमत हासिल होगी। वास्तव में, यह इस पद्धति से व्यापक नज़रिया काम करता है, जिसे ‘फ़ॉर्मूला इन्वेस्टिंग’ कहते हैं। यह बात हमने अपने सुझाव में पहले ही बताई है कि बाज़ार गतिविधि से उलट संबंध रखते हुए निवेशक को अपने सामान्य शेयरों में न्यूनतम 25% से अधिकतम 75% के बीच विविधता रखनी होगी। यह विचार सुरक्षात्मक निवेशकों के लिए अहम है, और इन पर आगामी अध्यायों में विस्तार से चर्चा होगी।*
आक्रामक निवेशक कैसे परिणामों की उम्मीद रखता है
निश्चित ही, हमारा उद्यमशील प्रतिभूति ख़रीदार अपने सुरक्षात्मक या शांत साथियों से अधिक बेहतर परिणाम पाने की उम्मीद रखता होगा, लेकिन सबसे पहले उसे यह तय करना चाहिए कि उसे बदतर परिणाम न मिलें। वॉल स्ट्रीट में ऐसा होना कठिन नहीं कि पूरी ऊर्जा, अध्ययन और कार्य दक्षता हासिल करने के बाद भी अंत में फ़ायदे की जगह नुक़सान हो जाए। ये गुण अगर ग़लत दिशाओं में प्रवाहित होने लगे, तो अक्षमताओं से अलग करने या जानने के योग्य नहीं रहेंगे। इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि उद्यमशील निवेशक इस साफ़ सोच के साथ शुरुआत करे कि किस प्रणाली में तर्कसंगत ढंग से सफल होने की ज़्यादा संभावना है और किस में नहीं।
सबसे पहले, हमें कुछ ऐसे तरीक़ों पर विचार करना होगा, जिनसे निवेशक और स्पेक्युलेटर्स आमतौर पर औसत से बेहतर परिणाम पाने का प्रयास करते हैं। इनमें शामिल हैं:
1. बाज़ार में ट्रेडिंग - सामान्य तौर पर इसका अर्थ बढ़ने के दौरान बाज़ार में शेयर ख़रीदना और इनके कम होने के बाद बेचना है। जिन शेयरों को चुना जाता है, उनमें बाज़ार औसत से अधिक बेहतर ‘रुख़’ होता है। कम संख्या में कुछ निवेशक सतत रूप से शॉर्ट सेलिंग करते रहते हैं। यहाँ वे उन इश्यू को बेचते हैं, जो फ़िलहाल उनके पास नहीं होते, लेकिन वे उन्हें स्टॉक एक्सचेंजों के स्थापित तंत्र द्वारा उधार लेते हैं। उनका उद्देश्य इन इश्यू के भाव में आने वाली गिरावट से लाभ उठाना होता है। वे ऐसा उन्हें बेचने के भाव से कम भाव पर ख़रीदकर करते हैं। (जैसा कि वॉल स्ट्रीट जर्नल में पृ. 19 पर हमारी उक्ति संकेत करती है कि ‘छोटे निवेशक’ - अपने शब्द के अर्थ को धता बता - कई बार शॉर्ट सेलिंग में अपने अकुशल हाथ आज़माते हैं)।
2. लघु-आवधिक चयनात्मकता - इसका मतलब उन कंपनियों के शेयर ख़रीदना है जिनकी आय बढ़ने की रिपोर्ट आ रही है या इसकी उम्मीद है, या जिनके लिए कुछ अनुकूल हालात होने की प्रत्याशा की जा रही हो।

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