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स्टॉक मार्केट में निवेश और ट्रेडिंग के सीक्रेट्स / Stock Market Mein Nivesh Aur Trading Ke Secrets PDF Download Free Hindi Book by Swaminathan Annamalai

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

नाम / Nameस्टॉक मार्केट में निवेश और ट्रेडिंग के सीक्रेट्स / Stock Market Mein Nivesh Aur Trading Ke Secrets
लेखक / Author
आकार / Size1.8 MB
कुल पृष्ठ / Pages87
Last UpdatedMarch 13, 2022
भाषा / Language Hindi
श्रेणी / Category,

इस पुस्तक को पढ़ना

क्यों जरूरी है?
क्योंकि यह आपको सिखाएगी—
• कारोबारी घंटों के दौरान पूरा समय कंप्यूटर के सामने बैठे बिना पैसे कमाना।
• मल्टीबैगर की शुरुआती चरण में पहचान करना और अधिकतम लाभ हासिल करना।
• शेयर एक्सचेंज में ट्रेड न होनेवाले गैर-सूचीबद्ध शेयरों से निपटना।
• नैकेड ऑप्शंस विक्रय द्वारा अपनी सफलता के अवसरों में वृद्धि करना।
• आई.पी.ओ. के बारे में जानकारी और आई.पी.ओ. फंडिंग किस तरह प्राप्त की जाए।
• भौतिक शेयरों को डीमैटीरियलाइज (अमूर्तिकरण) करना।
• BEES संबंधी महत्त्वपूर्ण जानकारी और क्या इसमें निवेश करना सुरक्षित विकल्प है?
• स्टॉक स्क्रीन का परिचय।
• स्टॉक मार्केट को प्रभावित करनेवाले घोटालों के विभिन्न प्रकार।
• एच.यू.एफ. के निर्माण द्वारा आय कर बचाना।
इस पुस्तक में स्टॉक मार्केट और शेयर ट्रेडिंग से जुड़े सभी विषयों को बहुत व्यावहारिक व सहज स्वीकार्य सलाहों से भरपूर हर बिंदु को आसान भाषा में समझाया गया है। आपको सिर्फ यह पुस्तक चाहिए और आप शेयर बाजार में अपना भाग्य बना सकते हैं; और वह भी बहुत आराम से।

पुस्तक का कुछ अंश

इक्विटी व स्टॉक मार्केट का ककहरा
परिचय
बहुत से लोग शेयर बाजार को जुआघर और इससे जुड़े लोगों को जुआरी के रूप में देखते हैं; लेकिन शेयर बाजार वह सबसे अच्छा तरीका है, जहाँ से बेहद आसानी से निरंतर निष्क्रिय आय अर्जित की जा सकती है। आज उपलब्ध तकनीक द्वारा व्यक्ति शेयर बाजार पर दुनिया के किसी भी हिस्से से आसानी से नजर रख सकता है, वह भी बस, एक स्मार्ट फोन के माध्यम से।
आज की दुनिया में आय का दूसरा स‍्रोत होना न केवल वांछनीय है, बल्कि आवश्यक है; फिर भी, ऐसा हमेशा संभव या आसान नहीं होता। ऐसी स्थिति में, शेयर बाजार एक शानदार विकल्प के तौर पर सामने आता है। शेयर बाजार से अपने लिए काम करवाइए और सिर्फ डर या परेशानी के चलते इसे नजरअंदाज न करें।
यह पुस्तक उनके लिए तो है ही, जो शेयर बाजार में नए हैं; उनके लिए भी है, जिन्हें कई वर्षों का अनुभव है।
ब्रूस ली ने ठीक ही कहा था, “अपना कप खाली करो, ताकि इसे पुनः भरा जा सके।” भूल जाने और पुनः सीखने के लिए तैयार रहें। अपने दिमाग से स्टॉक मार्केट से संबंधित अपने सारे ज्ञान को निकाल दें और इसे पुनः ऐसी जानकारी से भरें, जो सचमुच काम करती है।
शेयर बाजार से जुड़े लोगों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है—
• इंट्रा-डे ट्रेडर्स
• शॉर्ट-टर्म (लघु-आवधिक) ट्रेडर्स
• लॉन्ग-टर्म (दीर्घावधिक) निवेशक।
इंट्रा-डे ट्रेडर्स
इंट्रा-डे ट्रेडर्स वे हैं, जो किसी प्रतिभूति में पोजीशन को उसी ट्रेडिंग दिवस में ओपन (क्रय) और क्लोज (विक्रय) करते हैं। आमतौर पर इन ट्रेडर्स के पास पूँजी बहुत कम होती है या वे कर्ज लेकर ट्रेड कर रहे होते हैं। वे पूरे कारोबारी घंटों के दौरान ट्रेडिंग करते रहते हैं और वे जितना संभव हो, उतना अधिक क्रय-विक्रय ट्रेड करने का प्रयास करते हैं।
लॉन्ग-टर्म (दीर्घावधिक) निवेशक
वे निवेशक हैं, जो शेयरों को अपने पास एक वर्ष से अधिक समय तक रखने की मंशा से खरीदते हैं, वे उच्‍च गुणवत्तावाले शेयरों में निवेश करते हैं और वे अधिकांशतः खरीदते हैं और शायद ही कभी बेचते हैं। वे इसकी भाव-वृद्धि, लाभांश, बोनस और शेयर स्प्लिट द्वारा मुनाफा काटते हैं।
शॉर्ट-टर्म (लघु-आवधिक) ट्रेडर्स
शॉर्ट-टर्म (लघु-आवधिक) ट्रेडर्स किसी प्रतिभूति में पोजीशन का एक वर्ष के भीतर क्रय-विक्रय करते हैं। वे बेहद धैर्य के साथ ट्रेड में शामिल होते हैं और बेहद आक्रामकता सहित बाहर निकलते हैं। अधिकांश चतुर शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स बाजार में प्रवेश/निकास के लिए चार्टों पर निर्भर होते हैं और किसी विशेष सेक्टर के शेयरों को चुनने में खबरों पर भरोसा करते हैं।
थ्री-इन-वन खाता
शेयर ट्रेडिंग के लिए तीन भिन्न खातों की आवश्यकता होती है—
• बैंक खाता, जिसमें पैसा भेजा या मँगवाया जा सके।
• ट्रेडिंग खाता, जिससे आप क्रय/विक्रय ऑर्डर निष्पादित कर सकें।
• डीमैट खाता, जिसमें आप शेयरों को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में रख सकें।
कोई भी व्यक्ति बैंक में ‘थ्री-इन-वन खाता’ खोल सकता है।
‘थ्री-इन-वन खाता’ सुविधाजनक होता है और एकल समन्वित बचत, डीमैट एवं ट्रेडिंग खाते के रूप में काम करता है।
थ्री-इन-वन खाता क्यों खुलवाएँ?
• आपके बचत खाते से ट्रेडिंग खाते में फंड हस्तांतरण सिर्फ एक क्लिक में हो जाता है।
• फंड हस्तांतरण सुरक्षित होता है, क्योंकि पैसा केवल संपर्कित ट्रेडिंग और बचत खाते में ही हस्तांतरित किया जा सकता है।
• कई सारे लॉगिन विवरण याद रखने की आवश्यकता नहीं।
• ए.एस.बी.ए. (एप्लीकेशंस पोर्टेड बाय ब्लॉक अमाउंट) के माध्यम से आई.पी.ओ. आवेदन सुविधाजनक, समय बचानेवाला और कागजी कार्यों से बचानेवाला होता है। (अध्याय-4 में विस्तारपूर्वक वर्णित है।)
• लाभांश स्वतः ही संबंधित बैंक खाते में जमा हो जाता है।
ब्रोकर के रूप में किसी एकल फर्म की जगह बैंक को क्यों चुनें?
ब्रोकर के रूप में अपने बैंक को चुनने और एकल फर्मों से बचने के निम्न कारण हैं—
• किसी एकल फर्म के मुकाबले बैंक के पास धन पहले से उपलब्ध होता है और बाजार में बड़ी गिरावट के दौरान कायम रहा जा सकता है। एकल ब्रोकरेज फर्म के मुकाबले बैंक में आपका पैसा हमेशा सुरक्षित रहता है।
• एकल ब्रोकरेज फर्म विश्वसनीय नहीं होतीं, क्योंकि वे बहुत आसानी से आपके ट्रेडिंग खाते का पैसा लेकर काम बंद कर भाग सकती हैं।
• भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमानुसार, ट्रेडिंग खाते में शेष पूँजी को समय-समय पर बचत खाते में वापस भेजा जाता है। बाद की तारीखों में नए शेयर खरीदने के लिए ताजा पूँजी आवंटन की आवश्यकता होती है। यदि आपका ट्रेडिंग खाता और बैंक खाता दो विभिन्न स्थानों पर हों तो दोनों खातों में धन हस्तांतरण में अधिक समय लग जाता है।
थ्री-इन-वन अकाउंट खोलने के लिए
आपको क्या चाहिए होगा?
जो भी व्यक्ति थ्री-इन-वन अकाउंट खोलना चाहता है, उसे निम्नलिखित दस्तावेज जमा करवाने होंगे—
• पहचान प्रमाण—उदाहरण पैन कार्ड, पासपोर्ट आदि।
• निवास प्रमाण—उदाहरण ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड आदि।
• पासपोर्ट आकार की फोटो।
• आपके किसी भी निजी खाते का एक चेक।
• आधार कार्ड।
• पूर्णतः भरा हुआ व हस्ताक्षरित आवेदन-पत्र।
स्टॉक ब्रोकर का चुनाव कैसे करें?
अधिकांश ट्रेडर्स ऐसे ब्रोकरों को खोजते हैं, जो सबसे कम कमीशन चार्ज करते हों। ब्रोकरेज फीस एक महत्त्वपूर्ण मानक है, लेकिन सेवा की लागत पर नहीं। अपने लिए सही व्यक्ति को चुनने से पहले स्टॉक ब्रोकर की सेवा की लागत को प्राथमिकता दें; स्टॉक ब्रोकर की साख, पहुँच और सेवा गुणवत्ता का भी ध्यान रखें।
एक अच्छे स्टॉक ब्रोकर को निम्नलिखित सेवाएँ प्रदान करनी चाहिए—
• डेस्कटॉप और मोबाइल दोनों के लिए मजबूत ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म।
• ब्रोकर की वेबसाइट पर सभी रिपोर्ट्स डाउनलोड किए जाने योग्य फॉर्मेट (एक्सेल या पी.डी.एफ.) में प्रदान करना, जो आय कर भरने के लिए आवश्यक है।
• पारदर्शिता—सुनिश्चित करें कि स्टॉक ब्रोकर अपने ब्रोकरेज और अन्य प्रभार (जैसे—सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स, सर्विस टैक्स, डिपॉजिटरी प्रभार) को अपनी वेबसाइट पर दरशाएँ। सुनिश्चित करें कि इसमें कोई छिपी हुई लागत नहीं है।
• गुणवत्तापूर्ण ग्राहक सहायता—ट्रेडिंग से संबंधित प्रश्नों या खाता संबंधी प्रश्नों के लिए ऑनलाइन चैट, इ-मेल और फोन सहायता जरूरी है।
• ट्रेडिंग साधन—ऐसे ब्रोकर पर विचार करें, जो आफ्टर मार्केट ऑर्डर (ए.एम.ओ.), वैलिड टिल कैंसिल (वी.टी.सी.) एवं अन्य उपयोगी ट्रेडिंग साधन प्रदान करता हो। आगामी अध्यायों में हम इन विवरणों पर चर्चा करेंगे।
• ऐसा ब्रोकर खोजें, जो स्टॉक एक्सचेंज में बिना किसी बाधा के सबसे अधिक समय प्रदान करें।
इक्विटी निवेश के लाभ
शेयरधारक को होनेवाले लाभ को दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है—
• मौद्रिक लाभ
• गैर-मौद्रिक लाभ।
मौद्रिक लाभ
शेयरधारक को निम्न मौद्रिक लाभ हो सकते हैं—
• लाभांश—कंपनियाँ लाभांश के माध्यम से शेयरधारकों के साथ आंशिक या पूर्ण रूप से लाभ का बँटवारा करती हैं।
• पूँजीगत मूल्य-वृद्धि—पूँजीगत मूल्य-वृद्धि से शेयरधारकों का लाभ। जब कंपनी अच्छा प्रदर्शन करती है तो उसके शेयरों के भावों में स्वतः वृद्धि हो जाती है।
गैर-मौद्रिक लाभ
शेयरधारक को निम्न गैर-मौद्रिक लाभ मिलते हैं—
• बोनस—कंपनियाँ एकत्रित मुनाफे के वितरण के स्थान पर निःशुल्क बोनस शेयर जारी करती हैं।
• राइट इश्यू—एक राइट इश्यू मौजूदा शेयरधारकों के लिए कंपनी के नए अतिरिक्त शेयर खरीदने का आमंत्रण है।
इक्विटी निवेश से जुड़े जोखिम
हालाँकि इक्विटी निवेश लाभप्रद होता है, किंतु फिर भी, व्यक्ति को इससे जुड़े जोखिमों की जानकारी भी होनी चाहिए।
राजनीतिक जोखिम
यह संभावना हर समय बनी रहती है कि देश की सरकार अचानक ही अपनी नीतियाँ परिवर्तित कर दे। इसके अलावा, युद्ध और प्रतिकूल आर्थिक नीतियाँ जैसी घटनाएँ भी वित्त बाजार को प्रतिकूल प्रभावित कर सकती है।
आर्थिक जोखिम
पूरी अर्थव्यवस्था में मंदी का जोखिम रहता है। ऐसी घटनाओं का शेयर बाजार पर प्रायः नकारात्मक प्रभाव होता है।
औद्योगिक जोखिम
किसी उद्योग विशेष को मंदी का सामना करना पड़ सकता है, जो बदले में उन उद्योगों के शेयरों को प्रभावित करेगा।
तरलता जोखिम
अपने शेयरों को उचित भाव पर न बेच पाने का जोखिम। कई बार निवेशक बाजार में क्रेताओं की कमी या प्रभावहीन बाजार के कारण बिना मूल पूँजी और/या मुनाफा गँवाए अपनी इक्विटी को नकदी में परिवर्तित नहीं कर पाता।
मुद्रास्फीति जोखिम
मुद्रास्फीति समय के साथ धन की क्रय शक्ति को नुकसान पहुँचाती है, उतनी ही धनराशि में आप कम सामान व सेवाएँ खरीद पाते हैं। शेयरों के भाव में भी मुद्रास्फीति के अनुसार वृद्धि होती है।
सीमा जोखिम
कई बार आपकी निवेश सीमा किसी अप्रत्याशित घटना, जैसे किसी परिजन के अस्पताल में दाखिल होने से उत्पन्न आकस्मिक खर्च के कारण घट जाती है। तब आपको मजबूरी में, मंदे बाजार में, उन शेयरों को बेचना पड़ जाता है, जिन्हें आप लंबी अवधि तक अपने पास रखने की उम्मीद कर रहे थे।
आपके लिए कितना जोखिम लेना सही होगा?
जब आप किसी बैंक की फिक्स डिपॉजिट या पोस्ट ऑफिस योजना में निवेश करते हैं तो आप ऋणदाता होते हैं, जिसका अर्थ कम जोखिम होना है। वहीं, जब आप इक्विटी, रियल एस्टेट या सोने में निवेश करते हैं, तब आप स्वामी होते हैं और किसी चीज का स्वामी होने में हमेशा अधिक जोखिम होता है। अतः इन दोनों के बीच संतुलन होना चाहिए।
व्यक्ति का जोखिम सहजता स्तर निम्नलिखित पहलुओं पर निर्भर करता है—
निवेश उद्देश्य—व्यक्ति का निवेश के पीछे अपना उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए। कुछ के लिए यह संपत्ति-निर्माण हो सकता है तो संभवतः कुछ के लिए आय का दूसरा स‍्रोत।
निवेश सीमा—आप मुनाफा काटने के लिए कितने समय तक प्रतीक्षा कर सकते हैं? आप जितने अधिक समय तक निवेशित रहेंगे, अच्छी रिटर्न मिलने के आपके अवसर उतने ही बढ़ते जाएँगे।
उम्र—संपत्ति-निर्माण के लिए समय और मूल पूँजी की आवश्यकता होती है। जोखिम लेने की मानसिकता आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ ही कम होती जाती है; इसलिए अच्छा यही रहेगा कि आप कम उम्र में ही निवेश करना आरंभ कर दें।
पारिवारिक स्थिति—आप पर निर्भर लोगों की संख्या के आधार पर आपका जोखिम लेना सीमित व सचेत होना चाहिए। जोखिम लेने की मानसिकता हमेशा आप पर निर्भर व्यक्तियों की संख्या से कम होनी चाहिए।
आय व संपत्ति—जिस व्यक्ति के पास धन अधिक हो और ठोस मासिक आय हो, वह अधिक जोखिम ले सकता है।
इक्विटी निवेश की लागत
शेयर खरीदने पर आपको निम्नलिखित प्रभार देने होते हैं—
• ब्रोकरेज—यह वह शुल्क है, जो स्टॉक ब्रोकर अपनी दी गई सेवा के बदले लेता है। हर ब्रोकर का अपना ब्रोकरेज मॉडल होता है।
• सर्विस टैक्स—प्रत्येक सौदे में ब्रोकरेज पर एक समान सर्विस टैक्स लिया जाता है।
• सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स—यह किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से हुए प्रतिभूति हस्तांतरण के मूल्य पर देय कर से संदर्भित है। इसमें इंट्रा-डे, डिलीवरी, फ्यूचर्स और ऑप्शन की दरें भिन्न हैं।
• टर्नओवर टैक्स।
• स्टांप शुल्क—प्रतिभूति हस्तांतरण पर लिया जानेवाला स्टांप शुल्क राज्य सरकारों द्वारा दस्तावेजीकरण पर लगाया गया कर है। हर राज्य का स्टांप शुल्क अलग होता है।
शेयर बेचने पर आपको निम्न कर अदा करने होते हैं—
• उपर्युक्त सभी कर, जो आपने शेयर को खरीदते समय दिए थे।
• डीमैट ट्रांजेक्शन प्रभार।
• मुनाफा होने पर पूँजीगत अधिलाभ कर (कैपिटल गेन टैक्स)।
अपने कांट्रैक्ट नोट को जानें
कांट्रैक्ट नोट शेयर बाजार में किए किसी भी सौदे का कानूनी रिकॉर्ड होता है। यह किसी खास समय पर, ग्राहक की ओर से, सौदे की पुष्टि के रूप में कार्य करता है। आजकल स्टॉक ब्रोकर इस दस्तावेज को अपने ग्राहक के रजिस्टर्ड इ-मेल पर डिजिटली हस्ताक्षरित इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में अपने आप भेज देता है।
कांट्रैक्ट नोट में निम्न विवरण शामिल होता है—
1.स्टॉक ब्रोकर की सेबी (SEBI) रजिस्ट्रेशन संख्या।
2.सेटलमेंट संख्या और कांट्रैक्ट नोट संख्या।
3.ग्राहक का संपर्क विवरण एवं स्थायी खाता संख्या (PAN)।
4.ग्राहक का कोड।
5.ऑर्डर संख्या व समय।
6.ट्रेड संख्या और समय।
7.सौदा की गई प्रतिभूति का नाम और चिह्न‍।
8.इंटरनेशनल सिक्योरिटीज आइडेंटिफिकेशन नंबर (आई.एस.आई.एन.)।
9.यह क्रय या विक्रय में से कौन सी क्रिया है।
10.सौदे की मात्रा।
11.ट्रेड भाव।
12.ब्रोकरेज राशि।
13.सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एस.टी.टी.) और ब्रोकरेज पर सेवा कर
14.इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में डिजिटल हस्ताक्षर।
कांट्रैक्ट नोट का उद्देश्य
कांट्रैक्ट नोट दरशाता है—
• ब्रोकरेज प्रभार का विवरण।
• वह जानकारी, जिसे आप आय कर भरते समय लाभ/हानि की गणना में उपयोग करते हैं।
• किसी भी तरह का विवाद होने पर कानूनी सबूत के तौर पर उपयोग हो सकता है।
स्टॉक मार्केट में निवेश सभी के लिए आवश्यक क्यों है?
• किसी कंपनी के शेयर खरीदने पर आप वास्तव में व्यापार के स्वामी न होने पर भी उस कंपनी में भागीदार बन जाते हैं।
• कोई भी व्यक्ति, जिसके पास डीमैट, ट्रेडिंग और बचत खाता हो, वह शेयर बाजार में कितनी भी धनराशि निवेश कर सकता है।
• किसी भी कंपनी से प्राप्त—वार्षिक 10,00,000 रुपए तक का लाभांश कर-मुक्त होता है।
• आप मात्र एक स्मार्टफोन या लैपटॉप के उपयोग द्वारा आसानी से अपने स्टॉक पोर्टफोलियो की निगरानी दुनिया के किसी भी हिस्से से कर सकते हैं।
शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव अधिकांश लोगों को बेचैन कर देता है; लेकिन कुछ साधारण नियम इस यात्रा को अधिक आरामदेह बना देते हैं। इन साधारण नियमों पर हम आगामी अध्यायों में चर्चा करेंगे।

2
बुद्धिमान निवेशकों के लिए सीक्रेट्स
किसी कंपनी के शेयरों में निवेश करना उस कंपनी का कुछ भाग खरीदने के जैसा है। आगे बढ़ने से पहले व्यक्ति को जानना चाहिए कि कंपनियाँ दो प्रकार की होती हैं—
1. चक्रीय कंपनियाँ
2. गैर-चक्रीय कंपनियाँ।
चक्रीय कंपनियाँ
चक्रीय कंपनियों के शेयरों के भाव वित्तीय हालात के सीधे तुलनात्मक या संबंधित होते हैं। इन कंपनियों की बिक्री तब बढ़ जाती है, जब लोगों के पास विलासिता पर खर्च करने के लिए अधिक आय हो और अर्थव्यवस्था में गिरावट के साथ ही ये भी घटने लगते हैं। ये कंपनियाँ ऐसी वस्तुएँ उत्पादित करती हैं कि हाथ तंग हो तो हम इनके बिना भी जी सकते हैं।
उदाहरण के लिए, एक आम आदमी को लग्जरी कार खरीदने के लिए वित्तीय योजना बनानी होती है; जबकि वह अपने दैनिक उपयोग के उत्पादों को खरीदने के लिए कभी वित्तीय योजना नहीं बनाता। अर्थव्यवस्था ठीक न होने पर सभी लोग विलासितापूर्ण उत्पादों को खरीदना विलंबित कर देते हैं। विमान यात्रा, छुट्ट‍ियाँ बिताना और शानदार भोजन चक्रीय उद्योग का अच्छा उदाहरण हैं।
गैर-चक्रीय कंपनियाँ
आर्थिक हालात गैर-चक्रीय कंपनियों के शेयरों के भावों को प्रभावित नहीं करते, क्योंकि ये आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं से संबंधित होती हैं। इनकी बिक्री अटल परिवर्तनहीन होती है और आर्थिक हालात जैसे भी हों, ये मुनाफा कमा ही लेती हैं।

निष्कर्षत : जब निवेश की बात हो तो चक्रीय कंपनियों से बचें।
उछाल के तीन चरण
हर अच्छे शेयर को इन तीन चरणों से गुजरना पड़ता है—
• स्थापना चरण
• मुख्य चरण
• परिपक्व चरण।
स्थापना चरण
इस चरण में निवेश के लिए अच्छे शेयर को पहचानना बहुत कठिन होता है, क्योंकि—
• शेयर किसी बीते दो या तीन वर्षों से उपेक्षित सेक्टर या सब-सेक्टर से होता है।
• विश्लेषक इसके लिए शून्य या न्यूनतम क्रय की अनुशंसा करते हैं।
• पी.ई. अनुपात ऐतिहासिक रूप से न्यूनतम होता है।
• कंपनी के प्रमोटर इसे खरीद सकते हैं या मौजूदा क्षमता को धीरे-धीरे विस्तारित कर सकते हैं।
मुख्य चरण
यह निवेश करने का आदर्श चरण है। इस चरण में शेयर धीरे-धीरे मीडिया में दिखाई देना शुरू हो जाता है। इस चरण में निवेश के लिए अच्छा शेयर पहचानने की संभावना अधिक होती है, क्योंकि—
• इसकी कहानी होती है।
• व्यक्ति दैनिक खबरों पर निकट से नजर रखकर इनके बारे में जानकारी ले सकते हैं।
• इसका सबसे मुख्य सूचक यह हो सकता है कि शेयर गिरते हुए बाजार में भी बढ़ रहा हो।
परिपक्व चरण
निवेश के लिए शेयरों की पहचान करना इस चरण में और भी आसान हो जाता है; लेकिन व्यक्ति को इस बात की दोहरी जाँच कर लेनी चाहिए कि इसके भाव बढ़ने के कितने अवसर हैं!
• बड़े पैमाने पर मीडिया कवरेज और विश्लेषक इस शेयर को खरीदने की अनुशंसा करते हैं।
• शेयर को चुनने के पूर्व सबसे पहले यह जानें कि इसकी कहानी लघु-आवधिक है या दीर्घावधिक!
• यदि शेयर चक्रीय कंपनी का है तो बेहतर यही है कि इसमें इस चरण में निवेश न किया जाए। गैर-चक्रीय कंपनी के लिए इसमें अधिक रिटर्न पाने की आशा की जा सकती है।
पोर्टफोलियो विविधता
एक उचित विविधतापूर्ण पोर्टफोलियो में शेयरों की संख्या सीमित, लेकिन विभिन्न सेक्टरों में होनी चाहिए। विभिन्न सेक्टरों में निवेश द्वारा व्यक्ति संपूर्ण निवेश जोखिम को कम कर सकता है; साथ ही, किसी एक शेयर या सेक्टर के खराब प्रदर्शन से पोर्टफोलियो का प्रदर्शन प्रभावित नहीं होगा।
याद रखिए, किसी एक सेक्टर का लंबे समय तक प्रभुत्व नहीं रह सकता; इसलिए, कोई भी स्थायी रूप से लाभ या हानि प्रदान करनेवाला नहीं होता। पिछले साल में सबसे अच्छा प्रदर्शन करनेवाला सेक्टर आनेवाले साल का सबसे खराब प्रदर्शन करनेवाला सेक्टर हो सकता है।

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