Share This Book

शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets PDF Download Free (Stock Market Investing Books Hindi) by Soma Valliappan

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

नाम / Nameशेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets
लेखक / Author
आकार / Size3.3 MB
कुल पृष्ठ / Pages273
Last UpdatedMarch 13, 2022
भाषा / Language Hindi
श्रेणी / Category,

पिछले तेजी के दौर में जब सेंसेक्स 3, 000 के निचले स्तर से चढ़कर 6, 000 और 7, 000 से होता हुआ 21, 000 तक पहुँचा था, सबको यही लगा कि यह शेयरों के अधि-मूल्यांकन को प्रतिबिंबित करता है और बाजार का गिरना तय है। यह तीन साल तक लगातार जारी रहा। जिन लोगों ने वर्ष 2013-14 के दौरान बाजार में प्रवेश किया है, वे एक मायने में भाग्यवान् हैं। वे इस दौड़ में तब शामिल हुए, जब भाव चढ़ने आरंभ ही हुए हैं। इस अवधि में सेंसेक्स बिना सुधार के और लगभग निर्बाध रूप से 21, 000 से 27, 000 तक पहुँच गया। लंबे समय बाद बुद्धिमत्तापूर्ण सुधार के पश्चात् मार्च 2014 के बाद बाजार चढ़ना आरंभ हो गया और जाहिर है कि यह कई सालों तक जारी रहनेवाला है। ऐसे दुर्लभ काल में लोगों को अपनी पुरानी बुरी स्मृतियों से बाहर आना होगा और इस बात पर विश्वास जमाना होगा कि नया चक्र आरंभ हो चुका है और आनेवाले समय में अच्छे दिन जारी रहेंगे। प्रस्तुत पुस्तक में लेखक ने हर तरह के आकार व उद्देश्यवाले निवेशकों को ध्यान में रखते हुए भारतीय शेयर बाजार की कार्यशैली का सरल व संक्षिप्त रूप में समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। विभिन्न उदाहरणों में नवीनतम आँकड़े शामिल करने से पाठकों को शेयरों में निवेश संबंधी विभिन्न बुनियादी अवधारणाओं को समझने में मदद मिलेगी। उम्मीद है कि यह पुस्तक सभी पाठकों के लिए एक गाइड बनकर दिशा-निर्देश देगी, जिससे वे अपनी दीर्घावधिक वित्तीय सुरक्षा के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।

पुस्तक का कुछ अंश

जीवित रहने के लिए पैसे कमाना आवश्यक है और ऐसा करने के लिए लोग नौकरी करते हैं या व्यापार आरंभ करते हैं। लेकिन अपनी भौतिक इच्छाओं की पूर्ति हेतु व्यक्ति को खाली बैठने की जगह पैसे कमाना चाहिए। पैसा कमाना मूल मंत्र है, और अब इस कार्य में सफल होना केवल भाग्य की बात नहीं रह गई है। इसके लिए निवेश के विभिन्न उपकरणों की सही समझ, वे किस तरह बढ़ते व घटते हैं, उन्हें कब खरीदना व बेचना/निवेश करना है और कब बाहर निकल जाना है, यह जानना बेहद महत्त्वपूर्ण है।
इस संदर्भ में, शेयर बाजार की धन सृजन में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। जैसा कहा जाता है, अच्छे शेयर की पहचान कैसे की जाए, कब खरीदें और कब बेचें, इसकी उचित समझ होना ट्रेडिंग में सफल होने के लिए आवश्यक है। लेकिन गुरु न हो तो ये अंधे कुएँ के जैसे हैं। असफलताओं की अत्यधिक कहानियों के चलते नव प्रवेशकों के लिए यह भयभीत करनेवाला हो सकता है। लेकिन सफल निवेशक किसी और ही मिट्टी के बने प्रतीत होते हैं। वे ऐसे जोखिम लेते हैं, जो किसी आम आदमी के वश की बात नहीं है।
सोमा वल्लियप्पन लिखित ‘शेयर बाजार Secrets’ इस मिथक को तोड़ती है। आम धारणा के विपरीत, शेयर बाजार में निवेश करना जुआ खेलने जैसा नहीं है। यह कुछ बुनियादी सिद्धांतों पर काम करती है और नीति-नियमों से नियंत्रित होती है, वैसे ही जैसे निवेश की कोई भी अन्य वैध प्रणाली होती है। व्यक्ति में निवेश के लिए अच्छी कंपनियों और उचित भाव को पहचानने तथा थोड़ा सावधान रहने की आवश्यकता है।
इस पुस्तक में श्री सोमा वल्लियप्पन ने अपने 30 वर्षों के अनुभव का उपयोग कर नौसिखियों के लिए शेयर बाजार का रहस्य खोलते हुए भिन्न कारोबारियों द्वारा शेयर बाजार में निवेश हेतु उपयोग की जानेवाली विभिन्न प्रणालियों का खुलासा किया है। निवेश के दौरान ‘जोखिम लेनेवाले’ एवं जोखिम के अनिच्छुक विभिन्न व्यक्तित्ववालों के लिए उनके सुविधा स्तर को देखते हुए भलीभाँति समझाया है कि ट्रेड हो रहे शेयरों में क्या देखें, इनमें किस तरह निवेश करें और यह दीर्घावधिक निवेश हो या लघु-आवधिक। इससे संबंधित चित्र, ग्राफ और सूचियों से बात को स्पष्ट रूप से समझने में मदद मिलती है। इस प्रक्रिया में, वे निवेश की इन उपकरणों की कार्य-प्रणाली तथा उनसे प्राप्त होनेवाले अपेक्षित लाभ की रूपरेखा भी बयान करते हैं।
‘बुल्स एंड बीयर्स ऑल अबाउट शेयर्स’ सबसे पहले तमिल में (‘अला-अला पनम’ नाम से) प्रकाशित हुई थी और इसके साथ ही यह उन लोगों के लिए हैंडबुक बन गई, जो शेयर बाजार के अनिश्चित संसार में डुबकी लगाने से पहले अभी सोच-विचार ही कर रहे थे। इसके अंग्रेजी संस्करण (हिंदी अनुवाद) के प्रकाशन का उद्देश्य देश भर में बड़ी आबादी तक पहुँच बनाना है, जिससे वे भी सोमा वल्लियप्पन के अनुभव और पूर्ण ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

1

निवेश
सन् 2004 में मैं चेन्नई में एक फ्लैट खरीदने की योजना बना रहा था। इस प्रक्रिया में मुझे जमीन के दस्तावेज देखने का अवसर मिला। यह दक्षिण चेन्नई के एक अच्छे इलाके अबिरामपुरम स्थित एक फ्लैट का मूल भूमि दस्तावेज था।
किसी ने 3,000 वर्ग फीट की इस जमीन (प्लॉट) को 10,000 रुपए में बेचा था। यह सौदा सन् 1958 में हुआ था। दस साल बाद, यानी सन् 1968 में इसी प्लॉट को 60,000 रुपए की कीमत पर बेचा गया। सन् 2004 में, छत्तीस साल बाद, उसी जमीन के लिए एक बिल्डर 35 लाख रुपए देने को तैयार था। इसी दौरान मुझे यह दस्तावेज देखने का अवसर मिला।
अभी रुकिए, कहानी यहीं समाप्त नहीं हो रही।
अपने होश कायम रखिए। मई 2012 में 3,000 वर्ग फीट की उस अविभाजित भूमि की कीमत थी 500 लाख रुपए! जिस समय आप इसे पढ़ रहे हैं, उसकी कीमत में और अधिक इजाफा हो गया होगा।
यह है जमीन में निवेश की शक्ति। सन् 1958 में जमीन में निवेश किए 10,000 रुपयों में 54 वर्षों के भीतर लगभग पाँच हजार गुना की वृद्धि हो गई।
अब शायद आप मेरी बात समझ गए होंगे। ये 10,000 रुपए अपनी लोहे की अलमारी या बैंक के सुरक्षा लॉकर में रखे होते तो क्या होता? निश्चित ही यह मुद्रा काफी अलग दिखने लगती, जिससे लोगों के मन में संदेह पनपता कि वे नोट असली हैं या नकली!
इसके अतिरिक्त, उनके मूल्य में कोई वृद्धि नहीं होती, बल्कि उनका मूल्य घट जाना और अधिक अपमान की बात होती, जो मुद्रास्फीति के कारण होता।
इसके विपरीत, जमीन में निवेश किया गया धन 5,000 गुना बढ़ गया। वाह! निश्चित ही 5,000 गुना की बढ़त जमीन में निवेश करनेवाले सभी लोगों के साथ और हमेशा संभव न हो, लेकिन कुछ स्थानों पर ऐसा हुआ है; बल्कि संभवतः मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में तो खूब हुआ है।
कुछ लोगों को अपनी बचत स्वर्ण के रूप में रखने की आदत होती है। चलिए, देखते हैं कि यदि कोई सन् 1958 में यही 10,000 रुपए स्वर्ण में निवेश करता तो क्या होता।
तब स्वर्ण की कीमत 12.50 रुपए प्रति ग्राम थी (वाकई!) उन 10,000 रुपयों में व्यक्ति 800 ग्राम सोना खरीद सकता था। जुलाई 2012 में सोने की कीमत 2,800 रुपए प्रति ग्राम थी। (संयोगवश मई 2014 की शुरुआत में भी सोने की कीमत यही थी) इसकी कुल कीमत 22,40,000 होती। दूसरे शब्दों में, सोने में किया गया निवेश 54 सालों में 224 गुना बढ़ गया।
यदि इतनी ही धनराशि बैंक एफ.डी. (सावधि जमा) में निवेशित की जाती तो यह बढ़कर 40,28,000 रुपए, यानी 54 सालों में 400 गुना हो जाती (12% की अनुमानित औसत दर पर)।
इस बिंदु पर हम शेयरों में उपस्थित अवसरों की गणना या तुलना नहीं कर रहे। यह हम पुस्तक में आगे चलकर करेंगे।
इन 10,000 रुपयों को इनमें से किसी में भी निवेश किया जा सकता है। लेकिन अगर कोई इन्हें अपने लॉकर या दराज में निष्क्रिय पड़ा रहने दे या इसी तरह बैंक के जमा खाते में पड़ा रहने दे (जहाँ इस पर सालाना 4 से 6% की आय हो) तो क्या इसे अपराध नहीं माना जाना चाहिए (क्योंकि यह आपका व परिवार का खोया अवसर होगा)?
धन को जमीन या सोने या सावधि जमा (एफ.डी.) या म्यूचुअल फंड या शेयरों में निवेश करना चाहिए। इसे कभी भी मुक्त या निष्क्रिय पड़े रहने नहीं देना चाहिए। जिस तरह कोई चतुर नियोक्ता अपने कर्मचारियों को हमेशा व्यस्त रखकर उनसे बेहतरीन काम लेता है, हमारे धन को भी अपने मालिक की (मैं व आप, और कौन!) इसी तरह सेवा करनी चाहिए।
सभी निवेश एक जैसे नहीं होते। जैसा कि पहले अध्याय में चर्चा हुई थी, भिन्न निवेशों में विभिन्न अवसर मौजूद रहते हैं। तब कुछ उच्‍च रिटर्नवाले विख्यात निवेश होने पर भी लोग अन्य प्रकार के निवेश क्यों करते हैं?
इसका जवाब बहुत आसान है। विभिन्न लोगों की निवेश आवश्यकताएँ भी भिन्न होती हैं। जहाँ लोग अच्छा लाभ कमाने के लिए निवेश करते हैं, वहीं उनकी अन्य जरूरतें भी होती हैं। कई बार उनके निवेश संबंधी निर्णय पूरी तरह से इन्हीं पर निर्भर होते हैं।

1. सबसे पहले सुरक्षा
निवेश का कारण धन का मूल्य वर्धित करना है। धन का विकास या प्रोत्साहन निवेश का प्रमुख उद्देश्य है। लेकिन किस कीमत पर? बहुत से लोग अधिक पैसे कमाने के प्रयास में अपने श्रमपूर्वक कमाए धन को खतरे में डाल देते हैं।
अजीब बात है! कुछ निवेश ऐसे भी होते हैं, जो मूल पूँजी को ही हड़प जाते हैं। क्या लोग ऐसे रास्तों पर भी चलते हैं? हाँ, ऐसे भी लोग हैं, जो अधिक लाभ कमाने के लिए स्वयं इन कार्यों का चयन करते हैं। हमारे देश में हाल ही में ऐसे बहुत से ‘अवसर’ सामने आते रहे हैं और सावधान रहें कि ऐसे ही और भी बहुत से कार्य फिलहाल भी जारी हैं (जिन्हें मीडिया प्रकाश में लाता है)।
1990 के दशक की शुरुआत में कुछ कंपनियाँ (प्रायः बेनिफिट फंड ) प्रति वर्ष 36% से 48% तक ब्याज के साथ ही मुफ्त चाँदी या सोने के सिक्के देने या किसी योजना में जोड़ लेने का प्रस्ताव दिया करती थीं! किसी-न-किसी कारणवश वे कंपनियाँ असफल हो जाती थीं। यह असफलता केवल 36% का शानदार ब्याज ही नहीं, बल्कि निवेश की गई रकम चुकाने में भी होती थी!
कई मामलों में अंततः लाभ के रूप में बस, वह सोने का 1 या 2 ग्राम का सिक्का ही रह जाता। अपने वादों को पूरा करने में अक्षम वे कंपनियाँ अपनी दुकान बंद करके भाग निकलतीं।
हजारों सेवानिवृत्त लोग अपने जीवन भर की श्रमपूर्वक कमाई खो चुके हैं। ये निवेश न केवल ब्याज दिलाने में नाकाम रहते हैं, बल्कि गायब होने के साथ ही मूल रकम चुकाने में भी असमर्थ रहते हैं।
ये रोमांचकारी ‘निवेश’ खुद मूल रकम के ही डूब जाने जैसे खतरों से परिपूर्ण होते हैं! इसी तरह कुछ निवेशकों को बिना समुचित सुरक्षा के धन कर्ज देना भी अत्यधिक जोखिमपूर्ण होता है, जिससे विनाशकारी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
कहानी की सीख यह है कि किसी भी तरह के निवेश का बुनियादी मापदंड सुरक्षा होना चाहिए।
आज सरकारी बॉण्ड (राष्ट्रीय बचत प्रमाण-पत्र, किसान विकास पत्र, डाकघर जमा) के संभवतः सबसे सुरक्षित निवेश हैं, क्योंकि इनके लिए सरकार गारंटी देती है और वह भी केंद्र सरकार! बैंक सावधि जमा (एफ.डी.) भी कुछ हद तक सुरक्षित है, क्योंकि यह जमा बीमा निगम द्वारा प्रति जमाकर्ता 1 लाख रुपए तक बीमित होता है। अगर बैंक फेल हो जाता है तो यह राशि जमाकर्ता को मिल जाएगी, जैसा ग्लोबल ट्रस्ट बैंक के साथ हुआ। किसी भी तरह की आपदा आने पर 1,00,000 रुपए तक की जमा राशि सुरक्षित रहेगी। इसके बाद...कुछ नहीं और यही कारण है कि व्यक्ति को अपने निवेश को कई बैंकों की एफ.डी. में वितरित रखना चाहिए।

2. तरलता
निवेश में दूसरी ध्यान रखने योग्य बात जरूरत पड़ने पर निवेश को भुनाने की संभावना होती है।
लोग जमीन में निवेश करने से क्यों बचते हैं? क्योंकि भारत में (अभी तक) जमीन या रियल एस्टेट के लिए विनियमित बाजार नहीं है। इसके अतिरिक्त, जमीन/प्लॉट को सोने की तरह बेचा या बैंक सावधि जमा जैसी सरलता व शीघ्रता सहित भुनाया नहीं जा सकता।
इन्हें बेचते समय उचित कीमत (न कि मनचाही कीमत) के लिए व्यक्ति को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। कई बार तो इसमें वर्षों लग जाते हैं। जमीन को तुरंत बेचना तुलनात्मक रूप से कठिन है।
यही कारण है कि जमीन को गैर-तरल संपत्ति कहा जाता है। इसमें अधिक तरलता नहीं होती। व्यक्ति इसे अपनी इच्छानुसार शीघ्रता से नहीं बेच सकता। यदि अत्यधिक प्रयास किए जाएँ तो निश्चित ही इसे बेचा सकता है, लेकिन बाजार कीमत से कम दामों पर। इसका परिणाम—जल्दबाजी में बिक्री, घाटे का सौदा।
रियल एस्टेट का कारोबार, यानी आवासीय प्लॉट या फ्लैट को खरीदना व बेचना कुछ वक्त के लिए तो विकल्प हो सकता है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं। चेन्नई की ईस्ट कोस्ट रोड (ओल्ड महाबलीपुरम रोड, जिसे गोल्ड महाबलीपुरम रोड भी कहा जाता है) पर जमीन की कीमतें आसमान छू रही थीं। वे सुनामी के बाद कौड़ियों के मोल रह गईं। (हालाँकि आपदा के तुरंत बाद मुश्किल से मिलनेवाले खरीदारों की भारी गिरावट के बाद अब यह फिर सँभल गई है।)
3. प्रतिफल
निस्संदेह, तीसरी और सबसे अंतिम ध्यान देने योग्य बात होने पर भी यह धन निवेश के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है। इससे पहले हमने जमीन, सोना और सावधि जमा जैसे वित्तीय निवेश के कई प्रतिफल रूप देखे।
“मुझे और अधिक कहाँ मिल सकता है?” “किस निवेश विकल्प से मुझे सबसे अधिक रिटर्न प्राप्त हो सकता है?”
अपनी जरूरतों के चलते लोग अपने धन को अति जोखिमपूर्ण निवेश में डालकर समस्याओं को आमंत्रित कर लेते हैं।
प्राथमिकताएँ बदलती हैं
आमतौर पर इस क्रम में सुरक्षा, तरलता और प्रतिफल—तीन सबसे महत्त्वपूर्ण ध्यान रखने योग्य चीजें हैं।
यह क्रम मात्र एक सामान्य दिशा-निर्देश है। जी हाँ, ‘सबसे पहले सुरक्षा, उसके बाद तरलता और तीसरा प्रतिफल’ का यह क्रम इन पहलुओं के आधार पर परिवर्तित भी हो सकता है।
• उम्र
• संपत्ति आधारित
• पारिवारिक जिम्मेदारियाँ
• मौजूदा आय
•जोखिम लेने की क्षमता।
उम्र
एक सेवानिवृत्त व्यक्ति और हाल ही में नौकरी पानेवाला युवा काफी अलग होते हैं। अधिकांश सेवानिवृत्त व्यक्तियों की आय का साधन उनकी पेंशन या बैंक का ब्याज होता है। दुर्लभ मामलों में यह किराए से होनेवाली आमदनी हो सकती है। यह न केवल वास्तविक आय से कम होती है, बल्कि समय के साथ ही इसका मूल्य निरंतर घटता जाता है। वे लोग अपनी आय में इजाफा नहीं कर सकते या संभवतः नई नौकरी नहीं कर सकते या उम्र के चलते अधिक प्रयास नहीं कर सकते। अतः उनके लिए उन्होंने जो कुछ भी कमाया या बचाया है, वह बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसलिए उनके लिए सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
वहीं दूसरी ओर, एक युवा अविवाहित व्यक्ति दौड़-भाग कर सकता है, अच्छी संभावनाओं के लिए नौकरी बदल सकता है और स्थान-परिवर्तन भी कर सकता है। समय के साथ ही उसकी आय में भी बढ़ोतरी होगी। अपना कौशल व अनुभव बढ़ने के साथ ही उसकी तरक्की होना तय है। उसे अपनी बचत की सुरक्षा की अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं होती और वह अपना धन कम प्रतिफल निवेशों में रख सकता है। साथ ही, अविवाहित होने के कारण उसे कम समय के भीतर बड़ी रकम की आवश्यकता संभवतः न पड़े। वह अपना धन जमीन में निवेश कर उसके बढ़ने की प्रतीक्षा कर सकता है। ऐसे लोगों के लिए प्राथमिकता चक्र ‘प्रतिफल, सुरक्षा और तरलता’ होगा।
वहीं एक मध्य आयु के व्यक्ति के लिए, जो लगभग दस सालों से काम कर रहा हो, जिसकी पत्नी घरेलू हो, बच्‍चे स्कूल जाते हों, उसकी जरूरतें इन पहलुओं पर निर्भर होंगी—अधिक प्रतिफल व कम स्तर का जोखिम। उसे अपने धन का कुछ हिस्सा सबसे पहले सुरक्षा की दृष्टि से निवेश करना चाहिए।
संपत्ति आधारित
निवेश उद्देश्य केवल व्यक्ति की उम्र पर ही नहीं, बल्कि उसे प्राप्त वित्त पर भी निर्भर करता है।
हो सकता है कि व्यक्ति का परिवार समृद्ध हो, संपत्तिवान् हो या उनका व्यापार बढ़िया चल रहा हो। ऐसे लोगों को विरासत में माता-पिता से कुछ संपत्ति अवश्य मिलती है। उनकी स्थिति उन लोगों से काफी अलग है, जिनके माता-पिता बस, काम चलाने भर का कमा पाते हैं या कर्ज में डूबे हैं। कुछ लोग उच्‍च शिक्षा के लिए बैंकों से कर्ज लेते हैं। इस अवस्था में उनके वेतन के चेक का स्वागत उनकी प्रतीक्षारत कर्ज-अदायगी करती है। ऐसे लोग युवा होने के बावजूद जोखिम नहीं ले सकते।
पारिवारिक जिम्मेदारियाँ
वृद्ध माता-पिता, बीमार माता-पिता, व्यक्ति पर निर्भर भाई-बहन भी कुछ ऐसे मसले हैं, जिनके बारे में युवाओं को विचार करना होता है। ऐसे में, सबकुछ उन्हीं की कमाई पर निर्भर होता है। वे अधिक धन कमाने के लिए जोखिम नहीं ले सकते। यहाँ एक बार फिर सबसे पहले सुरक्षा ही उद्देश्य होगी।
जोखिम लेने की क्षमता
कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो युवा हैं, वित्तीय रूप से भी सक्षम हैं; लेकिन इसके बावजूद ‘अधिक जोखिमपूर्ण, अधिक प्रतिफल’ में निवेश नहीं करते। इसका कारण उनका दृष्टिकोण है। कुछ लोग चीजों को सहजता से नहीं ले पाते। वे छोटे या अस्थायी नुकसान पर भी चिंतित हो जाते हैं। वे नुकसान व गलत फैसलों को लेकर अकसर परेशान रहते हैं। जोखिम लेने की दृष्टि से लोग बेहद अलग किस्म के होते हैं। कुछ लोग जोखिम झेल सकते हैं, जबकि बाकी नहीं झेल पाते।
जोखिम लाभ अनुपात
प्रत्येक निवेश में अलग परिणाम के जोखिम व लाभ शामिल रहते हैं। बस, केवल इनका अनुपात भिन्न होता है।
किसी को लॉटरी के टिकट में अच्छा लाभप्रद अवसर दिख सकता है, जिसका पुरस्कार बड़ी धनराशि हो। यह 10 करोड़ रुपए जितनी बड़ी भी हो सकती है। टिकट की कीमत मात्र 10 रुपए है। दस रुपए के निवेश में (कुछ ‘होशियार लोग’ यही मानते हैं) उन्हें 10 करोड़ रुपए के लाभ की संभावना प्राप्त होती है।
सचमुच यह बड़े प्रतिफल वाला निवेश है। शायद सबसे अधिक प्रतिफल है। (घुड़-दौड़ और सभी प्रकार के जुए भी ऐसा ही अवसर हैं) लेकिन इस निवेश में जोखिम क्या है? सारा निवेश खो जाता है। यह सबसे बड़ा जोखिम है। फिर से कह सकते हैं कि यह सबसे अधिक है।
हाँ, देखने में प्रतीत होता है कि बड़ा लाभ मतलब अधिक जोखिम। लेकिन वास्तविकता में 1 करोड़ रुपए (लाभ) पाने की संभावनाएँ न्यूनतम हैं। जबकि 10 रुपए खो बैठने की संभावना अत्यंत प्रबल है। अतः वास्तव में यह अत्यधिक जोखिमपूर्ण निवेश है।
ऐसा अत्यधिक जोखिमपूर्ण निवेश केवल प्रत्यक्ष व स्पष्ट लॉटरी या दौड़ और अन्य किस्म के जुए तक ही सीमित नहीं है। अन्य सामान्य निवेश अवसरों में भी जोखिम तो होता ही है।
कुछ रियल स्टेट ब्रोकर घरेलू प्लॉट खरीदने की अनुशंसा करते हैं। ग्राहक को लुभाने के लिए वे कहते हैं—
“यह बेहद सस्ता है। आप इसे खरीद क्यों नहीं लेते?”
“इसे इतना सस्ता क्यों बेच रहे हैं?”
“क्योंकि जमीन के स्वामित्व को लेकर मामूली सा विवाद चल रहा है।”
“इसमें कोई जोखिम तो नहीं है?”
“हाँ, तभी तो इतनी कम कीमत पर मिल रहा है।”
कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो जोखिम लेते हुए वह जमीन खरीद लेते हैं। इसी तरह, शेयर बाजार में भी कुछ डार्क हॉर्स की अनुशंसा होती रहती है। डार्क हॉर्स और कुछ नहीं, बल्कि कंपनियों के ऐसे शेयर होते हैं, जो बहुत कम भाव पर उपलब्ध हों। मौजूदा डाटा के हिसाब से उनके कम भाव को उचित माना जा सकता है, बल्कि उन्हें उसी या उससे भी कम भाव का माना जाता है। इसके बावजूद कुछ वर्गों में इसकी मल्टीबैगर (ब्लॉकबस्टर जैसा) होने की ‘संभावनाओं’ के चलते इसे ‘अच्छे शेयर’ के तौर पर अनुशंसित किया जाता है।
क्या यह संभावना प्रदर्शन में परिवर्तित होती है? पक्का नहीं है। हो भी सकती है और नहीं भी। अगर ऐसा होता है तो यह लाभ है। अगर ऐसा नहीं होता तो यह जोखिम है।
एक अन्य चरमावस्था बहुत कम जोखिम और बहुत कम लाभ वाली भी है। राष्ट्रीय बचत प्रमाण-पत्र (एन.एस.सी.) में मूल पूँजी खोने का जोखिम बहुत कम (या बिल्कुल नहीं) होता है, क्योंकि इसमें केंद्र सरकार की गारंटी है।
इस कम जोखिम की कीमत ‘कम लाभ’ होती है। एन.एस.सी. पर प्रतिवर्ष केवल 8% ब्याज ही मिलता है। एन.एस.सी. को आठ साल समाप्त होने से पहले नहीं भुनाया जा सकता। यह तरलता के पैमाने पर खरा नहीं उतरता। जहाँ जोखिम कम होगा, वहाँ लाभ भी कम होगा।
व्यक्ति को प्रतिफल व लाभ के तत्त्वों पर खरा होना चाहिए, जैसा कि पहले उल्लेखित है। यह इन पर निर्भर है—
• उम्र (उम्र जितनी कम होगी, जोखिम उतना अधिक ले सकेंगे और इसका उलटा)।
• पारिवारिक जिम्मेदारियाँ (जिम्मेदारियाँ जितनी अधिक, जोखिम उतना कम)।
• मौजूदा आय (कम आय, कम जोखिम)।
• संपत्ति आधारित (संपत्ति का मूल्य जितना कम, जोखिम उतना कम)।
• जोखिम लेने की क्षमता (जोखिम के हौसले पर निर्भर)।
अब हम संक्षेप में आज मौजूद अवसर और उनकी मुख्य विशेषताओं को देखेंगे।
इन विभिन्न अवसरों की पड़ताल करते हुए हम शेयरों में निवेश से तुलना व अंतर देखेंगे, जो इस पुस्तक का प्रमुख उद्देश्य है। हम सिर्फ इनकी तुलना करेंगे। यही वास्तविक तुलना होगी। हम संक्षेप में, वित्तीय संपत्ति में हर तरह के निवेश की पड़ताल करेंगे, न कि भौतिक संपत्ति में निवेश की।
वित्तीय संपत्ति
शुरुआत के लिए सबसे पहले वित्तीय संपत्तियों की एक सूची बना लेते हैं।
1. जमा
• डाकघर आवर्ती जमा
• बैंक में सावधि/मियादी जमा
• बैंकों में आवर्ती जमा।
2. सरकारी निवेश योजनाएँ
• राष्ट्रीय बचत प्रमाण-पत्र (एन.एस.सी.)
• लोक भविष्य निधि (पी.पी.एफ.)
• किसान विकास पत्र (के.वी.पी.)।
3. ऋण निवेश
• सार्वजनिक क्षेत्र के बॉण्ड (उदा. बिजली वित्त विभाग)
• केंद्र सरकार की प्रतिभूतियाँ
• ट्रेजरी बिल
• राज्य सरकारों के बॉण्ड
• सरकार/कॉरपोरेट द्वारा जारी डिबेंचर (ऋण-पत्र)
• वित्तीय संस्थाओं (आई.एफ.सी.आई., आई.डी.बी.आई. आदि) द्वारा जारी बॉण्ड।
4. म्यूचुअल फंड
• डेब्ट (ऋण) से संबंधित (मूल पूँजी की सुरक्षा हेतु महत्त्वपूर्ण)
• ग्रोथ ओरिएंटिड (निवेशकों के प्रतिफल/ रिटर्न हेतु महत्त्वपूर्ण)
• संतुलित (आंशिक डेब्ट और आंशिक ग्रोथ ओरिएंटिड इक्विटी)।
5. ई.एल.एस.एस
6. शेयर
• इक्विटी शेयर
• प्रिफरेंस शेयर (तरजीह शेयर)
• एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ई.टी.एफ.) निवेश शेयर।
7. डेरिवेटिव्ज उत्पाद
• फ्यूचर
• ऑप्शन
• इंडेक्स फंड्स।
8. बीमा
• बंदोबस्ती बीमा पॉलिसी (एंडोवमेंट पॉलिसी)
• संपूर्ण जीवन पॉलिसी
• टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी
• मनी बैक पॉलिसी
• यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस योजनाएँ (यू.एल.आई.पी.)
• पेंशन उत्पाद
• बच्‍चों के लिए पॉलिसी।
कोई भी व्यक्ति उपर्युक्त सूची में से अपने हालात व जरूरत के मुताबिक किसी को भी चुन सकता है। एक से अधिक विकल्प को चुनना चाहिए और निवेश के अनुपात में समय-समय पर बदलाव करते रहना चाहिए।
बल्कि एक संतुलित दृष्टिकोण लेकर चलना चाहिए और विभिन्न राशि विभिन्न योजनाओं में निवेश करनी चाहिए। ऐसा करने के लिए व्यक्ति को इन सबके बारे में जानकारी होना आवश्यक है।
विभिन्न वित्तीय संपत्तियों की विशेषताएँ
फिक्स्ड रिटर्न संपत्ति
इस वर्ग में आनेवाली संपत्तियों में प्रतिफल या रिटर्न (ब्याज दर) पहले से ही पूर्व निश्चित व प्रकट होने के साथ ही प्रतिबद्ध भी है। इसलिए निवेशक यह सुनिश्चित कर सकता है कि निवेश की गई धनराशि से उसे निश्चित रूप से इतने प्रतिशत आय हो सकेगी।
बैंकों की सभी सावधि जमा, कंपनियों, संस्थानों, डाकघरों की सभी एफ.डी. इस श्रेणी में आती हैं। इनकी रेंज 6 से 11% प्रतिवर्ष होती है और इसमें समय-दर-समय तथा संस्थान-दर-संस्थान परिवर्तन होते रहते हैं।
इसी तरह डिबेंचर और बॉण्ड्स में भी स्थिर रिटर्न मिलता है। कंपनी चाहे निजी हो या सरकारी, उसके लाभ या हानि से यह रिटर्न प्रभावित नहीं होता।
उपर्युक्त सूची में से 1, 2 और 3 श्रेणी में सूचीबद्ध सभी ‘फिक्स्ड रिटर्न’ के अंतर्गत आते हैं (सिवाय बीमा योजनाओं के, जो कुछ अन्य परिस्थितियों पर भी आधारित होती हैं)।
परवर्ती रिटर्न संपत्ति (वेरिएबल रिटर्न एसेट)
शीर्षक 4, 5 और 6 के तहत आनेवाले निवेश परवर्ती रिटर्न प्रकृति के हैं। कोई भी कंपनी इनके डिविडेंड (लाभांश) और बोनस की पहले से घोषणा नहीं करती। वे कर ही नहीं सकते। उनके द्वारा निवेश को दी गई आय साल-दर-साल भिन्न होती है। यह बढ़ व घट सकती है और कुछ मामलों में वे लाभांश देने से इनकार भी कर सकते हैं, यानी खराब हुई फसल की भाँति उस साल कोई रिटर्न नहीं मिलेगा।
दिलचस्प बात यह है कि यह परिवर्तनशीलता केवल रिटर्न तक ही सीमित नहीं रहती। इसका प्रभाव मूल पूँजी पर भी पड़ता है। जी हाँ, समय-समय पर बाजार की चाल के आधार पर निवेशित धनराशि भी बढ़ व घट सकती है।
टैक्स में छूट
निवेश से प्राप्त प्रतिफल की गणना करते समय व्यक्ति को प्रतिफल से संबंधित टैक्स अदायगी का भी ध्यान रखना होगा। निवेश से हुआ प्रत्येक वित्तीय प्रतिफल आय माना जाता है और इस पर टैक्स लगता है। इसलिए प्रतिफल की तुलना आय कर घटाने के बाद करनी चाहिए।
हालाँकि कुछ स‍्रोतों से प्राप्त आय पर कुछ हद तक टैक्स में छूट प्राप्त है। उदाहरण के लिए, एन.एस.सी., के.वी.पी., पी.एफ., पी.पी.एफ. और कुछ निश्चित (इन्फ्रास्ट्रक्चर) बॉण्ड पर आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत 1.50 लाख रुपए तक की टैक्स छूट है। यहाँ तक कि बैंक जमा से ब्याज आय पर भी इसी धारा 80सी के तहत ( न्यूनतम 5 वर्ष के लिए निवेशित 1.50 लाख रुपए तक पर) टैक्स छूट है।
ये टैक्स व टैक्स छूट प्रावधान जुलाई 2014 के हैं। इनमें साल-दर-साल बदलाव संभव है, जो प्रतिवर्ष लोकसभा में वित्त मंत्री द्वारा अकसर फरवरी के अंतिम दिन पेश किए जानेवाले केंद्रीय बजट में उल्लेखित रहता है।
निर्धारित समयावधि
ये ऐसे निवेश हैं, जिनमें निवेशित धन पूर्व निर्धारित निश्चित समय के बाद ही वापस मिलता है, उदाहरण के लिए, एन.एस.सी., के.वी.पी., सरकारी बॉण्ड तथा कंपनियों द्वारा जारी किए गए डिबेंचर्स। इस श्रेणी में कुछ म्यूचुअल फंड (क्लोज एंडेड) भी आते हैं।
एन.एस.सी. और के.वी.पी. के अतिरिक्त ऋण निवेश सूची में आनेवाली अन्य सभी वस्तुओं को खुले बाजार में प्रीमियम या छूट, जो प्रस्तावित ब्याज दर पर निर्भर हो, और तत्कालीन समय पर बाजार में प्रचलित ब्याज दर के आधार पर बेचा जा सकता है।
कोई भी व्यक्ति एन.एस.सी. और के.वी.पी. या किसी भी अन्य बॉण्ड को गिरवी रखकर कर्ज भी ले सकता है। उसे कर्ज पर निवेश की गई रकम की प्राप्ति से अधिक ब्याज देना पड़ सकता है। लेकिन आपातकालीन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऐसा करना संभव है।
फिक्स्ड रिटर्न और परवर्ती रिटर्न निवेश में अंतर
फिक्स्ड रिटर्न निवेश में रिटर्न के लिए जो भी रकम तय की जाती है, वह देनी ही होती है। यह अनुपात में कम जरूर होती है, लेकिन तय राशि मिलने की गारंटी होती है।
लेकिन परवर्ती निवेश योजना में रिटर्न अधिक (जैसे शेयर या म्यूचुअल फंड में कुछ समय के लिए), कम और कुछ मामलों में शून्य भी हो सकता है। अतः इन पर नजदीकी से नजर बनाए रखनी होती है और जरूरत पड़ने पर निवेश को तुरंत परिवर्तित करने का निर्णय लेना होता है। जिन लोगों के पास संबंधित बाजार में क्या चल रहा है, यह देखने का समय या रुझान नहीं है, उनके लिए फिक्स्ड रिटर्न का विकल्प चुनना अधिक बेहतर रहेगा।
पी.पी.एफ.—लोक भविष्य निधि
कोई भी व्यक्ति, फिर चाहे वह रोजगारशुदा हो या बेरोजगार, इस योजना में निवेश कर सकता है। यह 15 वर्षीय योजना है। टैक्स लाभ लेने के लिए इसमें प्रति वर्ष न्यूनतम 500 रुपए का अबाधित निवेश करना होगा। सन् 2014 में इसकी ब्याज दर 8% प्रतिवर्ष रही। पी.पी.एफ. पर मिलनेवाले ब्याज पर आयकर में छूट है (यह 80सी के तहत मिलने वाली 1.50 लाख रुपए की छूट का हिस्सा है)।
तीसरे वर्ष के बाद इस पर लोन लेने की अनुमति है और सातवें साल के बाद इसमें से कुछ हिस्सा निकाला जा सकता है। इस 15 वर्षीय योजना को 5 वर्ष के गुणन में आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
एन.एस.सी.—राष्ट्रीय बचत प्रमाण-पत्र
यह छह वर्षीय योजना है। इसमें न्यूनतम निवेश 1,000 रुपए है। 80सी योजना के तहत (टैक्स लाभ लेने के लिए) अधिकतम 1 लाख रुपए निवेश कर सकते हैं। इस योजना से प्राप्त ब्याज आय पर टैक्स में छूट है। वर्तमान व्यवस्था (2014) के चलते यह योजना निश्चित आय स्तर से अधिक वाले लोगों के लिए नहीं है।
डाकघर मासिक आय योजना
यह छह वर्षीय योजना है, जिसमें प्रतिवर्ष 8% ब्याज और सत्र के समापन पर यानी छठे साल 10% बोनस भी मिलता है। इसमें प्रति व्यक्ति न्यूनतम निवेश 1,000 रुपए और अधिकतम 3 लाख रुपए तथा संयुक्त निवेश 6 लाख रुपए है। इससे प्राप्त मासिक आय पर धारा 80सी के तहत छूट प्राप्त है।
के.वी.पी.—किसान विकास पत्र
निश्चित सालों (जारी करते समय प्रचलित परिवर्तित ब्याज दरों के अनुसार) के बाद निवेशित राशि दोगुनी हो जाती है। इस कारण परिपक्वता अवधि में अकसर परिवर्तन हो जाता है। इसमें कोई टैक्स लाभ नहीं मिलता। निवेशित राशि को न्यूनतम ढाई वर्ष बाद ही निकाला जा सकता है।
सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट)
पाँच साल के लिए निवेशित 1 लाख रुपए तक की बैंक एफ.डी. से प्राप्त ब्याज पर आय कर की धारा 88सी के तहत छूट है। इससे अधिक की राशि लागू स्लैब के अनुसार निजी आय कर की देनदार होगी। बैंक भी इस टैक्स को बतौर टी.डी.एस. काट सकते हैं। यदि व्यक्ति फॉर्म 15जी जमा करवा देता है तो बैंक स‍्रोत पर टैक्स नहीं काटेगा। व्यक्ति को आय कर रिटर्न भरते समय इसका उल्लेख करना होगा।
एफ.डी. को जरूरत पड़ने पर कभी भी बंद किया और भुनाया जा सकता है। लेकिन तय समय से पहले वापस लेने पर कम ब्याज मिलने के साथ ही आय कर छूट के लिए भी अपात्र हो जाएँगे।
सरकारी बॉण्ड
निवेश अवधि 1 साल से लेकर 30 साल तक होती है। सरकारी बॉण्ड में निवेश हेतु डीमैट अकाउंट होना आवश्यक है। सरकारी बॉण्डों के ब्याज से प्राप्त आय (3,000 रुपए प्रतिवर्ष तक) पर धारा 88 के तहत अतिरिक्त टैक्स लाभ उपलब्ध है।

Download शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets PDF Book Free,शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets PDF Book Download kare Hindi me , शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets Kitab padhe online , Read Online शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets Book Free, शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets किताब डाउनलोड करें , शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets Book review, शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets Review in Hindi , शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets PDF Download in English Book, Download PDF Books of   सोमा वल्लिअप्पान / Soma Valliappan   Free,   सोमा वल्लिअप्पान / Soma Valliappan   ki शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets PDF Book Download Kare, शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets Novel PDF Download Free, शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets उपन्यास PDF Download Free, शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets Novel in Hindi, शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets PDF Google Drive Link, शेयर बाजार सीक्रेट्स / Share Bazar Secrets Book Telegram

Download
Buy Book from Amazon
5/5 - (2 votes)
हमारे Telegram चैनल से जुड़े। To Get Latest Notification!

Related Books

Shares