Share This Book

सेपियन्स : मानव जाति का एक संक्षिप्त इतिहास / Sapiens: Manav Jati ka Sankshipt Itihas by Yuval Noah Harari Download Free PDF

5f1ea85529739.php

डॉ युवाल नोआ हरारी द्वारा लिखित किताब ‘सेपियन्स’ में मानव जाति के संपूर्ण इतिहास को अनूठे परिप्रेक्ष्य में अत्यंत सजीव ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह प्रस्तुतिकरण अपने आप में अद्वितीय है। प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग तक मानव जाति के विकास की यात्रा के रोचक तथ्यों को लेखक ने शोध पर आधारित आँकडों के साथ इस तरह शब्दों में पिरोया है कि यह किताब निश्चित रूप से मॉर्डन क्लासिक किताबों की श्रेणी में शुमार होगी।
करीब 100,000 साल पहले धरती पर मानव की कम से कम छह प्रजातियाँ बसती थीं, लेकिन आज स़िर्फ हम (होमो सेपियन्स) हैं। प्रभुत्व की इस जंग में आख़िर हमारी प्रजाति ने कैसे जीत हासिल की? हमारे भोजन खोजी पूर्वज शहरों और साम्राज्यों की स्थापना के लिए क्यों एकजुट हुए? कैसे हम ईश्वर, राष्ट्रों और मानवाधिकारों में विश्वास करने लगे? कैसे हम दौलत, किताबों और कानून में भरोसा करने लगे? और कैसे हम नौकरशाही, समय-सारणी और उपभोक्तावाद के गुलाम बन गए? आने वाले हज़ार वर्षों में हमारी दुनिया कैसी होगी? इस किताब में इन्हीं रोचक सवालों के जवाब समाहित हैं।
‘सेपियन्स’ में डॉ युवाल नोआ हरारी ने मानव जाति के रहस्यों से भरे इतिहास का विस्तार से वर्णन किया है। इसमें धरती पर विचरण करने वाले पहले इंसानों से लेकर संज्ञानात्मक, कृषि और वैज्ञानिक क्रांतियों की प्रारम्भिक खोजों से लेकर विनाशकारी परिणामों तक को शामिल किया गया है। लेखक ने जीव-विज्ञान, मानवशास्त्र, जीवाश्म विज्ञान और अर्थशास्त्र के गहन ज्ञान के आधार पर इस रहस्य का अन्वेषण किया है कि इतिहास के प्रवाह ने आख़िर कैसे हमारे मानव समाजों, हमारे चारों ओर के प्राणियों और पौधों को आकार दिया है। यही नहीं, इसने हमारे व्यक्तित्व को भी कैसे प्रभावित किया है।

लगभग 13.5 अरब वर्ष पहले पदार्थ, ऊर्जा, देश और काल उस घटना की वजह से अस्तित्व में आए थे, जिसे ‘बिग बैंग’ के नाम से जाना जाता है। हमारे विश्व के इन बुनियादी लक्षणों की कहानी को भौतिकशास्त्र कहा जाता है।
पदार्थ और ऊर्जा अपने प्रकट होने के लगभग 300,000 साल
बाद एटम नामक जटिल संरचनाओं में संयुक्त होने लगे और इसके बाद ये एटम अणुओं (मोलेक्यूल्स) में संयुक्त हो गए। एटमों, अणुओं और उनकी परस्पर क्रिया की इस कहानी को रसायनशास्त्र कहा जाता है।
लगभग 3.8 अरब वर्ष पहले पृथ्वी नामक ग्रह पर कुछ ख़ास
अणुओं ने मिलकर जीवन नामक विशेष रूप से बड़ी और पेचीदा संरचनाओं को निर्मित किया। जीवों की इस कहानी को जीव-विज्ञान के नाम से जाना जाता है।
लगभग 70,000 साल पहले होमो सेपियन्स से सम्बन्धित जीवों ने इससे भी ज़्यादा विस्तृत संरचनाओं को रूप देना शुरू किया, जिन्हें संस्कृतियों के नाम से जाना है। इन मानवीय संस्कृतियों के उत्तरवर्ती विकास को इतिहास कहा जाता है।
इतिहास की प्रक्रिया को तीन महत्त्वपूर्ण क्रान्तियों ने आकार
दिया : संज्ञानात्मक क्रान्ति (कॉग्नीटिव रिवोल्यूशन) ने लगभग
70,000 साल पहले इतिहास को क्रियाशील किया। कृषि क्रान्ति ने 12,000 साल पहले इसे तीव्र गति दी। वैज्ञानिक क्रान्ति, जो सिर्फ़ 500 साल पहले शुरू हुई थी, शायद इतिहास को ख़त्म कर सकती है और किसी पूरी तरह से भिन्न चीज़ की शुरुआत कर सकती है।
इन तीन क्रान्तियों ने मनुष्यों और उनके सहचर जीवों को किस तरह प्रभावित किया है, यह पुस्तक इसी का क़िस्सा कहती है।
इतिहास के अस्तित्व में आने के बहुत पहले से मनुष्यों का अस्तित्व था। काफ़ी कुछ आधुनिक मनुष्यों की तरह के प्राणी लगभग 25 लाख साल पहले प्रकट हुए थे, लेकिन असंख्य पीढ़ियों तक वे उन अनगिनत दूसरे जीवों से अलग नहीं दिखते थे, जिनके साथ वे अपने प्राकृतिक वास साझा करते थे।

4.9/5 - (291 votes)
हमारे चैनल से जुड़े। To Get Latest Books Notification!

Related Books

Shares