मनुष्य के शरीर मे जो वीर्य उत्पन्न होता है, उसके केवल दो हि प्रकार के उपयोग है,
एक तो आत्म संजीवन और दुसरा प्रजोत्पादन,

यदी वीर्य का उपयोग आत्म संजीवन के लिये किया गया, तो शरीर और मन कि शक्ती बढती है, बहुत बडे बदलाव नजर आते है! – बाबू रामचन्द्र वर्मा

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