प्रोक्सिमा का रहस्य | Proxima ka Rahasya PDF Download Sci-Fi

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पुस्तक का विवरण (Description of Book प्रोक्सिमा का रहस्य | Proxima ka Rahasya PDF Download) :-

नाम : प्रोक्सिमा का रहस्य | Proxima ka Rahasya Book PDF Download
लेखक :
आकार : 2.9 MB
कुल पृष्ठ : 124
श्रेणी : विज्ञान गल्प / Science Fiction Novelsउपन्यास / Upnyas-Novel
भाषा : हिंदी | Hindi
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वर्ष है 2095! 1977 में ‘गोल्डन रिकॉर्ड’ के साथ छोड़े गये वायेजर 1 को किसी ने ढूंढ लिया है. और उन्होंने वापस धरती पर संदेश भेजा है.

लाइट से तेज़ चलने वाले नये स्पेसशिप ‘अंतरिक्ष’ में कैप्टन अनारा धरती के सबसे नज़दीकी सितारे – प्रॉक्सिमा सेंटौरी – पर जाती है, जहाँ से यह संदेश आया है. उसके क्रू में लेफ्टिनेंट मनीषा जैसे नौसिखियों से लेकर कमांडर रायन जैसे धुरंधर मौजूद हैं. लेकिन एलियनों से मिल पाने से पहले ही उसके शिप पर अजीबोगरीब घटनाएँ होने लगती हैं. दुनिया का सबसे आधुनिक तरीके से प्रोग्राम किया गया उसका ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ उससे बातें छुपाने लगा है और बिना किसी वजह के उसके शिप पर रेडिएशन फ़ैल रहा है, जिससे मिशन खतरे में पड़ गया है.

प्रॉक्सिमा बी पर उन्हें जो मिलता है, उसके असर की गूँज धरती को अकल्पनीय खतरे में डालते हुए इस पहली यात्रा के कहीं बाद तक भी सुनाई देती रहती है. और तब जाकर अनारा को पता चलता है वह रहस्य, जो वायेजर 1 को बनाने वालों ने उसमें छुपाया था!!

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पुस्तक का कुछ अंश (प्रोक्सिमा का रहस्य | Proxima ka Rahasya PDF Download)

वर्तमान दिन, 2117 – धरती से 2.2 प्रकाश वर्ष दूर

‘अंतरिक्ष’ एक झटके से ‘जंप’ से बाहर आ गया. यह ठीक ऐसा था, जैसे कोई अदृश्य चीज़ अचानक अपना जादुई लबादा उतार कर किसी के सामने आ खड़ी हो. अगर आवाज़ स्पेस में यात्रा कर सकती, तो इससे पैदा हुए धमाके की आवाज़ शायद कई लाख किलोमीटर तक सुनाई देती. लेकिन, अभी तो गड़गड़ाहट की जगह सिर्फ एक तीखी नीली और लाल रोशनी नज़र आई, जो हौले-हौले शिप से दूर होती हुई घने अंधेरे में गुम हो गयी.
रिएक्टर के बंद हो जाने पर ‘अंतरिक्ष’ ने एक हल्का सा झटका खाया और फिर शांत हो गया, मानो पिछले कुछ घंटों की कड़ी मेहनत के बाद चैन की सांस ले रहा हो. ठीक उसी समय शिप के अंदर एक साथ कई बदलाव होने लगे. गुंबद के भीतर पसरे गहरे सन्नाटे को चीरती फिल्टरों की धीमी आवाज़ के साथ वहाँ की ठंडी हवा अब धीरे-धीरे गर्म हो रही थी. सफ़ेद पैनलों वाले उस विशाल, साफ-सुथरे कमरे की छिपी लाइटें थोड़े-थोड़े अंतराल से तब तक तेज़ होती गयीं, जब तक कि सारे स्लीपिंग कैप्सूल रोशन नहीं हो गए, जिनमें पीठ के बल सीधे लेटे इंसानी शरीरों को देखकर कोई भी उन्हें मृत समझने की भूल कर सकता था. हाइबरनेशन में गए हुए क्रू को जगाने से पहले ज़रूरी होता था, कंप्यूटर सिस्टम द्वारा कैप्सूलों के भीतर की परिस्थितियों में बदलाव करके उन्हें सामान्य तरीके से सांस लेने के लिए तैयार करना.[adinserter block=”1″]

अनारा की पलकें धीरे से हिलीं और उसने अधखुली आँखों से आसपास देखने की कोशिश की. सर के ठीक ऊपर लगी लाइटें हमेशा उसकी आँखों में चुभती थीं. नज़र को स्थिर करने के लिए उसने जल्दी-जल्दी कई बार पलकें झपकायीं, और फिर दोबारा बंद कर लीं. फिर अपनी सांस लेने की गति को बेहद धीमा करके वो मन ही मन एक से दस तक उल्टी गिनती गिनने लगी. ये तरीका उसने खुद ईजाद किया था ताकि हाइबरनेशन के खत्म होने पर पूरी तरह फ्रेश और चुस्त होकर उठ सके.
हल्की सी एक और हिस्स की आवाज़ हुई और उसके कैप्सूल का ढक्कन थोड़ा ऊपर उठ गया. चालक दल के अन्य सदस्य भी उठ चुके थे और उनके बोलने की अस्पष्ट आवाज़ें अनारा के कानों तक पहुँच रही थीं. उन्हें सुनकर उसे फिर से उनके प्रति अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास हुआ. उसके चेहरे पर एक कमजोर सी मुस्कुराहट आई और उसने ढक्कन को थोड़ा ऊपर उठाया ताकि बाहर आ सके. पता नहीं, ये दिन का समय था या रात का. एक स्पेसशिप में इस बात का अंदाज़ा लगाना ज़रा मुश्किल होता है, खासकर तब, जब स्पेसशिप धरती से कुछ प्रकाशवर्ष दूर उड़ रहा हो.[adinserter block=”1″]

फिर वो उठकर बैठ गयी. पैरों को दायें-बायें हिलाते हुए, इधर-उधर देखते हुए वो सिर हिलाकर क्रू के सदस्यों के अभिवादनों का भी जवाब देती जा रही थी. अपने डिप्टी कमांडर रायन पर नज़र पड़ते ही उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी. छह फुट दो इंच लंबा कमांडर रायन जब अपनी ठोड़ी खुजलाता हुआ उसके सामने आकर खड़ा हुआ तो पूरी तरह तरोताज़ा दिख रहा था. उसकी चाल-ढाल और अंदाज़ में सैन्य रणनीति में उसकी बैकग्राउंड की तो झलक दिखाई देती थी, लेकिन पहली बार उसे देखने पर कोई ये नहीं समझ सकता था कि वो एक निहायत ही अनुशासित दिमाग और सैद्धांतिक भौतिकी पर गहरी पकड़ भी रखता है. खासियतों का ये कॉम्बिनेशन काफी अजीब था, लेकिन इस मिशन के लिए ये बहुत अधिक महत्वपूर्ण था.
“गुड मॉर्निंग, कैप्टन! अच्छी नींद आई?” हर जंप के बाद वह हमेशा यही पूछता था, जबकि गुंबद में सोना अपनी मर्ज़ी से नहीं, बल्कि ज़बरदस्ती थोपा गया होता था.
“काफी अच्छी, रायन. ऑपरेशन सेंटर चलें?” गुंबद से बाहर निकलते हुए अनारा ने पूछा. असल में यह कोई प्रश्न नहीं, उनका रोज़ का रूटीन था.
करीब सौ मीटर दूर ऑपरेशन सेंटर के एक लेवल तक पहुँचने में उन्हें कुछ मिनट लगे. कमरे में घुसते ही दोनों को सामने कंट्रोल स्टेशन पर लेफ्टिनेंट मनीषा बैठी नज़र आई. जंप के दौरान अपने सुरक्षात्मक खोल के भीतर यह अकेला स्टेशन बचा था, जो अभी भी काम कर रहा था और यहाँ अक्सर इसी युवा फ्लाईट लेफ्टिनेंट की ड्यूटी होती थी. यहाँ उसी का राज चलता था और यह उसे उसकी कड़ी मेहनत से मिला था. सिर्फ 25 साल की, इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट इस लड़की ने ‘भारतीय वायु सेना’ में यह पद यूं ही नहीं हासिल कर लिया था. कैप्टन के ऑपरेशन सेंटर में दाखिल होने की आहट सुनकर उसने सर ऊपर उठाया.
“गुड मॉर्निंग, कैप्टन! यहाँ सब ठीक है. रिपोर्ट आपके स्टेशन पर है.”
“थैंक्स, लेफ्टिनेंट. लोकेशन?”[adinserter block=”1″]

“धरती से 2.2 प्रकाश वर्ष दूर. इंजन परफॉरमेंस शेड्यूल के अनुसार है. फिलहाल क्रूज़ फेज़ चालू है. जंप रिएक्टर के दोबारा चार्ज होने तक यही स्पीड जारी रहेगी.”
अनारा ने सर हिलाकर सहमति जताई और फिर वह और रायन कुछ कदमों की दूरी पर बने अपने-अपने स्टेशनों की ओर बढ़ गए: जो कमरे के बीचों-बीच थे, एक-दूसरे के ठीक अगल-बगल. उसने अपने डिस्प्ले का बटन दबाया और वह तुरंत ऑन हो गया. पूरी स्क्रीन तरह-तरह की मुश्किल संख्याओं और चार्टों से भर गयी. एक चार्ट में धरती और अपने गंतव्य के मुकाबले उसके स्पेसशिप ‘अंतरिक्ष’ की पोजीशन नज़र आ रही थी, तो दूसरे में पावर प्लांट के साथ शुरू होने वाले मुख्य ऑन-बोर्ड सिस्टम्स का स्टेटस दिखाई दे रहा था. इस समय ये सब हरे रंग में चमक रहे थे और अधिकतर आंकड़े ऑप्टिमम ज़ोन में थे. गैर-ज़रूरी पावर की खपत के आंकड़े देखकर वो कुछ सोच में पड़ गयी. हालांकि, ये रीडिंग कुछ खास महत्वपूर्ण नहीं थी, फिर भी उसने पुष्टि के लिए इंजीनियरिंग के इंचार्ज को एक नोट भेज दिया.
“हैलो नारद!” – फिर उसने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) को संबोधित किया. उसका नाम पूरे शिप पर मशहूर था: बिलकुल धार्मिक कहानियों वाले नारद मुनि की तरह, शिप का यह AI सारे सिस्टमों और संचार से जुड़ा था और किसी भी जानकारी को इधर से उधर भेजने में हद से ज़्यादा फुर्तीला था.  यह हर सिस्टम और क्रू के हरेक सदस्य के बारे में सब कुछ जानता था और अगर अपने इंटीग्रिटी प्रोग्राम से इसे कंट्रोल न किया गया होता, तो कुछ लोगों की तो यह अच्छी तरह ऐसी-तैसी कर सकता था.[adinserter block=”1″]
काफी समय पहले 21वीं सदी की शुरुआत में कृत्रिम प्राणियों को अधिकार उपलब्ध कराने वाले EU के कारण जो अफरातफरी का माहौल बन गया था, उसे देखते हुए इसे ज़रूरी समझा गया कि शिप का संतरी होने के बावजूद भी नारद की हरकतों पर थोड़ा नियंत्रण रखना बेहतर होगा. अभी तक भी मानवी और मानव द्वारा बनाई गयी इंटेलिजेंस के बीच एक स्पष्ट रेखा नहीं खींची जा सकी थी, लेकिन AI की ताकतों पर ये अंकुश नीति कमेटी द्वारा लगाए गए थे और अधिकांशतः मान्य थे – चाहे मजबूरी में ही सही.
“हैलो, कैप्टन अनारा. सभी सिस्टम नॉर्मल हैं. क्रू की हेल्थ के बारे में एक अपडेट आपको भेजा गया है. चिंता की कोई बात नहीं है. लेकिन फिर भी, डॉक्टर खान क्रू के कुछ लोगों पर स्पेस रेडिएशन के संपर्क में आने का असर देखने के लिए कुछ और टैस्ट करना चाहते हैं. उनकी लिस्ट मंज़ूरी के लिए आपको भेजी गयी है.”
“ठीक है, नारद. प्लीज़ एक स्टेटस मैसेज लिखो और उसे इंडियन स्पेस कमांड को भेज दो.” उसने एक बार फिर अपने डिस्प्ले की ओर देखा और निश्चय किया कि उसका शिप उसके कैप्टन की सीट पर बैठे बिना भी अभी थोड़ी देर और उड़ सकता है. “सब ठीक है, रायन. मैं शावर लेने जा रही हूँ. उसके बाद नाश्ते के लिए चलें?”
“क्यों नहीं. बस ज़रा फ्यूल चैक कर लूं.” कंट्रोल पैड पर थिरकती उसकी उँगलियों ने जल्दी ही कुछ कमांड मशीन में फ़ीड कर दिए. “हो गया. रोस्टर एकदम सैट है और सही रास्ते पर है. मनीषा का रिलीवर भी बस आता ही होगा. यानि अब मैं खाने के लिए जा सकता हूँ. पंद्रह मिनट में मिलते हैं.”
◆◆◆

नहाने के बाद अनारा काफी तरोताज़ा महसूस कर रही थी. वो फिर से रायन
के पास पहुंची और दोनों लेवल 2 पर स्थित कैफ़े की ओर बढ़ गए. इतनी देर तक सिलिंडर की छोटी सी जगह में फंसकर बैठे रहने के बाद पैरों को फैला पाना दोनों को अच्छा लग रहा था. रास्ते में उन्हें क्रू के और लोग मिले, जो अपनी शिफ्टें शुरू करने जा रहे थे. ‘अंतरिक्ष’ धीरे-धीरे इंसानी आवाजों से गुलज़ार होता जा रहा था….
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हमने प्रोक्सिमा का रहस्य | Proxima ka Rahasya PDF Book Free में डाउनलोड करने के लिए Google Drive की link नीचे दिया है , जहाँ से आप आसानी से PDF अपने मोबाइल और कंप्यूटर में Save कर सकते है। इस क़िताब का साइज 2.9 MB है और कुल पेजों की संख्या 124 है। इस PDF की भाषा हिंदी है। इस पुस्तक के लेखक कुमार एल / Kumar L हैं। यह बिलकुल मुफ्त है और आपको इसे डाउनलोड करने के लिए कोई भी चार्ज नहीं देना होगा। यह किताब PDF में अच्छी quality में है जिससे आपको पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। आशा करते है कि आपको हमारी यह कोशिश पसंद आएगी और आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ प्रोक्सिमा का रहस्य | Proxima ka Rahasya की PDF को जरूर शेयर करेंगे।

Q. प्रोक्सिमा का रहस्य | Proxima ka Rahasya किताब के लेखक कौन है?
 

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