मैं समय हूँ | Main Samay Hoon Book PDF Download Deep Trivedi

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पुस्तक का विवरण (Description of Book मैं समय हूँ | Main Samay Hoon PDF Download) :-

नाम : मैं समय हूँ | Main Samay Hoon Book PDF Download
लेखक :
आकार : 5 MB
कुल पृष्ठ : 220
श्रेणी : रहस्य / Mysteryधार्मिक / Religiousहिंदू – Hinduism
भाषा : हिंदी | Hindi
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‘मैं समय हूँ’ यह पुस्तक बेस्टसेलर्स ‘मैं मन हूँ’, ‘मैं कृष्ण हूँ’ और ‘101 सदाबहार कहानियां’ के लेखक तथा स्पीरिच्युअल सायको-डाइनैमिक्स के पायनियर दीप त्रिवेदी ने लिखी है। मनुष्यजीवन को गहराई से समझने और समझाने वाले दीप त्रिवेदी ने विश्व की अंतिम और निर्णायक सत्ता समय के रहस्यों का अपनी किताब ‘मैं समय हूँ’ में रहस्योद्घाटन किया है। इस किताब में दीप त्रिवेदी ने घड़ी की सूइयों से परे समय के कई स्वरूपों का खुलासा किया है। यही नहीं, उन्होंने न सिर्फ इन सभी स्वरूपों की विस्तार से चर्चा की है, बल्कि उनके प्रभावों को भी समझाया है। इस किताब की सबसे विशेष बात यह कि लेखक ने इसमें इतनी सरल भाषा का उपयोग किया है जिससे कि एक सामान्य मनुष्य भी समय जैसी महासत्ता की पूरी कार्यप्रणाली आसानी से समझ सके। इस किताब में यह स्पष्ट होता है कि एक समय ही है जिस कारण न सिर्फ मनुष्य बल्कि यह पूरा ब्रह्मांड भी चलायमान है तथा मनुष्य के जीवन में घटने वाली तमाम ऊंच-नीच भी समय के ही अधीन है। अतः चाहे मनुष्यजीवन सरल बनाना हो या फिर ब्रह्मांड के गहरे रहस्य समझने हों, समय के गहरे स्वरूपों को समझे बिना इनमें से कुछ भी शक्य नहीं है। इसीलिए इस बात पर विशेष ध्यान देते हुए लेखक ने मनुष्यों को उनका बिगड़ा समय संवारने के कई सरल उपाय भी दिये हैं। यह बात तय है कि जो भी समय की ताल-से-ताल मिला लेगा, एक सुखी और सफल जीवन गुजारना उसका भाग्य हो जाएगा। यह किताब गुजराती में भी उपलब्ध है। [adinserter block=”1″]
The book ‘Main Samay Hoon’ is written by Deep Trivedi, author of bestsellers ‘Main Man Hoon’, ‘Main Krishna Hoon’ and ‘101 Evergreen Stories’ and pioneer of Spiritual Psycho-Dynamics. Deep Trivedi, who deeply understands and explains human life, has revealed the secrets of time, the ultimate and decisive authority of the world, in his book ‘I am time’. In this book, Deep Trivedi reveals the many forms of time beyond the hands of the clock. Not only this, he has not only discussed all these forms in detail, but has also explained their effects. The most special thing about this book is that the author has used such a simple language in it so that even a common man can easily understand the whole functioning of a superpower like time. It is clear in this book that there is only one time due to which not only human beings but also this whole universe is moving and all the ups and downs that happen in the life of a human being are subject to time only. Therefore, whether it is to make human life simple or to understand the deep secrets of the universe, none of these is possible without understanding the deep forms of time. That’s why, paying special attention to this matter, the author has also given many simple ways to men to save their wasted time. It is certain that whoever follows the rhythm of time, it will be his fate to lead a happy and successful life. This book is also available in Gujarati.

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पुस्तक का कुछ अंश (मैं समय हूँ | Main Samay Hoon PDF Download)

मेरा जन्म

निश्चित ही यह बात अरबों-खरबों वर्ष पुरानी है और प्रारंभिक तौर पर यह थोड़ा कॉम्प्लीकेटेड भी लग सकता है। लेकिन जैसे-जैसे मैं अपने बाबत बताता जाऊंगा, निश्चित ही बात आपके जहन में साफ होती चली जाएगी। क्योंकि आखिर आप भी इसी कॉम्प्लीकेशन का एक हिस्सा हैं।
खैर! अभी तो मैं यह बात वहां से प्रारंभ करता हूँ जब मैं अस्तित्व में आया ही नहीं था, तब मात्र एक ‘एहसास’ अस्तित्व में था; और वह अपने होने-मात्र से संतुष्ट था। तथा चूंकि वह अपने होने-मात्र से संतुष्ट था, अतः शक्ति से भरपूर भी था। यह बात हमेशा के लिए जहन में बिठा लेना कि जो भी अपने होने से संतुष्ट होगा, वह हमेशा शक्ति से भरपूर होगा। फिर यह बात सूर्य के संदर्भ में की जाए या बुद्ध व एडीसन जैसों के व्यक्तित्व के बाबत। खैर अभी तो वापस एहसास पर लौट आऊं। और वहां…अचानक इस एहसास की इच्छा-शक्ति के कारण उसकी कोख से मेरा जन्म हुआ और मैं अस्तित्व में आया। और चूंकि मेरा जन्म ही इच्छा-शक्ति के बल पर हुआ था, अतः इच्छा मेरा प्रथम स्वभाव बनकर उभरा। और फिर पल-पलकर जैसे-जैसे मैं एहसास की कोख से निकलता गया, मेरी इच्छानुसार समानांतर रूप से ‘‘स्पेस’’ भी डेवेलप होता चला गया।[adinserter block=”1″]

और तब से एहसास की कोख से एक-एक क्षण कर मेरा विस्तार होना अब भी जारी है तथा उसी के समानांतर मेरे द्वारा स्पेस का विस्तार होना भी जारी है। और चूंकि हर नए दिन के साथ मेरा विस्तार हो रहा है, अतः रोज-रोज यह ब्रह्मांड भी फैलता ही जा रहा है। …अब तो विज्ञान की अनुभूति में भी यह सत्य आ ही चुका है कि ब्रह्मांड का रोज-रोज विस्तार हो रहा है। खैर, इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्त्वपूर्ण समझने लायक बात यह कि मैं और स्पेस एक डोर से बंधे हुए हैं। और मजे की बात यह कि भले ही यहां का हर कण मेरे और स्पेस के मिलन से व्याप्त है, परंतु हमें व्यवहार की स्वतंत्रता कुछ भी नहीं है, क्योंकि हमारे अस्तित्व में आते ही एहसास हम दोनों को नियम की एक डोर से बांधता चला जा रहा है। यानी, अब हम दोनों में से एक भी ना तो उस नियम के बाहर कोई व्यवहार कर सकता है और ना ही हम अब एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं। यानी समय है तो स्पेस है, और स्पेस है तो समय होना ही है; लेकिन बावजूद इसके हरहाल में बरतना तो हम दोनों को एहसास के बांधे नियम के दायरे में ही है। अर्थात् जहां एक ओर हमारा विस्तार होता जा रहा है, वहीं हाथोंहाथ हमारे हर विस्तार को एहसास अपने हिसाब से नियम-बद्ध भी करता चला जा रहा है।
अब उस एहसास को आप चाहे जितने बड़े या चाहे जिस नाम से बुलाओ, कोई फर्क नहीं पड़ता। उसे शक्ति या शून्य से लेकर भगवान तक का नाम आप अपनी रुचि व प्रज्ञानुसार दे सकते हैं, परंतु वास्तव में मेरा या स्पेस का अब उससे कुछ लेना-देना नहीं। यह बात अच्छे से समझ लें कि अब तो जो कुछ भी है, बस वे नियम ही हैं जिनकी डोर से वह हमें बांध चुका है। और चूंकि मेरी इच्छानुसार मेरे करोड़ों स्वरूप हैं, अतः उसी के अनुसार स्पेस के भी करोड़ों रूप हैं। और मजा यह कि दोनों के हर मिलन का हर कॉम्बीनेशन भी एहसास द्वारा ऐसे ही करोड़ों नियम से आबद्ध है।[adinserter block=”1″]

खैर! अब यहां मैं सर्वप्रथम ‘‘मैं’’ यानी यह समय क्या है तथा यह स्पेस क्या है, यह समझा दूं। परंतु यह समझने हेतु पहले आपको हमदोनों के चंद बुनियादी फर्क समझना आवश्यक है। और हमारा सबसे बड़ा फर्क यह है कि मैं अदृश्य हूँ, जबकि स्पेस दृश्यमान है। दूसरी बड़ी बात यह कि मैं स्वचालित हूँ, जबकि यह सम्पूर्ण स्पेस मुझसे चलायमान है। इसी बात को सीधे शब्दों में कहूं तो जो कुछ भी आपको दृष्टिगोचर हो रहा है वह स्पेस है, परंतु उस स्पेस के पीछे का मूल कारण भी मैं हूँ तथा उसकी गति व मति का निर्णायक भी मैं ही हूँ। यहां गौर करने लायक बात यह भी कि इतना स्वतंत्र और शक्तिशाली दिखते हुए भी मैं नियम से बंधा हुआ हूँ। साथ ही मेरे और स्पेस का हर मिलन नियम से बंधा हुआ है, यह मैं बता ही चुका हूँ।
खैर! यह मैंने बड़े ही सरल शब्दों में मेरे अस्तित्व में आने की बात कह दी। और मेरी कही बात का तारण यह कि मैं ही इस जगत का प्रारंभिक बिंदु हूँ। और यह भी बता दूं कि मैं यह प्रथम बिंदु एकबार नहीं अनकों बार बन चुका हूँ। ‘एहसास’ ने जब चाहा सब लीन किया और जब चाहा सब अस्तित्व में आया। परंतु जगत का उदय व प्रलय, या फिर एहसास…आज का मेरा विषय नहीं है। …आज तो मैं सिर्फ अपने बाबत बताने को लालायित हूँ। सो आगे अब मैं अपने ही विभिन्न स्वरूपों व प्रभावों की चर्चा करूंगा। मुझे उम्मीद है कि मेरे स्वरूपों, मेरी शक्तियों तथा मेरे तमाम नियमों को समझकर आप उस अद्भुत शक्ति से भर जाएंगे कि जिससे आप अपना जीवन जैसा चाहें बना पाएंगे। परंतु चूंकि यह विषय काफी गहरा है, इसीलिए सबसे पहले मैंने अपने जन्म के बाबत ही आपको संक्षेप में बताया। और मेरा निवेदन है कि उसे अच्छे से समझ लेना। वैसे तो आगे जैसे-जैसे मैं अपने बारे में विस्तार से बताता चला जाऊंगा, निश्चित ही आपके जहन में मेरे जन्म से लेकर मेरी शक्तियों तथा मेरे प्रभावों के बाबत सबकुछ साफ होता चला जाएगा। और मेरे अस्तित्च में आनेवाली यह बात जो अभी मैंने आपको संक्षेप में समझाई है, वह तो आईने की तरह साफ हो जाएगी।

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हमने मैं समय हूँ | Main Samay Hoon PDF Book Free में डाउनलोड करने के लिए Google Drive की link नीचे दिया है , जहाँ से आप आसानी से PDF अपने मोबाइल और कंप्यूटर में Save कर सकते है। इस क़िताब का साइज 5 MB है और कुल पेजों की संख्या 220 है। इस PDF की भाषा हिंदी है। इस पुस्तक के लेखक दीप त्रिवेदी / Deep Trivedi हैं। यह बिलकुल मुफ्त है और आपको इसे डाउनलोड करने के लिए कोई भी चार्ज नहीं देना होगा। यह किताब PDF में अच्छी quality में है जिससे आपको पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। आशा करते है कि आपको हमारी यह कोशिश पसंद आएगी और आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ मैं समय हूँ | Main Samay Hoon की PDF को जरूर शेयर करेंगे।

Q. मैं समय हूँ | Main Samay Hoon किताब के लेखक कौन है?
Answer.
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