कृष्ण” के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रश्नोत्तर सहित मुंबई एवं मनाली में ओशो द्वारा दी गई 21 वार्ताओं एवं नव-संन्यास पर दिए गए एक विशेष प्रवचन का अप्रतिम संकलन। यही वह प्रवचनमाला है जिसके दौरान ओशो के साक्षित्व में संन्यास ने नये शिखरों को छूने के लिए उत्प्रेरणा ली और ‘नव-संन्यास अंतर्राष्ट्रीय’ की संन्यास-दीक्षा का सूत्रपात हुआ।

“कृष्ण” का व्यक्तित्व बहुत अनूठा है।
अनूठेपन की पहली बात तो यह है कि कृष्ण हुए तो अतीत में हैं, लेकिन हैं भविष्य के।
मनुष्य अभी भी इस योग्य नहीं हो पाया कि कृष्ण का समसामयिक बन सके।
अभी भी कृष्ण मनुष्य की समझ के बाहर हैं।
भविष्य में ही यह संभव हो पाएगा कि कृष्ण को हम समझ पाएं।”—ओशो

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