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इन्वेस्टोनॉमी स्टॉक मार्केट गाइड / Investonomy Stock Market Guide PDF Download [English] by Pranjal Kamra

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

नाम / Name 📥इन्वेस्टोनॉमी स्टॉक मार्केट गाइड / Investonomy Stock Market Guide
लेखक / Author 🖊️
आकार / Size 12.3 MB
कुल पृष्ठ / Pages 📖216
Last UpdatedMarch 13, 2022
भाषा / Language Hindi
श्रेणी / Category,

✔✔ क्या आप दुनियाभर के अरबपतियों से प्रेरित हैं लेकिन वैसा बनना ✔✔ आपको पहुँच से दूर का सपना लगता है?

✔✔ शेयर बाजार के उतार-चढ़ावों और इसमें निवेश के नतीजों को लेकर आप उलझन में हैं?

✔✔ क्या सच में आपको शेयर बाजार में निवेश से डर लगता है?

अगर हाँ, तो आपको इन्वेस्टोनॉमी जरूर पढ़नी चाहिए! इन्वेस्टोनॉमी न केवल आज के जमाने के निवेश के सिद्धांतों को बताती है बल्कि शेयर बाजार के कुछ रहस्यों से भी परदा उठाती है। ये आम भ्रांतियों और गलत धारणाओं को भी दूर करती है।

इस पुस्तक को अच्छी तरह पढ़कर आप निवेश की अपनी योजना तैयार करने योग्य बन जाएँगे और जल्दी ही, शेयर में निवेश के जरिए दौलत कमाने के सफर पर निकलने के लिए तैयार हो जाएँगे।

इन्वेस्टोनॉमी मौजूदा निवेशकों के साथ ही आपके जैसे भावी निवेशकों को सशक्त बनाने का एक सार्थक प्रयास है।

 

पुस्तक का कुछ अंश

प्रिय पाठको,
यह पुस्तक ऐसा रोडमैप है, जो शेयर बाजार के साथ आपकी घृणा के रिश्ते को मजबूत प्रेम-बंधन में बदल देगी।
अनुक्रम
आभार
निवेश : मेरे जीवन की सबसे सुखद दुर्घटना
1. शेयर बाजार : बड़े सपनों का प्रवेश-द्वार
2. क्या आप पूर्ण वित्तीय स्वतंत्रता चाहते हैं?
3. शेयर बाजार में निवेश की बुनियादी बातें
4. शेयर बाजार में जोखिम : मिथक या वास्तविकता?
5. शेयर बाजार को प्रभावित करनेवाले कारक
6. मुद्रा अस्थिरता का देश की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव?
7. शेयर बाजार बनाम अन्य वित्तीय निवेश
8. शेयर निवेश का मनोविज्ञान
9. शेयर निवेश की रणनीतिक समझ
10. वैल्यू इन्वेस्टिंग : बेहतर आर.ओ.आई. की निवेश रणनीति
11. शेयर निवेश रणनीति
12. निवेश के दो दृष्टिकोण
13. विश्लेषण द्वारा अच्छे शेयर कैसे छाँटें?
14. उद्योग विश्लेषण हेतु माइकल पोर्टर का फाइव फोर्सेज फ्रेमवर्क
15. बिजनेस की क्षमता पहचानें
16. प्रबंधन विश्लेषण
17. वार्षिक रिपोर्ट का नजदीकी आकलन
18. फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स का विश्लेषण
19. मूल्यांकन विश्लेषण
20. भ्रमित करनेवाले व्यवहार पूर्वग्रह
21. प्रसिद्ध शेयर निवेशकों का शेयर निवेश मुखपत्र
22. शेयर निवेश करना सीखें
23. शेयर बाजार में मेरा शुभचिंतक कौन?
24. भ्रमजाल : आत्म-आरोपित सिद्धांत
25. आपके पास कितने शेयर होने चाहिए?
26. मल्टी-बैगर शेयर एकत्र करना
27. निवेश पर विहंगम दृष्टि
28. शेयर निवेश हेतु आवश्यक चेक लिस्ट
निष्कर्ष
लेखकीय
“सरल व साधारण लोगों को भी शेयर बाजार से बड़ी कमाई करने का अधिकार है।”
‘इस पुस्तक का उद्देश्य उन्हें बुनियादी जानकारी देना है। लेकिन सिर्फ इतना ही नहीं! अगर आप इक्विटी इन्वेस्टिंग में अपने हाथ जला चुके हैं तो इस पुस्तक से आपको अपने ज्ञान को विस्तार देने में मदद मिल सकेगी।’
‘इन्वेस्टोनॉमी’ को लिखने का उद्देश्य निवेशकों को शेयरों में निवेश के बुनियादी नियमों से अवगत करवाना है। इस पुस्तक में उन बुनियादी रणनीतियों और नियमों का खुलासा भी किया गया है, जिनको निवेशकों को शेयरों को चुनते वक्त ध्यान में रखना चाहिए। इस पुस्तक को पूरी तरह पढ़ना सुनिश्चित करेगा कि पाठक यह भलीभाँति सीख जाएँगे कि शेयरों में सफलतापूर्वक किस तरह निवेश करना है।
इस पुस्तक में प्रसिद्ध मिथकों को तोड़ा गया है, जैसे—
 सफल शेयर निवेशक बनने के लिए आपको सांख्यिकीविद्, गणितज्ञ या फाइनेंशियल गुरु होना चाहिए।
 शेयर बाजार जुआ खेलने जैसा है।
 शेयर विश्लेषण सीखना चुनौतीपूर्ण है, जिसके लिए किसी पेशेवर की मदद लेना आवश्यक है।
आपके लिए ‘इन्वेस्टोनॉमी’ क्यों प्रासंगिक है?
मुझे लगता है कि आप जीवन में धनवान् होना चाहते हैं। मेरा मतलब है कि ऐसा कौन होगा, जो काफी अमीर नहीं होना चाहेगा? अगर आप ऐसा नहीं सोचते तो कृपया अपने में ज्यादा कमाई की ललक जगाएँ और आगे पढ़ना जारी रखें।
अब, जब आप अपनी ‘बड़ा रिटर्न पाने’ की प्यास को बुझाने के लिए उपलब्ध विकल्पों को तलाशते हैं तो अंततः आप (अन्य बहुत से लोगों की तरह) शेयर बाजार में बाजी लगाते हैं। चूँकि आपका धन दाँव पर लगा है, इसलिए आप अतार्किक होकर सकारात्मक रिटर्न की उम्मीद लगा लेते हैं। लेकिन दुर्भाग्य से, बाजार आपके अनुकूल नहीं जाता और आप अपनी मेहनत की कमाई गँवा बैठते हैं। इससे आपका दिल टूट जाता है और आप शेयर बाजार में निवेश पर विश्वास खो देते हैं।
लेकिन तभी किसी दोस्त की सुनाई शेयर बाजार से कमाई की छोटी सी कहानी शेयरों में निवेश की आपकी बुझती इच्छा को फिर हवा दे देती है। आप फिर से प्रयास करने का साहस जुटाते हैं और जब पुनः नुकसान होने लगता है तो आप भयभीत हो जाते हैं। उस वक्त आप कैसा महसूस करते हैं—धोखा! निराशा! नुकसान!
शेयर निवेश से संबंधित हर समस्या से परिचित होने के कारण मेरे दिमाग में ऐसी पुस्तक लिखने का विचार आया, जिससे शेयर निवेश से धनवान् बनने की सही सोच रखनेवाले हर संभावित निवेशक को मदद मिल सके। मेरा इस पुस्तक को लिखने का एकमात्र उद्देश्य उस एकल निवेशक को सशक्त बनाना है, जिसने कभी शेयरों में निवेश को नहीं आजमाया है या प्रयास करने पर विफल रहा है।
इन्वेस्टोनॉमी का उद्देश्य आपको उस साधन के बारे में बताना है, जिससे आप सही मंशा के साथ निवेश करके शेयर बाजार से काफी धन कमा सकें। यह पुस्तक ऐसा रोडमैप है, जो आपकी आकांक्षाओं का ईंधन बनेगी और जिससे आप अपने जुनून को हासिल कर सकेंगे।
—प्रांजल कामरा
सी.ई.ओ., फिनोलॉजी वेंचर्स प्रा.लि.
(सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार कंपनी)
यह पुस्तक लिखने की मेरी प्रेरणा
मैं ऐसी बहुत सी कहानियों से दुःखी था कि किस तरह शेयर बाजार में भोले-भाले निवेशकों को मूर्ख बनाया जाता है, जिससे वे अपनी मेहनत से कमाई बचत खो देते हैं। आपका अधिक समय न लेते हुए यहाँ मैं दो बेहद दुःखद प्रसंग बताना चाहूँगा—
1. शेयर फ्रॉड का एक शिकार बेंगलुरु का युवा पेशेवर था, जिसे एक स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी डिसेप्टिव ब्रोकर्स प्रा.लि. (सोद्देश्य परिवर्तित नाम) ने मूर्ख बनाया। इस कंपनी ने अपने प्रतिष्ठित स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी होने का दावा करते हुए एक योजना प्रस्तावित की, जिसमें 40, 000 रुपए निवेश करने थे। स्टॉक ब्रोकरेज फर्म का दावा था कि कुछ ही महीनों में यह निवेश दो गुना हो जाएगा।
इस सौदे से मोहित होकर पीड़ित ने निवेश कर दिया। लेकिन जल्द ही कंपनी ने भोले-भाले शिकार से बाजार चढ़ने पर अधिक लाभ मिलने की बात कहकर और अधिक निवेश करने के जाल में फँसा लिया। बेचारा युवा निवेशक इस कारोबार में होनेवाली फ्रॉड गतिविधियों से अनजान था। अंत तक उसने 4 लाख रुपए निवेश कर दिए थे, सिर्फ इस उम्मीद में कि उसे इस निवेश से कुछ लाभ हो जाए।
2. एक और दुःखद कहानी एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिक की है, जिनसे एक स्टॉक ब्रोकरेज फर्म ने संपर्क किया था। फर्म ने उनसे वादा किया कि शेयरों में छोटे निवेश से वे अपनी पेंशन पूँजी को बढ़ा सकते हैं। शिकार ने सोचा कि आय बढ़ जाए तो उनके लिए बुढ़ापा गुजारना आसान हो जाएगा। अतः उन्होंने एक योजना में निवेश कर दिया।
पॉलिसी के अनुसार, कंपनी हर माह उनकी पेंशन का 20 प्रतिशत निवेश करेगी, जिससे अच्छा रिटर्न हासिल हो सके। जब दो महीने बाद निवेशक ने फर्म से तब तक किए निवेश के सबूत माँगे तो कंपनी बहाने बनाने लगी। बेचारे पीड़ित ने अपने पैसे वापस माँगे; लेकिन उनकी हर कोशिश बेकार रही।
इन दो घटनाओं ने मुझे प्रेरित किया कि मैं उन रिटेल निवेशकों के साथ अपने शेयर निवेश से जुड़े प्रत्यक्ष अनुभव साझा करूँ, जो इन कथित शेयर सलाहकार फर्मों के लुभावने सौदों के प्रस्तावों का शिकार बन जाते हैं। अपने आसपास के इन्हीं मासूम लोगों की मदद के प्रयास का परिणाम इस पुस्तक का लिखा जाना है।
मैं आप सबका आभारी हूँ, जिन्होंने इस पुस्तक के लिए अपना मूल्यवान् समय दिया। मैं यह पुस्तक अपने परिवार को समर्पित करता हूँ, जो शेयर बाजार में निवेश की मेरी इस जुनूनी यात्रा के दौरान मेरी प्रेरणा और सहायक बने।
—प्रांजल कामरा
जरूर पढ़ें
स पुस्तक की सभी सामग्री, जिसमें फॉर्मूले, अवधारणाएँ, उदाहरण अथवा उल्लेखित चार्ट या ग्राफ शामिल हैं, विश्वसनीय स्रोतों से लिये गए हैं। हमने अपने आप को इस पुस्तक में जितना संभव था, उतनी शुद्धता व सटीकता से अभिव्यक्त किया है और यदि कोई त्रुटि होती है तो वह साभिप्राय नहीं, बल्कि दुर्घटनावश है। इस पुस्तक में शेयर निवेश के तरीकों को पूरी ईमानदारी व निष्पक्षता के साथ बताया गया है, जिसका एकमात्र उद्देश्य आपको लाभ पहुँचाना है।
पाठकों को हमारी गंभीर सलाह है कि निवेश से पहले अच्छी तरह पड़ताल करें, क्योंकि पैसा पेड़ पर नहीं उगता। और हम, बतौर लेखक, यहाँ हमारी साझा की गई जानकारी के उपयोग द्वारा निवेश से हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

आभार

“आभार मानने से हमारे पास जो है, वही पर्याप्त हो जाता है।”
किसी अज्ञात व्यक्ति की यह उक्ति मेरे लिए, खासतौर पर इस पुस्तक को पूरा करने के लिहाज से, काफी मायने रखती है। मैंने निवेश संबंधी हर तरह की बुनियादी बातों, मतों, सिद्धांतों और तकनीकी ज्ञान को आजमाया, जो मैं बीते वर्षों में सीख सका और लागू कर सका। मेरे माता-पिता एवं मार्गदर्शकों और उन अनेकानेक लोगों के आशीर्वाद के बिना यह पुस्तक संभव नहीं हो पाती, जिन्होंने इसे संभव बनाने के लिए निस्स्वार्थ भाव से काम किया।
इस पुस्तक को अपना अंतिम आकार रतन दीप सिंह व चाँदनी अग्रवाल के कठोर संपादन और प्रूफरीडिंग से हासिल हुआ। पांजुल अग्रवाल व उर्वी कोटक ने बोधपूर्ण तकनीकी सुझाव दिए। देव विश्वकर्मा और मोहित मालवीय के रचनात्मक चित्रांकन डिजाइनों के अभाव में इसे पढ़ना थोड़ा उबाऊ हो जाता। प्रिया जैन का धन्यवाद, जिन्होंने इस पुस्तक के लिए विशिष्ट सुझावों के साथ ही नैतिक समर्थन भी दिया। अंत में, मैं नीतिश्री गुप्ता का आभारी हूँ, जिन्होंने इस पुस्तक का प्रारूप बनाने में योगदान दिया।

निवेश : मेरे जीवन की सबसे सुखद दुर्घटना

मैं यहाँ आपको यह कहानी केवल यह बताने के लिए साझा कर रहा हूँ कि जब मेरे जैसा शेयर निवेश की पृष्ठभूमि न रखनेवाला गैर-अनुभवी व्यक्ति इतनी ज्यादा कमाई कर सकता है तो आप क्यों नहीं?
कुछ साल पहले मेरे पिता ने मुझे जन्मदिन पर टी.वी.एस. वेगो भेंट किया। लेकिन इससे अच्छी चीज उन्होंने मुझे शेयरों में निवेश करने के लिए 20, 000 रुपए भी दिए। नौसिखिया होने के कारण मैंने भावुक फैसला लेते हुए टी.वी.एस. मोटर्स के शेयर खरीद लिये। मैं भाग्यशाली रहा कि इस सौदे में मैंने अच्छा मुनाफा कमाया। इससे मेरा रुझान बढ़ा। इसके बाद मैं शेयरों में और अधिक निवेश करने लगा और मेरी निवेश यात्रा शुरू हो गई।
पहली ही बार में सफलता का स्वाद चख लेने से मैं शेयर निवेश की कला में माहिर होने के अति-आत्मविश्वास से भर गया। लेकिन अगले दो निवेश में भाग्य ने मेरा साथ नहीं दिया। मैंने क्रमशः 200 रुपए और 30 रुपए के शेयर खरीदे। आज उनका मूल्य क्रमशः 0 रुपए और 3 रुपए है। आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ तो मुझे अहसास होता है कि टी.वी.एस. मोटर्स में मेरी सफलता का कारण और कुछ नहीं, केवल शुरुआती सौभाग्य था।
वैसे, क्या आप जानते हैं कि जो व्यक्ति दावा करे कि उसे शेयर बाजार में कभी नुकसान नहीं हुआ, वह या तो झूठा है या उसने कभी निवेश किया ही नहीं है? केवल नुकसान होने पर ही आप सीख पाते हैं।
सन् 2015 में मैं कानून की पढ़ाई कर रहा था। मेरे पिता का मानना था कि केवल कानून का कोर्स ही अच्छे कॅरियर के लिए काफी नहीं है। इसलिए उन्होंने मेरा दाखिला कंपनी सेक्रेटरी के कोर्स में भी करवा दिया। एक दिन सी.एस. इंस्टीट्यूट से रोजाना भेजी जानेवाली दर्जनों इ-मेल्स में से एक इ-मेल में एक इंस्टीट्यूट विशेष का जिक्र था, जिसका नाम था—एन.आई.एस.एम. (NISM)।
जब मैंने पहले-पहल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट (एन.आई.एस.एम.) के बारे में सुना तो बहुत रोमांचित हुआ कि ऐसा भी इंस्टीट्यूट मौजूद है, जो पूरी तरह सिक्योरिटी मार्केट को समर्पित है। अतः मैंने एन.आई.एस.एम. से स्टॉक इन्वेस्टमेंट में एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स कर लिया।
आधे दशक तक संघर्ष करने के बाद आखिर मैंने अपने दिल की आवाज सुनी और मुझे समझ आ गया कि मैं इसी के लिए बना हूँ। मुझे वैल्यू इन्वेस्टिंग और फंडामेंटल एनालिसिस के बारे में पढ़ना इतना ज्यादा पसंद था कि मैं दिन भर बैठा इसी के बारे में पढ़ता रहता।
शेयर बाजार के बारे में ज्यादा-से-ज्यादा जानने के अपने सतत प्रयास से मैं लगातार सीखता रहा। जल्दी ही मैंने शेयर मार्केट और म्यूचुअल फंड्स निवेश पर अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया। चैनल (प्रांजल कामरा नाम से) आरंभ करने के एक साल बाद मैंने अपनी कंपनी ‘फिनोलॉजी वेंचर्स प्रा.लि.’ स्थापित की, जो छत्तीसगढ़ की पहली सेबी (SEBI) रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार कंपनी है।

1.

शेयर बाजार : बड़े सपनों का प्रवेश-द्वार

पने अपने किसी दोस्त को कहते सुना होगा कि ‘काश, मेरे पास इतना पैसा होता कि मैं अपना कपड़ों का व्यापार शुरू कर पाता!’ या ‘काश, मेरे पास रेस्टोरेंट खोलने लायक पैसे होते!’ ऐसी अभिलाषाओं को सुनने के बाद मैं अकसर अपने दोस्त का यह कहकर साहस बढ़ाता हूँ कि ‘अच्छा है, अपने सपनों को सच बनाओ।’ लेकिन कुछ ऐसा भी है, जो उन्हें उनके सपनों को सच करने से रोकता है।
तो ऐसा क्या है, जो उन्हें बड़े सपने देखने से रोकता है?
1. यह ‘ज्ञान, अनुभव और कौशल’ की कमी हो सकती है।
2. यह ‘धन और स्रोतों’ की कमी हो सकती है।
3. यह ‘समय और सहायता’ की कमी हो सकती है।
या यह भी संभव है कि उन्हें बड़े सपने देखने से रोकनेवाले ये तीनों ही कारण हों। लेकिन क्या व्यापार करने के लिए ये तीनों कारण जरूरी हैं या कोई और तरीका भी है? खूब सोचिए।
क्या हो, अगर मैं आपको कहूँ कि आप कोई भी व्यापार कर सकते हैं, बिना यह जाने कि वह कैसे किया जाता है? क्या हो, अगर मैं कहूँ कि आप बिना धन या स्रोत के भी व्यापार कर सकते हैं? क्या हो, अगर मैं कहूँ कि आप बिना समय व सहायता के भी व्यापार कर सकते हैं? बकवास लगती हैं न! क्यों?
यह ऐसी बात है, जो केवल शेयर निवेश के अवसरवादी जगत् में ही संभव हो सकती है।
शेयर बाजार से क्या उम्मीद कर सकते हैं?
शेयर बाजार में पूँजी बढ़ाने के बहुत से अवसर मौजूद हैं। यहाँ पर निम्नलिखित संभावनाएँ मौजूद हैं—
 शेयर बाजार में निवेश करना किसी भी अच्छे व्यापार में हिस्सेदारी पाने का अच्छा तरीका है, क्योंकि यहाँ आपका धन पूर्णतः समर्पित बिजनेस मैनेजरों के हाथ होता है। आप अपना धन अच्छी संभावनाओं वाले उद्यमों में लगाते हैं, जिनका प्रबंधन वॉरेन बफे, रतन टाटा, आदि गोदरेज जैसे अति-दक्ष पूर्व सक्रिय विचारकों के हाथ होता है। ये लोग रोजाना पेशेवरों की बड़ी टीम के साथ मिलकर ऐसी सह-क्रिया का निर्माण करते हैं, ताकि उनका व्यापार सफल रहे। उनके बिजनेस की सफलता से आपकी पूँजी बढ़ती है। तो क्या आपको लगता है कि अपनी पूँजी बढ़ाने का इससे बेहतर कोई और तरीका भी है, जहाँ श्री रतन टाटा और श्री आदि गोदरेज जैसे दिग्गज आपके लिए काम कर रहे हैं?
 आप बिजनेस में एक छोटी धनराशि लगाते हैं, जो समय के साथ व्यापार मूल्य बढ़ने पर कई गुना हो जाती है।
 आपको बस, धन निवेश करके भूल जाना होता है। शेयर बाजार में अपनी पूँजी बढ़ाने का यह सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि व्यापार बढ़ने में समय लगता है।
तो क्या हम तय मान सकते हैं कि शेयरों में निवेश की तसवीर इतनी ही आदर्श है? वस्तुतः नहीं! इसमें निवेशक के तौर पर काफी धैर्य रखना होता है।
जरा सोचिए, क्या किसी नए कारोबार में पहले ही दिन से मुनाफा होने लगता है? नहीं न? हम धैर्य रखकर व्यापार के बढ़ने का इंतजार करते हैं। हम कई वर्षों तक 12 घंटे काम करते हैं, तब जाकर व्यापार में मुनाफा कमाते हैं। शेयर बाजार भी ऐसा ही है। आपको सही शेयर को चुनकर इसे बढ़ने का समय देना होता है। समय बीतने पर व्यापार बढ़ने के साथ ही शेयर का मूल्य भी बढ़ता है और ऐसा होने में वक्त लगता है।
अतः, शेयरों में निवेश की इस मोहक यात्रा की शुरुआत से पहले हम निम्न सवालों का जवाब लेते हैं, जिससे शेयर बाजार के बारे में आपकी मौजूदा समझ को जाँचा जा सके।
अगर आपको कुछ या कोई भी जवाब न पता हो तो चिंता न करें। बस, अनुमान लगाएँ।
कृपया निम्न सवालों के जवाब शीघ्र व सहज भाव से देना है—
1. क्या आप शेयरों से निश्चित रिटर्न पा सकते हैं?
(क) हाँ
(ख) नहीं
2. क्या सफल शेयर निवेशक बनने के लिए आपको फाइनेंशियल और टेक्निकल चार्ट के विश्लेषण की आवश्यकता पड़ती है?
(क) हाँ
(ख) नहीं
3. इनमें से किससे अधिकतम रिटर्न मिल सकता है?
(क) भूमि
(ख) सोना
(ग) शेयर
(घ) डिबेंचर
(ङ) फिक्स डिपॉजिट
4. क्या शेयरों में निवेश सीखना और करना आसान है?
(क) हाँ
(ख) नहीं
5. क्या शेयरों में निवेश करके आप उतने धनवान् हो सकते हैं, जिसका सपना देखते हैं?
(क) शायद हाँ
(ख) नहीं, कभी नहीं
6. यदि आप पर्याप्त धनवान् होते तो भी शेयरों में निवेश करते?
(क) हाँ
(ख) नहीं
7. भारत की वित्तीय साक्षरता दर कितनी है?
(क) 24 प्रतिशत
(ख) 65 प्रतिशत
(ग) 83 प्रतिशत
(घ) 92 प्रतिशत
8. भारत के 132 करोड़ लोगों में से कितने लोग शेयर बाजार में निवेश करते हैं?
(क) सिर्फ 10 प्रतिशत
(ख) सिर्फ 20 प्रतिशत
(ग) लगभग 40 प्रतिशत
(घ) सिर्फ 2 प्रतिशत
9. सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होने के बावजूद अधिकांश भारतीय शेयरों में निवेश क्यों नहीं करते?
(क) उन्हें निवेश के नियम नहीं पता
(ख) वे नुकसान से डरते हैं
(ग) वे इसे छोड़ चुके हैं, क्योंकि नुकसान हुआ है
(घ) उपर्युक्त सभी
उपर्युक्त सवालों के जवाब हैं—
1. नहीं, 2. नहीं, 3. स, 4. हाँ, 5. शायद हाँ, 6. हाँ, 7. अ, 8. द, 9. द
अगर आपके कुछ जवाब गलत रहे हों तो चिंता न करें। आगामी अध्याय शेयरों की दुनिया के अद्भुत चमत्कारों के प्रति आपकी आँखें खोल देंगे। तो शेयर निवेश में गहरी डुबकी लगाने के लिए तैयार रहिए। आशा करता हूँ कि आपका पढ़ना आनंदपूर्ण व परिपूर्ण रहे।
2.
क्या आप पूर्ण वित्तीय स्वतंत्रता चाहते हैं?
पनी आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए कड़ी मशक्कत की चूहा-दौड़ में फँसे रहकर हम अकसर सोचते हैं कि क्या कोई ऐसा तरीका है, जिससे बिना ऐसे कष्ट उठाए यह किया जा सके?
या क्या आप अकसर 40 साल की उम्र में वित्तीय रूप से स्वतंत्र होने का सपना देखते हैं? या क्या आप इतने अमीर होना चाहते हैं कि आपको खर्च करते समय दो बार सोचना न पड़े? या क्या आप चाहते हैं कि जीवन का आनंद लेते हुए भी आपका बैंक बैलेंस बढ़ता रहे?
अगर हाँ, तो यह अध्याय आपको अवश्य रोमांचित करेगा।
आत्म-निरीक्षण
थोड़ा और गहरे जाकर देखते हैं कि आप अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को कितना समझते हैं। यह एक वर्कशीट है, जिसका आपको फौरन जवाब देना होगा।
इस वर्कशीट का उपयोग कैसे करें?
 नीचे कुछ सवाल दिए गए हैं।
 हर सवाल में चार विकल्प दिए गए हैं, जिनमें से हर एक का अंक है।
निम्न सारणी से आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आगामी पाँच वर्षों में आप कितना धन कमा सकते हैं। मेरा अनुरोध है कि आप पेंसिल लें और सभी जवाबों के आगे निशान लगाएँ।
1. आपका धन निवेश का लक्ष्य क्या है?
विकल्प अंक
(क) आपको धन जमा करना है 4
(ख) आपको घर खरीदना है 3
(ग) सेवानिवृत्ति की योजना बना रहे हैं 2
(घ) बच्चों की शिक्षा/विवाह 1
2. आप निवेश किया धन भविष्य में कब निकालना चाहेंगे?
विकल्प अंक
(क) 10 वर्ष बाद 4
(ख) 5-10 वर्ष में 3
(ग) 2-5 वर्ष में 2
(घ) 2 वर्ष के भीतर 1
3. क्या आप परिवार में इकलौते कमानेवाले हैं?
विकल्प अंक
(क) नहीं 4
(ख) हाँ और एक आश्रित है 3
(ग) मुझ पर दो या चार आश्रित हैं 2
(घ) मुझ पर चार से ज्यादा आश्रित हैं 1
4. क्या आप पर ऋण चुकाने जैसा कोई वित्तीय दायित्व है?
विकल्प अंक
(क) नहीं 4
(ख) हाँ, आय के 10 प्रतिशत से कम की ई.एम.आई. 3
(ग) हाँ, आय के 10-20 प्रतिशत की ई.एम.आई. 2
(घ) हाँ, आय के 20 प्रतिशत से अधिक की ई.एम.आई. 1
5. आपको निम्न में से किस निवेश रिटर्न की तलाश है? (निम्न सूची में वह सी.ए.जी.आर. (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) रेंज दरशाई गई है, जो संबंधित विकल्प को चुनने पर मिल सकती हैं)
 
6. अगर आपको संभावनाशील नौकरी दी जाए तो आप कौन सा वेतन विकल्प चुनेंगे?
विकल्प—अंक
(क) कर्मचारी शेयर विकल्प, जिसका वर्तमान मूल्य 1, 00, 000 होगा और आगे वृद्धि की संभावना है — 4
(ख) 1, 00, 000 का अग्रिम बोनस — 3
(ग) आपके 4, 00, 000 के वेतन में 10 प्रतिशत वेतन-वृद्धि — 2
(घ) 3 वर्षीय नौकरी गारंटी — 1
अंक योजना
अपने चुने उपर्युक्त विकल्पों के आधार पर कुल अंकों की गणना करें।
 
तो अब आपको पता है कि आप बतौर निवेशक किस तरह के जोखिम और रिटर्न लेने को तैयार हैं। आप यह भी जानते हैं कि अपने वर्तमान वित्तीय निवेश विकल्पों द्वारा आप निकट भविष्य में कितना धन कमा सकते हैं। हमारे इस अभ्यास से उस संभावना का खुलासा भी हो गया है कि शेयर बाजार में निवेश करने पर आप कितना कमा सकते हैं।
जागरूकता वह पहला कदम है, जिससे आप उतना धन कमा सकते हैं, जिसका सपना देखते हैं। बहुत खूब! आपने वह आकलन किया व समझा है, जो 70 प्रतिशत लोग खुद अपने वित्त के बारे में समझने में विफल रहते हैं। और यहाँ मैं कहना चाहूँगा कि ‘अच्छी शुरुआत आधी सफलता’ होती है।
3.
शेयर बाजार में निवेश की बुनियादी बातें
प्रसिद्ध वैल्यू स्टॉक इन्वेस्टर पीटर लिंच के शब्दों में, “हर किसी में इतना दिमाग है कि वह स्टॉक मार्केट को समझ सके। अगर आप पाँचवीं कक्षा का गणित कर लेते हैं तो ऐसा कर सकते हैं।”
शेयर क्या होते हैं?
कंपनी को काम करने तथा विकसित व विस्तारित होने के लिए पूँजी चाहिए होती है। धन पाने का एक आम तरीका बैंक से लोन लेना है, जिस पर आपको प्रति माह एक निश्चित ब्याज देना होता है। धन एकत्रण का एक और तरीका कंपनी का शेयर जारी करना है, जिसे आम लोग खरीदते हैं।
कंपनी की पूँजी को छोटी इकाइयों में बाँटा जाता है, जिसे ‘शेयर’ कहते हैं। ‘शेयर’ शब्द का मतलब कंपनी में हिस्सेदारी है। अगर आपके पास कंपनी का शेयर है तो आपके पास उस कंपनी का स्वामित्व है। अतः आपको अधिकार है कि आप उस कंपनी के मुनाफे में हिस्सेदार बनें।
जब कोई निवेशक किसी कंपनी का शेयर खरीदता है तो वह कंपनी का हिस्सा बन जाता है। निवेशक मुनाफे में कुछ प्रतिशत हिस्सेदारी का हकदार होता है और उसका दायित्व केवल शेयर के मूल्य जितना होता है। कंपनी का मालिक होने की जगह इसमें यह फायदा होता है कि आपको अपने निवेशित मूल्य से अधिक का नुकसान नहीं होता। एक और फायदा यह होता है कि स्टॉक एक्सचेंज के होने से आप जब चाहें, तुरंत किसी भी अन्य कंपनी के शेयर खरीद या बेच सकते हैं।
इन्फोसिस ने अपना कारोबार वर्ष 1981 से आरंभ किया। इन्फोसिस श्री एन.आर. नारायणमूर्ति, नंदन नीलेकणी और अन्य के दिमाग से जनमा था, जो तीन दशक तक इस व्यापार के मुख्य संचालक रहे। शुरुआत में, इन्फोसिस की कमाई बहुत अधिक नहीं थी, हालाँकि यह औसत अवश्य थी।
लेकिन वर्ष 1993 में चीजें तब बदलीं, जब इन्फोसिस पब्लिक हुई। इसने अपने शेयर आम लोगों को बेचे, जो ऐसी कंपनी में निवेश को लेकर बहुत शंकालु थे, जिसमें न श्रमिक थे, न मशीनरी और न ही संयंत्र। मुट्ठी भर निवेशक, जिन्होंने वर्ष 1993 में इन्फोसिस के शेयरों में मात्र 10, 000 रुपए निवेश किए थे, वे आज मल्टी-मिलेनियर हो गए हैं।
बाकी सब इतिहास है। इन्फोसिस तेजी से आगे बढ़ी और टाटा के बराबर हो गई। आज नंदन नीलेकणी की संपत्ति 3, 000 करोड़ रुपए से अधिक है।
इस तरह कंपनी शेयर जारी करके जनता से धन जुटाती है। यह धन कंपनी के स्वामित्व के बदले मिलता है। अतः जब कंपनी आगे बढ़ती है तो शेयरों के भाव भी बढ़ते हैं, जिससे शेयरधारक मुनाफा कमाते हैं।
शेयर बाजार क्या है?
अगर आप चतुर ग्राहक हैं तो आपके लिए शेयर बाजार को खँगालना और खरीदारी करना मनोरंजक रहेगा। अगर आप चतुर ग्राहक नहीं हैं तो शेयर बाजार आपको ऐसा बना देगा। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ, क्योंकि शेयर बाजार आपको शेयर ट्रेडिंग, अर्थात् शेयरों को बेचने व खरीदने का मौका देता है। आम बाजारों में आप केवल खरीदारी करते हैं, लेकिन यहाँ आप बेच भी सकते हैं। अतः इस तरह दोनों हालात को नियंत्रित कर सकते हैं और इस कारण आपका भाग्य खुद आपके हाथ होता है।
शेयर बाजार के दो अहम घटक
1. निवेशक : निवेशक कम जोखिम लेते हैं। इसके लिए वे निवेश से पहले कंपनी का बुनियादी विश्लेषण करते हैं।
2. स्पेक्यूलेटर्स : स्पेक्यूलेटर्स वे लोग हैं, जो सूचीबद्ध प्रतिभूतियों में अनुमानित भाव गति पर उच्च जोखिम वाले दाँव लगाते हैं।
निवेश और स्पेक्युलेशन के बीच बुनियादी अंतर
क्रम—1
बुनियादी अंतर—निवेश लक्ष्य
निवेश—निवेश का लक्ष्य सुरक्षित धन निवेश हेतु बुनियादी विश्लेषण द्वारा शेयर मूल्यांकन करना।
स्पेक्युलेशन—स्पेक्युलेशन का लक्ष्य अच्छा मुनाफा कमाने के लिए धन दाँव पर लगाना है।
क्रम—2
बुनियादी अंतर—निवेश आधार
निवेश—निवेश का आधार कंपनी का बुनियादी वैल्यू एनालिसिस (मूल्यांकन विश्लेषण) होता है।
स्पेक्युलेशन—स्पेक्युलेशन का आधार बाजार की अफवाहों और शेयर के भाव में बदलाव होता है।
क्रम—3
बुनियादी अंतर—अवधि
निवेश—दीर्घावधिक
स्पेक्युलेशन—लघु आवधिक
क्रम—4
बुनियादी अंतर—जोखिम
निवेश—औसत या कम जोखिम।
स्पेक्युलेशन—उच्च जोखिम।
क्रम—5
बुनियादी अंतर—निवेश रिटर्न
निवेश—व्यापार मूल्य-वर्धन से मुनाफा मिलना।
स्पेक्युलेशन—शेयर के भाव में आशानुकूल बदलावों से मुनाफा।
क्रम—6
बुनियादी अंतर—उम्मीद
निवेश—रिटर्न दर उम्मीद औसत व वास्तविक।
स्पेक्युलेशन—रिटर्न दर उम्मीद उच्च और बहुधा अवास्तविक।
क्रम—7
बुनियादी अंतर—धन का स्रोत
निवेश—निवेशक अपना धन निवेशित करता है
स्पेक्युलेशन—स्पेक्युलेटर उधार का धन शेयरों में निवेश करता है।
क्रम—8
बुनियादी अंतर—आय का पैटर्न
निवेश—रिटर्न देर से मिल सकता है, लेकिन आय स्रोत स्थिर होता है।
स्पेक्युलेशन—अनियमित आय स्रोत और नुकसान की भी पूरी संभावना।
क्रम—9
बुनियादी अंतर—निवेश अवधारणा
निवेश—निवेशक कंपनी का मूल्य विश्लेषण करने के बाद सोच-समझकर फैसला लेता है।
स्पेक्युलेशन—स्पेक्युलेटर तुरंत मुनाफे की सहज वृत्ति से निवेश करता है।
क्रम—10
बुनियादी अंतर—निवेशक मानसिकता
निवेश—निवेशक निवेश की मूल नीति, मूल्य और बुनियाद का ध्यान रखता है।
स्पेक्युलेशन—स्पेक्युलेटर धन कमाने को बेकरार होता है और यही उसके शेयर खरीदने का प्रमुख कारण बनता है।
क्रम—11
बुनियादी अंतर—सफलता संभावना
निवेश—धन गँवाने की संभावना काफी कम होती है, क्योंकि फैसले गहन अध्ययन पर आधारित होते हैं।
स्पेक्युलेशन—धन गँवाने की संभावना 50 प्रतिशत होती है, क्योंकि स्पेक्युलेशन काफी हद तक जुए जैसा ही है।
जहाँ निवेशक बाजार में स्थिरता लाते हैं, वहीं स्पेक्युलेटर भी बाजार में संतुलन बनाने के लिए उतने ही महत्त्वपूर्ण होते हैं।
स्पेक्युलेटर भी आवश्यक हैं, क्योंकि वे दो अहम भूमिका निभाते हैं—
 ‘स्पेक्युलेटर शेयरों के भाव में उतार-चढ़ाव लाते हैं।’ इस अस्थिरता के कारण निवेशकों को कम भाव पर शेयर खरीदने का अच्छा मौका मिलता है।
 ‘स्पेक्युलेटर लगातार शेयर सौदे करते रहते हैं, जिससे खरीदने व बेचने के लिए शेयर उपलब्ध रहते हैं।’
शेयर बाजार का महत्त्व
स्टॉक एक्सचेंज एक संस्थान है, जो उस बाजार की मेजबानी करता है, जहाँ शेयर बेचने व खरीदनेवाले साथ आकर शेयरों का सौदा (खरीदना या बेचना) करते हैं। साधारण शब्दों में कहें तो शेयर बाजार क्रेताओं और विक्रेताओं को मिलाने के मंच का काम करता है।
शेयर बाजार के अन्य महत्त्वपूर्ण कार्य हैं—
1. भाव लगाना : शेयर बाजार शेयरों के भावों की शुद्ध कीमत लगाने के लिए पारदर्शी माध्यम प्रदान करता है। शेयर का भाव एवं मूल्यांकन उनकी माँग व आपूर्ति पर आधारित होता है। अगर किसी कंपनी के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद हो तो उसके शेयरों की माँग बढ़ जाती है; इस तरह उनका भाव भी बढ़ जाता है।
2. लिक्विडिटी (चलनिधि) : शेयर बाजार आपको 24×7 जब चाहें तब शेयरों को खरीदने और बेचने की सुविधा देता है। इससे लिक्विडिटी सुनिश्चित होती है, जो आप जैसे निवेशकों के लिए काफी सुविधाजनक रहता है।
3. धन बचाने और निवेश की आदत : चूँकि आप थोड़ा धनराशि शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं, इससे लोगों में बचत की प्रवृत्ति बढ़ती है।
4. व्यापार विस्तार : इससे कोई भी सूचीबद्ध कंपनी अपने व्यापार को विस्तार देने हेतु शीघ्र ही धन की आवश्यकता पूरी कर सकती है।
5. स्पेक्युलेशन का अवसर देता है : चलनिधि बनाए रखने के लिए शेयर बाजार निवेशकों को स्वस्थ स्पेक्युलेशन का अवसर प्रदान करता है।
स्टॉक एक्सचेंज (शेयर बाजार) देश की आर्थिक तरक्की के लिए अति आवश्यक है। शेयर ट्रेडिंग द्वारा कॉरपोरेट सेक्टर वित्तीय कोष का निर्माण करता है, जिसके उपयोग से वह अपने परिचालन को विस्तार देता है या इस जुटाई गई पूँजी का कंपनी के फायदे में उपयोग करता है। इसे जुए या सौदेबाजी की जगह के तौर पर नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह निवेश करने और अपने धन को बढ़ाने का स्थान है।
बतौर शेयरधारक आप पैसे कैसे कमाते हैं?
किसी कंपनी का शेयर खरीदने के बाद आपको मूलतः दो तरह की आय हो सकती है—पहली, डिविडेंड आय और दूसरी, निवेश का मूल्य बढ़ना। आइए, इन दोनों को समझते हैं—
 डिविडेंड आय : कंपनी का कमाया मुनाफा या तो पुनः बिजनेस में निवेश कर दिया जाता है या आय के हिस्से के रूप में शेयरधारकों के बीच बाँटा जाता है। शेयरधारकों को दिए जानेवाले मुनाफे के हिस्से को डिविडेंड कहते हैं।
 निवेश मूल्य-वृद्धि : बाजार में धन निवेश करने का एक प्रमुख कारण निवेश के मूल्य को बढ़ते देखना है। शेयर की माँग कंपनी के प्रदर्शन से प्रभावित होती है, जिसका परिणाम शेयर के भाव में बदलाव होता है। शेयर का भाव बढ़ने से निवेश के मूल्य में भी वृद्धि होती है।
तो ये शेयर बाजार में निवेश के बुनियादी आधार हैं, जिसे आपको इसकी साफ तसवीर दिखाने के लिए लिखा गया है कि शेयर किस तरह काम करते हैं। यह जानकारी आगामी अध्यायों में मिलनेवाली जानकारियों को समझने का आधार बनेगी।
मैं आपको बताना चाहूँगा कि भले ही शेयर बाजार के बारे में बहुत कुछ लिखा या बोला जा चुका हो, फिर भी लोग इसकी बुनियादी वास्तविकताओं से अनजान हैं। शेयर मार्केट में निवेश करना सीखने के इच्छुक भी टी.वी. और अखबारों में दिखाए ग्राफ व चार्ट देखकर हतोत्साहित हो जाते हैं। लेकिन सच तो यह है कि इन बड़े वित्तीय अंक आँकड़ों का शेयर निवेश से बहुत कम वास्ता है। अच्छी खबर यह है कि शेयर निवेश हम में से हर एक के लिए है, फिर चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से हो।
4.
शेयर बाजार में जोखिम : मिथक या वास्तविकता?
 
विलियम फेदर के शब्दों में, “शेयर बाजार की सबसे मजेदार बात है कि हर बार जब कोई व्यक्ति खरीदता है तो दूसरा बेच रहा होता है और दोनों ही अपने को चतुर समझ रहे होते हैं।”
‘क्या आप नुकसान से डरते हैं या क्या आपने शेयरों में अपनी मेहनत की कमाई गँवाई है? या क्या आपको शेयर बाजार जोखिमपूर्ण लगता है? अगर हाँ, तो यह अध्याय आपकी आँखें खोल देनेवाला होगा।’
अकसर लोग शेयर बाजार को जुआघर में दाँव लगाने जैसा समझते हैं, जहाँ कुछ ही सेकंड में आपके सारे पैसे गँवाने की अत्यधिक संभावना होती है। लेकिन सौभाग्य से, शेयर बाजार में निवेश ऐसा नहीं है। आप शेयर बाजार में केवल तभी पैसा गँवाते हैं, जब आप धैर्यहीन ट्रेडर हों या जब आप में निवेश को लेकर नजरिए की कमी हो। चूँकि आपको कभी शेयर संबंधी बुनियादी तर्क सिखाए ही नहीं गए, इसलिए शेयर बाजार आज भी आपके लिए पहेली जैसा है।
यदि मैं अपने अनुभव की बात करूँ तो निवेश आसान है। जरा सोचिए, अगर इसमें कोई रॉकेट साइंस होती तो ऐसे लोग, जिनके पास कोई वित्तीय कौशल नहीं है, मात्र शेयरों में निवेश करके मल्टी-मिलेनियर कैसे बन गए? इसमें उच्च आई.क्यू. होना जरूरी है अथवा सफल निवेशकों की सूची में केवल गणितज्ञ और सांख्यिकीविद् ही होते हैं, ऐसा नहीं है।
निम्न उदाहरण में इसे ही दरशाया गया है—
क्या आप इस ग्राफ को डीकोड कर सकते हैं?
 
सेंसेक्स का एक वर्षीय प्रदर्शन दरशाता ग्राफ
‘इस ग्राफ की सबसे अच्छी बात है कि इसे डीकोड नहीं करना है।’
शेयर बाजार निवेश में सफलता की सबसे प्रसिद्ध वास्तविक कहानी वॉरेन बफे की है, जो धरती के सबसे समृद्ध लोगों में से हैं। उन्होंने अपनी लगभग सारी संपत्ति शेयर निवेश के मुनाफे से कमाई है। विडंबना है कि कोई वित्तीय गुरु न होने पर भी उन्होंने मल्टी-बिलियन संपत्ति जुटाने में इस धरती के सबसे अच्छे वित्त गुरुओं से भी बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे यह साफ तौर पर साबित हो जाता है कि शेयर बाजार से धन कमाने के लिए आपको गणितज्ञ या व्यापार विश्लेषक या एक दक्ष सांख्यिकीविद् होना जरूरी नहीं है।
अफसोस! शेयर निवेश की शुचिता को जुआरियों ने जुआघर जैसी छवि बनाकर खराब कर दिया था। सदियों तक लोग यही मानते रहे कि शेयरों में निवेश करना अपने धन को दाँव पर लगाने जैसा है। लेकिन सौभाग्य से ऐसा है नहीं। शेयर बाजार धन को कई गुना करने का सुनिश्चित तरीका है; बस, आपको इस खेल को इसके नियम जानते हुए खेलना है।
दुर्भाग्यवश, शेयर बाजार निवेश अभी भी हमारी शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन पाया है। बतौर छात्र, हमें कभी नहीं सिखाया जाता कि ‘शेयर बाजार में किस तरह निवेश करें?’ यहाँ तक कि बिजनेस स्कूलों में भी शेयर निवेश के बारे में कुछ नहीं सिखाया जाता। इस कारण लोग शेयरों में निवेश की बुनियादी बातों से भी अनजान हैं।
सूत्र : क्या आपको शेयर निवेश का काम दैत्य लगता है या आप इसे मित्र समझते हैं? आपकी रणनीति जिस तरह की होती है, शेयर बाजार भी वैसा ही व्यवहार करता है।
शेयर बाजार की जुआघर की छवि कैसे बनी?
 
1990 के दशक के पूर्व भारत के शेयर बाजार में सक्षम नियामक का अभाव था। उन दिनों कोई शक्तिशाली नियामक निकाय नहीं था, जो शेयर बाजार के सौदों का नियमन कर सके। इसके अतिरिक्त, शेयर ट्रेडिंग के नियमन हेतु केंद्रीय या डिजिटल व्यवस्था भी नहीं थी। इसकी कल्पना ऐसे की जा सकती है कि आर.बी.आई. जैसे किसी केंद्रीय नियामक निकाय के बिना बैंक कार्य कर रहे हों। इसलिए शक्तिशाली शेयर बाजार भागीदार अपने निजी हितों की पूर्ति के लिए शेयर बाजार में हेर-फेर करते और इस पर हावी रहते।
पुराने समय में शेयर बाजार किस तरह काम करता था?
पुराने दिनों में शेयरों के भाव बोली लगने के आधार पर तय होते थे। अतः प्रभावी व्यवस्था न होने से अनेक अनुचित स्पेक्युलेशन हो जाते थे, जिससे भीतर के लोगों को भारी मुनाफा कमाने में मदद मिलती। सबसे बढ़कर ऐसी कोई तकनीक नहीं थी, जिससे बाजार की खबरों की पुष्टि हो सके। इसलिए हर खबर से वह सच हो या झूठ, शेयरों के भाव अस्थिर हो जाते।
लेकिन समय के साथ इससे शेयर निवेश की छवि खराब होने लगी। धन कमाने की तलाश में गरीब निवेशक फँस जाते और अंततः अपनी सारी मेहनत की कमाई गँवा बैठते। ऐसी घटनाओं से शेयर बाजार की नकारात्मक छवि बन गई, जो कई दशकों बाद आज भी प्रमुखता से बनी हुई है।
जैसाकि कहते हैं, ‘दूध से जली बिल्ली छाछ भी फूँककर पीती है।’ अतः इससे साफ हो जाता है कि आखिर क्यों आज भी ज्यादातर लोग शेयरों में निवेश करने से डरते हैं।
शेयर निवेश के मौजूदा हालात
2 अप्रैल, 1992 को ‘द सिक्योरिटीज ऐंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया’ (SEBI) नामक नियामक बोर्ड का गठन किया गया। भारत में शेयरों का केंद्रीय नियंत्रक सेबी (SEBI), बतौर कानून नियामक शेयर विक्रेताओं और निवेशकों के लिए आशीर्वाद साबित हुआ, जो सभी निवेशकों के हित में काम करने लगा।
सेबी (SEBI) ने गठन के फौरन बाद अनुचित शेयर ट्रेडिंग कार्यों पर रोक लगा दी। यह निवेश कार्य को सरल बनाने में सुरक्षात्मक भूमिका निभाने लगा। जल्दी ही एक स्टॉक एक्सचेंज का गठन हुआ, जिसे ‘नेशनल स्टॉक एक्सचेंज’ (NSE) कहा गया, जिससे शेयरों के सौदे का कार्य पारदर्शी और लोकतांत्रिक हो।
कानूनी ढाँचे के भीतर इन कठोर नियामक इकाइयों के परिचालन से शेयर बाजार में पुनः साफ-सुथरी और विश्वसनीय ट्रेडिंग होने लगी। हालाँकि थोड़े हेर-फेर की संभावना आज भी मौजूद है, जिससे वैध साधनों द्वारा बड़ी मात्रा में धन कमाने की गुंजाइश है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि शेयर बाजार तब सुरक्षित है, जब यहाँ व्यापार में निवेश की उचित मंशा से निवेश किया जाए, बजाय इसके कि थोड़े मुनाफे के लिए जुआ खेला जाए।
यह कहना गलत नहीं होगा कि शेयर बाजार ‘शीशे’ जैसा है। यह आपको वैसा ही दिखाता है, जैसे आप हैं। अतः धन निवेश के बारे में अपनी सोच को काबू रखें, क्योंकि यही है, जो आपके शेयर ट्रेडिंग में प्रतिबिंबित होगा।
5.
शेयर बाजार को प्रभावित करनेवाले कारक
शेयर मार्केट में कितना बदलाव होता है? इतना कि जब भी आप बहुत से उतार-चढ़ावों वाला ग्राफ देखते हैं, आपको वह शेयर बाजार को दरशाता लगता है।
 
क्या आपने कभी सोचा है कि ‘शेयर के भाव क्यों बदलते हैं?’
शेयर बाजार वह स्थान है, जहाँ आपको रोजाना एक नया ट्रेंड दिखाई देता है। शेयर के भाव इतने ज्यादा बदलते हैं कि इसमें भाव-विविधता न केवल प्रतिदिन, बल्कि हर मिनट और हर सेकंड दिखाई देती है।
लेकिन शेयर बाजार में इतना बदलाव क्यों होता है? शेयर बाजार में अस्थिरता का कारण विविध किस्म की बाजार प्रभावी ताकतें होती हैं, जो निम्नलिखित हैं—
 
 आर्थिक कारक : उच्च आर्थिक विकास या विकास की बेहतर संभावनाओं से अर्थव्यवस्था में उपभोग बढ़ जाता है। जब लोग उपभोग ज्यादा करने लगते हैं तो उनका खर्च भी बढ़ता है। बाजार में धन का प्रवाह बढ़ता है। इससे कंपनियों की आय को और इस कारण उनके शेयरों के भाव या व्यापक मायनों में शेयर बाजार को बढ़ने में मदद मिलती है। निवेशक शेयर बाजार में निवेश के लिए प्रोत्साहित होते हैं। इसके विपरीत, जब अर्थव्यवस्था में गिरावट होती है तो इसके निवेशकों पर विपरीत प्रभाव होते हैं। निवेशकों में खर्च कम करने की प्रवृत्ति आती है और वे केवल जरूरी चीजों पर ही खर्च करते हैं। वे शेयर बाजार से भी अपना पैसा निकाल लेते हैं।
 भू-राजनीतिक कारक : युद्ध, आतंकवाद और राजनीतिक उथल-पुथल जैसे प्रतिकूल हालात का पूरे व्यापार परिदृश्य पर नकारात्मक प्रभाव होता है। निवेशक और ट्रेडर्स ऐसे प्रतिकूल हालात में शेयरों में निवेश करने से बचते हैं।
 एफ.आई.आई. : फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (विदेशी संस्थागत निवेशक) का मतलब वे विदेशी कंपनियाँ हैं, जो भारतीय व्यापारों में निवेश करती हैं। एफ.आई.आई. (FIIs) को चीन, भारत और ब्राजील जैसी विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं में शानदार निवेश अवसर दिखते हैं। वे भारतीय बाजारों की किसी भी वक्त बेचने या खरीदने की विशिष्ट शक्ति के कारण बड़ी मात्रा में धन निवेश को प्राथमिकता देते हैं। जब भी एफ.आई.आई. भारतीय बाजारों से अपना निवेश समेटती है तो इसका शेयर बाजार पर बुरा प्रभाव होता है।
 मुद्रास्फीति : बढ़ती मुद्रास्फीति से बचने के लिए लोगों को शेयर बाजार में अधिक-से-अधिक निवेश करना चाहिए, क्योंकि ऐसा और कोई वित्तीय साधन नहीं है, जो शेयर बाजार जितना उच्च रिटर्न देता हो। क्रय शक्ति कम होने पर, जमीन खरीदने या घर में निवेश करने जैसे अन्य सभी ज्यादा महँगे हो जाते हैं।
 
 विदेशी विनिमय दर : जब भी विदेशी मुद्रा दर में अस्थिरता आती है, इससे हमारे घरेलू शेयर बाजार भी प्रभावित होता है। इसका प्रभाव उन भारतीय कंपनियों के शेयरों के भाव पर भी होता है, जो विदेश में भी काम करती हैं। आयात और निर्यात करनेवाली कंपनियों के परिचालन और उनके शेयरों के भाव इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। जैसेकि रुपए का अवमूल्यन होने पर विदेश में भी काम करनेवाली कंपनियों (उदाहरण—आई.टी. फार्मा) पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा।
 माँग व आपूर्ति : जब किसी उद्योग में तरक्की होती है तो उस उद्योग की संभावनाशील कंपनियों के शेयरों की माँग भी बढ़ जाती है। जब माँग बढ़ती है तो शेयरों के भाव भी बढ़ते हैं और विपरीत होने पर उलटा होता है।
 निवेशक भावनाएँ : शेयर बाजार अनिवार्य रूप से निवेशकों की भावनाओं से संचालित होता है। अगर निवेशक जोखिम लेने को तैयार हों तो उनमें अधिक निवेश की प्रवृत्ति होती है और विपरीत होने पर उलटा होता है।
 ब्याज दर संभावना : जब भी आर.बी.आई. की ब्याज दरें बढ़ती हैं, व्यापार में उधार की लागत बढ़ जाती है। उनका मुनाफा घटता है, जिससे शेयरों के भाव भी गिरते हैं; क्योंकि अब आगामी विस्तार एवं भावी संभावनाओं की पूर्ति के लिए पूँजी-उपलब्धता कम होगी। कम डिविडेंड वितरित होगा। जब ये ब्याज दरें घटती हैं तो उद्योगों को लाभ होता है, जिससे उनके शेयरों के भाव बढ़ते हैं।
हालाँकि यह प्रभाव कम अवधि के लिए होता है। भारत जैसे देश में ब्याज दर में बदलाव काफी अहम होते हैं, क्योंकि इनसे कंपनियाँ ऐसा अतिरिक्त धन बनाती हैं, जिससे उनके दिन-प्रतिदिन के परिचालन पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
 ट्रेड बैलेंस : ट्रेड बैलेंस देश में आयात और निर्यात के बीच का अंतर दरशाता है। अगर आयात निर्यात से ज्यादा हो तो इसे ‘ट्रेड डेफिसिट’ कहते हैं। अगर लंबे समय तक आयात अधिक रहे तो इससे देश पर कर्ज हो सकता है। अतः ट्रेड डेफिसिट का अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अगर निर्यात आयात से अधिक हो तो इसे ‘ट्रेड सरप्लस’ कहा जाता है। ट्रेड सरप्लस अर्थव्यवस्था की स्वस्थ स्थिति को दरशाता है और इसका शेयर बाजार पर सकारात्मक प्रभाव होता है।
सार रूप में, ये शेयर बाजार निवेश को प्रभावित करनेवाले प्रमुख कारक हैं। उपर्युक्त कारणों से यह भी स्पष्ट हो जाता है कि शेयर बाजार हर समय अस्थिर क्यों रहते हैं। फिर भी, शेयर बाजार देश की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करते हैं।
शेयर बाजार का देश की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
 संपत्ति पर प्रभाव : अगर शेयरों के भाव गिर रहे हों तो इससे क्रेता शेयर खरीदने में और अधिक धन निवेश करने के लिए हतोत्साहित होते हैं। लोग सामान व उत्पाद खरीदने में भी कम खर्च करते हैं, जिससे देश की जी.डी.पी. नीचे आने लगती है, क्योंकि उपभोग व्यय देश की जी.डी.पी. का एक प्रमुख कारक है। इसके साथ ही शेयर बाजार भी और नीचे जाने लगता है, जिसका देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और विपरीत अवस्था में उलटा होता है।
 पेंशन का प्रभाव : आम धारणा की मानें तो पेंशन फंड आमतौर पर शेयर बाजार निवेश से संबंधित होते हैं। मान लीजिए, निवेश धन में भारी हानि हुई तो सरकार के पेंशन फंड को अपने सेवानिवृत्त नागरिकों को नियमित रूप से धन चुकाने के वादे को कायम रखने के लिए संघर्ष करना होगा।
6.
मुद्रा अस्थिरता का देश की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव?
 
निश्चित ही पड़ता है। हम जानते हैं कि मुद्रा की अस्थिरता से देश का शेयर बाजार सीधा प्रभावित होता है। सभी नए निवेशकों के दिमाग में एक सवाल हमेशा उमड़ता होगा कि ‘मुद्रा में हर वक्त बदलाव क्यों होते हैं?’ वैसे, यह एक सबसे वैध सवाल है, जो उन नई शुरुआत करनेवालों के मन में आता है, जो पहली बार शेयरों में निवेश कर रहे हैं। जैसाकि आपने देखा होगा कि कुछ मुद्राएँ निरंतर हर वक्त शीर्ष पर बनी रहती हैं, जबकि कुछ लगातार गिरती रहती हैं। इन मुद्राओं में अस्थिरता के क्या कारण हैं?
मुद्रा में अस्थिरता का एकमात्र सहज कारण धन की माँग और पूर्ति की विविधता है। देश की अर्थव्यवस्था में घूम रही घरेलू मुद्रा का परिमाण मुख्य रूप से देश के आयात-निर्यात मूल्यों से संचालित होता है। जब आप निर्यात या आयात कर रहे होते हैं तो भारतीय मुद्रा या तो देश से बाहर जाती है या आती है। अगर निर्यात की दर आयात से अधिक हो तो इसका मतलब विदेशी मुद्रा में अधिक आय अर्जित होना हुआ। वहीं इसका मतलब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मुद्रा का कम होना हुआ, जिसके परिणामस्वरूप हमें मुद्रा की विनिमय दर बढ़ती हुई दिखाई देती है।
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