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हर भारतीय के लिए निवेश के सरल उपाय / Har Bhartiya Ke Liye Nivesh Ke Saral Upay PDF Download Free by Vinod Pottayil

What Every Indian Should Know Before Investing Hindi Book PDF Download Free

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

नाम / Name 📥हर भारतीय के लिए निवेश के सरल उपाय / Har Bhartiya Ke Liye Nivesh Ke Saral Upaya
लेखक / Author 🖊️
आकार / Size 15.7 MB
कुल पृष्ठ / Pages 📖321
Last UpdatedApril 16, 2022
भाषा / Language Hindi
श्रेणी / Category

निवेश सम्बंधी अपने सभी प्रश्नों के जवाब पाएं!
• मैं सुनार के पास बार - बार जाए बिना सोने मैं निवेश कैसे कर सकता हूँ ?म्यूचुअल फंड कितने प्रकार के होते हैं, जिनमें मैं निवेश कर सकता हूँ?
• मुझे जीवन बीमा को ख़र्च मानना चाहिए या निवेश?
• शेयर बाज़ार कैसे काम करता है?
• क्या मैं 15 साल बाद भी पीपीएफ़ में निवेश कर सकता हूँ ?
• क्या एम्पलॉई प्रॉविडेंट स्कीम से पैसा निकालते समय करमुक्त होता है?
• रियल एस्टेट में निवेश करके मुनाफ़ा कमाने के कौन से तरीक़े हैं?
• क्या मुझे स्वास्थ्य बीमे की सचमुच ज़रुरत है? अगर हाँ, तो मेरे पास कितनी राशि का बीमा होना चाहिए?
• कैशलेस हेल्थ इनश्योरेंस क्या होता है? स्वास्थ्य बीमे में टॉप अप और सुपर टॉप अप का क्या मतलब होता है?
• वसीयत क्या है और क्या मुझे भी वसीयत लिखनी चाहिए?
• मैं संख्याओं और हिसाब-किताब में माहिर नहीं हूँ? क्या कोई आसान तरीक़ा है, जिससे मैं अपने निवेशों के भावी मूल्य का पता लगा सकता हूँ?

यह पुस्तक बताती है कि बाज़ार मैं उपलब्ध निवेश के सबसे लोकप्रिय विकल्प कैसे काम करते हैं| अप जो ज्ञान हासिल करेंगे, उससे न सिर्फ अप अपने निवेशों का बेहतर प्रबंधन कर पाएँगे, बल्कि इससे आपको स्वयं ही निवेश के संसार कि पड़ताल करने का आत्मविश्वास भी मिलेगा| यह पुस्तक सभी उम्र के लोगों के लिए एक उपयोगी साधन होगी, जो अपने वित्तीय जीवन की बागडोर अपने हाथों मैं थामना चाहते हैं|

पुस्तक का कुछ अंश

प्रस्तावना

मैंने कभी ऐसी पुस्तक लिखने की योजना नहीं बनाई थी। इसका विचार तो मेरे मन में तब आया, जब मैंने अपनी बहन के साथ कई असफल चर्चाएँ कीं, जिसने उसी समय अपना करियर शुरू किया था और वह निवेश के बारे में जानना चाहती थी। मैं उसका बड़ा भाई था, पहले से ही रोज़गार में था और कई सालों से निवेश कर रहा था। इसलिए उसका यह मानना स्वाभाविक था कि मुझे इस बारे में सब कुछ मालूम होगा। मेरी तरफ़ से मुझे विश्वास था कि मैं उसके सारे सवालों के जवाब दे सकता हूँ और निवेश के मार्ग पर आगे बढ़ने में उसकी मदद कर सकता हूँ।
लेकिन तभी वास्तविकता से मेरा सामना हुआ। जब मैंने उसके सवालों के जवाब देने की कोशिश की और यह समझाने की कोशिश की कि निवेश कैसे काम करते हैं, तो मेरे सामने यह स्पष्ट हो गया कि मैं ख़ुद को जितना जानकार समझता था, उतना था नहीं। हर प्रश्न नए प्रश्नों की ओर ले गया और कई मामलों में मुझे जानकारी पाने के लिए विभिन्न संसाधनों की जाँच करनी पड़ी। कई बार जानकारी आसानी से उपलब्ध नहीं थी या फिर इस तरह से उपलब्ध थी कि मुझे इसका पूरा मतलब समझने के लिए कई दिन की मेहनत करनी पड़ती थी। मैंने कोई एक स्रोत - एक पुस्तक या वेबसाइट - खोजने की कोशिश की, जो वह हर चीज़ समझा सके, जो मुझे निवेश के बारे में जानने की ज़रूरत थी, ताकि मैं संदर्भ के रूप में इसका इस्तेमाल कर सकूँ। लेकिन मेरी पूरी कोशिश के बावजूद मुझे एक भी ऐसी चीज़ नहीं मिली, जो इतनी सरल हो कि हम दोनों में से कोई भी समझ सके।
फिर मदद के लिए मैं अपने कुछ मित्रों और सहकर्मियों की ओर मुड़ा। उनसे बात करने पर मुझे अहसास हुआ कि उनमें से ज़्यादातर का हाल भी मेरे ही जैसा था। बाज़ार में उपलब्ध विभिन्न योजनाओं के बारे में बड़ी तसवीर और जानकारी को भूल जाएँ - उनमें से कई को तो उन योजनाओं के बारे में भी ज़्यादा जानकारी नहीं थी, जिनमें उन्होंने निवेश किया था… मैंने लोगों से जितनी ज़्यादा बातचीत की, मेरे सामने यह उतना ही ज़्यादा स्पष्ट हो गया कि हममें से ज़्यादातर निवेश संबंधी निर्णय तो ले रहे थे, लेकिन हमें इस बात की पूरी जानकारी नहीं थी कि हम किसमें निवेश कर रहे हैं। इससे भी ज़्यादा हैरान करने वाली बात यह थी कि लगभग हर व्यक्ति अपने वित्त संबंधी अज्ञान को जीवन के अवश्यंभावी हिस्से के रूप में स्वीकार कर रहा था। कोई भी सदमे में या हैरानी में नहीं दिखा, जब मैंने बताया कि ज्ञान की इस कमी का हमारे भविष्य और दीर्घकालीन वित्तीय सुरक्षा पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। आम अनुभूति यह थी कि हमें अपने पैसे का प्रबंधन करने वाली संस्थाओं पर भरोसा करना चाहिए और अंततः हर चीज़ सही हो जाएगी। यह एक अविश्वसनीय स्थिति थी, लेकिन मुझे स्वीकार करना होगा कि मैं भी इसी तरह की मानसिकता से निवेश कर रहा था, जब तक कि मैंने निवेश संबंधी अपनी बुनियादी समझ पर सवाल नहीं किए।

मेरी उत्सुकता की बदौलत मैंने पूरे परिदृश्य की जाँच की और मुझे अहसास हुआ कि समस्या मेरी जान-पहचान के लोगों तक ही सीमित नहीं थी; यह तो सर्वव्यापी थी। पूरे संसार में किए गए अध्ययनों और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार संसार के करोड़ों लोग वित्त के संसार की पड़ताल करने में असहज थे और वे समय के साथ जाँचे-परखे विकल्पों में निवेश करके ही संतुष्ट रहते थे। लोग जिस तरह निवेश करते थे, उस पर सवाल करने या उसे बदलने के लिए लोग अमूमन अपने आरामदेह दायरे से बाहर क़दम नहीं रखते थे। पूरे संसार की हज़ारों केस स्टडीज़ यह बता रही थीं कि निवेश संबंधी ख़राब निर्णय लेने या वित्त का सही नियोजन न करने की वजह से लोगों के जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा था। ग़लतियाँ करने के साथ ही लोग अद्भुत निवेश अवसरों को सिर्फ़ इसलिए चूक रहे थे, क्योंकि वे वित्तीय दृष्टि से जागरूक या अद्यतन नहीं थे। जिन लोगों ने पहले इन विकल्पों की कभी पड़ताल नहीं की, वे लाभदायक निवेश अवसर को चूकने के लिए अपनी तक़दीर को कोस रहे थे; चाहे यह शेयर बाज़ार हो या रियल एस्टेट या सोना हो। उनमें से कुछ तो स्थिति का लाभ लेने के लिए जल्दबाज़ी में निवेश करते थे, जो अक्सर विभिन्न स्रोतों से मिली टिप्स के आधार पर किया जाता था। इस प्रक्रिया में वे अपनी मेहनत से कमाए पैसे का नुक़सान कर बैठते थे। जो लोग वित्तीय सलाहकारों या रिलेशनशिप मैनेजरों तक पहुँच रखते थे, उन्हें भी निवेश परिदृश्य और प्रॉडक्ट्स संबंधी नवीनतम जानकारी नहीं थी। कई लोग तो इन विशेषज्ञों द्वारा बताई नीति पर ख़ुशी-ख़ुशी चलते थे, जिसके कई बार अप्रिय परिणाम मिलते थे!
वित्तीय दृष्टि से साक्षर बनने की आवश्यकता
आप पूछ सकते हैं कि क्या वित्तीय ज्ञान का अभाव हमारी कई समस्याओं में से सिर्फ़ एक समस्या ही नहीं है? और जीवन में इतनी सारी दूसरी चीज़ों की तरह क्या हम अंततः अपने वित्त का प्रबंधन करना नहीं सीख पाएँगे?
दुर्भाग्य से दोनों ही बातों का जवाब ‘नहीं’ है।
चारों ओर देखें! आप ग़ौर करेंगे कि बढ़ती क़ीमतों की वजह से हर साल धन का मूल्य कम होता जा रहा है। मकान ख़रीदने, अस्पताल में भर्ती होने, संतान की शिक्षा की फ़ीस भरने आदि की ख़र्च पर ग़ौर करें और आपको अहसास हो जाएगा कि अगर हम अपने पैसे का समझदारी से प्रबंधन नहीं करते हैं, तो हमारे जीवन भर की बचत किस तरह ग़ायब हो सकती है। और यह सिर्फ़ बढ़ती क़ीमतें ही नहीं हैं - हम नौकरी छूटने, किसी पारिवारिक सदस्य की गंभीर बीमारी, करियर को जोखिम में डालने वाली दुर्घटना, और यहाँ तक कि मृत्यु जैसी अप्रत्याशित स्थितियों की भी जिस तरह योजना बनाते हैं, उसी से यह तय होता है कि हमारे परिवार वित्तीय दृष्टि से परेशान हुए बिना ऐसी घटनाओं को कैसे झेल सकते हैं।

अगर हम अपने निवेशों की योजना बनाने को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और यह मान लेते हैं कि पैसा अपनी परवाह ख़ुद कर लेगा, तो इसमें कोई हैरानी नहीं कि अगर हमारी आमदनी प्रभावित हो जाती है या अगर अर्थव्यवस्था की गति सुस्त हो जाती है, तो हम ख़ुद को वित्तीय मुश्किलों में पाएँगे।
यह पुस्तक कैसे मदद करेगी?
यह पुस्तक निवेश और निवेश विकल्पों को सबसे सरल तरीक़े से समझाने की कोशिश करती है। जैसा पहले ही ज़िक्र किया जा चुका है, मैंने यह पुस्तक अपनी बहन को निवेश संबंधी बातें सिखाने के लिए लिखनी शुरू की थी। इसलिए इस पुस्तक की हर पंक्ति को लिखते समय शुरुआती व्यक्ति की मानसिकता को ध्यान में रखा गया है। इस पुस्तक का उद्देश्य आपको ज्ञानी निवेशक बनाना है: एक ऐसा व्यक्ति, जो इस बारे में जागरूक हो कि वह निवेश से क्या हासिल करना चाहता है और यह भी जानता हो कि इसे असली ज़िंदगी में कैसे हासिल करना है।
यह पुस्तक आपको बड़ी तसवीर भी बताएगी और छोटी बारीकियाँ भी। ये दोनों ही निर्णय लेने में आपके लिए महत्त्वपूर्ण हैं। बड़ी तसवीर यह समझने में आपकी मदद करेगी कि निवेश किस बारे में है और आपको अपने जीवन की अवस्था को ध्यान में रखते हुए कैसे निवेश करना चाहिए। छोटी बारीकियाँ आपको अपनी योजना पर अमल करने के साधन और योग्यताएँ सिखाएँगी। शेयर और रियल एस्टेट जैसी कुछ अवधारणाएँ वाक़ई जटिल हैं और उनमें माहिर बनने व उनसे लाभ लेने के लिए सीखने के समर्पण की ज़रूरत है। इसलिए इस पुस्तक में ऐसे निवेश विकल्पों की बस इतनी सीमित व्याख्या की गई है, ताकि आपको ज़्यादा व्यापक अवधारणाओं की जानकारी मिल जाए और आपको यह समझ आ जाए कि शेयर बाज़ार या रियल एस्टेट में बेहतर निवेशक बनने के लिए आपको क्या करना चाहिए। इस तरह ये अध्याय वह बुनियाद बनाते हैं, जिन पर आप बाद में इन निवेश विकल्पों के बारे में ज्ञान की इमारत खड़ी कर सकते हैं, अगर आपको महसूस होता है कि आप इनमें निवेश करना चाहते हैं।
यह पुस्तक यह मानकर नहीं चलती है कि आप निवेश की बुनियादी बातें पहले से ही जानते हैं, जिनमें निवेश की शब्दावली, करारोपण के नियम, फ़ॉर्मूले आदि शामिल हैं। अगर आप बुनियादी गणित जानते हैं, थोड़े पैसे सँभालते हैं और बैंक अकाउंट चलाना जानते हैं, तो आपके पास इस पुस्तक से सीखने लायक़ पर्याप्त ज्ञान है।

यह पुस्तक कैसे पढ़ें?
मेरी सलाह है कि आप इस पुस्तक को शुरू से आख़िर तक पूरी पढ़ जाएँ, भले ही कुछ विकल्पों में आपकी रुचि न हो या आपकी वर्तमान वित्तीय स्थिति के कारण वे आपको अप्रासंगिक लग रहे हों। ऐसा इसलिए, क्योंकि जब आप किसी निवेश विकल्प के बारे स्पष्टता से समझ लेंगे, तभी आपको अंतिम निर्णय लेना चाहिए। अगर आप पहले से सोची धारणाओं या पिछले अनुभवों की वजह से निवेश के किसी विकल्प को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, तो उस विकल्प के बारे में पढ़ने से आपको यह तय करने में मदद मिलेगी कि आप इसके बारे में सही थे या नहीं। मिसाल के तौर पर, आप सोच सकते हैं कि शेयर बहुत जोखिम भरे होते हैं या म्युचुअल फ़ंड बहुत जटिल होते हैं या पीपीएफ़ बहुत धीमा और नीरस होता है - लेकिन हो सकता है कि इन निवेश विकल्पों को ज़्यादा अच्छी तरह समझने के बाद आपकी धारणा बदल जाए। जब आप हर निवेश विकल्प के बारे में पढ़ लें और उसे समझ लें, तो आप निवेश संबंधी कोई भी निर्णय लेते समय आप इस पुस्तक का इस्तेमाल एक सरल संदर्भ के रूप में कर सकते हैं। बहरहाल, यह ध्यान रखें कि निवेश संबंधी विकल्पों की राशियाँ और आयकर के नियम बदलते रहते हैं, इसलिए अंतिम निर्णय लेने से पहले हर विवरण की पुष्टि अवश्य कर लें। बहुत से ऑनलाइन संसाधन मौजूद हैं, जो आपको नवीनतम जानकारी दे देंगे। चूँकि यह पुस्तक आपको बताती है कि किस चीज़ की तलाश करनी है, इसलिए आपका काम ज़्यादा आसान हो जाता है।
आपको इस पुस्तक को ज्ञानी निवेशक बनने की सीढ़ी मानना चाहिए। ज्ञानी निवेशक बनने के बहुत से लाभ हैं: आप न सिर्फ़ अपने निवेशों को ज़्यादा अच्छी तरह समझ पाएँगे और उनका बेहतर प्रबंधन कर पाएँगे, बल्कि आपको अपने दम पर निवेश करने का आत्मविश्वास भी मिलेगा। इसके अलावा आप अपने पैसों का प्रबंधन करने वाली वित्तीय संस्थाओं, परामर्शदाताओं, एजेंटों आदि से ज़्यादा प्रभावी ढंग से संवाद कर पाएँगे। ज्ञानी निवेशक के रूप में आप अपने परिवार के दूसरे सदस्यों - ख़ास तौर पर बच्चों - को निवेश का बुनियादी ज्ञान दे पाएँगे, जो बहुत महत्त्वपूर्ण पहलू है, लेकिन ज़्यादातर भारतीय घरों में इसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
दूसरे कारणों से भी आपको वित्तीय दृष्टि से जागरूक बनना चाहिए। भविष्य में निवेश प्रॉडक्ट ज़्यादा आधुनिक बनेंगे (और ज़्यादा जटिल भी), उनकी मार्केटिंग ज़्यादा आक्रामक हो सकती है और आपके वित्त के प्रबंधन में प्रौद्योगिकी अहम भूमिका निभाएगी… ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर मोबाइल वॉलेट से लेकर बैंकिंग व निवेश के संसार में होने वाले तीव्र विकास - ये परिवर्तन इसी समय हो रहे हैं और जब तक आपको बुनियादी बातों का ज्ञान नहीं होगा, तब तक आप उन्हें बिलकुल भी नहीं समझ पाएँगे। इससे आपके निवेशों और आपके वित्तीय जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होगी। अगर आप वित्तीय दृष्टि से जागरूक हैं, तो आप अपने हितों की रक्षा करने और इन विकासों से लाभ उठाने की ज़्यादा बेहतर स्थिति में होंगे। इस पुस्तक से आप जो ज्ञान हासिल करते हैं, वह पैसों का ज़्यादा कुशलता से प्रबंधन करने और सीखने की बुनियाद साबित होगा।

ong>फ़ीडबैक
यहाँ मैं बताना चाहता हूँ कि मैं पंजीकृत निवेश परामर्शदाता नहीं हूँ और यह पुस्तक निवेश रणनीतियों या कर नियोजन के बारे में नहीं है। इस पुस्तक की भूमिका बस इतनी है कि निवेश और निवेश विकल्पों की दुविधा व भारी-भरकम जानकारी को साफ़ करके आपको ज़्यादा जागरूक निवेशक बना दे। यह उन छोटे लेकिन बुनियादी प्रश्नों का जवाब देगी, जिनसे आपको निवेश के विभिन्न विकल्पों के बारे में निर्णय लेने में मदद मिलेगी। इस पुस्तक को पढ़ने का यह मतलब नहीं है कि आप अपने दम पर निवेशों का प्रबंधन कर सकते हैं या आपको किसी अच्छे निवेश सलाहकार या कर परामर्शदाता की आवश्यकता नहीं है। इसके विपरीत, इससे आपको यह ज्ञान मिलेगा कि आप सक्रियता से अपने निवेश करें और अपने निवेश बढ़ाने के लिए बाज़ार में उपलब्ध सबसे अच्छे संसाधनों की तलाश करें, ताकि आपको होने वाला मुनाफ़ा बढ़े। निवेश सेवाओं का समुद्र मौजूद है - ऑनलाइन भी और ऑफ़लाइन भी - निजी भी और शासकीय भी - जो ज़्यादा ज्ञानी निवेशक बनने पर आपके लिए सुलभ हो जाते हैं। मुझे सच्ची आशा है कि यह पुस्तक सभी उम्र के लोगों के लिए उपयोगी होगी, जो अपने वित्तीय जीवन की बागडोर अपने हाथ में लेना चाहते हैं।
इस पुस्तक को पढ़ने के बाद अगर आप कोई सुझाव या फ़ीडबैक देना चाहें, तो कृपया vinod@everyindian.co.in पर भेज दें। मैं आपको यह भी याद दिलाना चाहूँगा कि हालाँकि मेरे संपादकों, अनुवादक और मैंने तथ्यों व आँकड़ों के बारे में पूरी सावधानी बरती है, लेकिन फिर भी अगर आपको किसी भी तरह की ग़लती, चूक या असंगति दिखे, तो जानकारी अवश्य दें, ताकि आगामी संस्करणों में उसे सुधारा जा सके। अंत में, निवेश के विकल्प समय-समय पर बदलते रहते हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले नवीनतम तथ्यों और आँकड़ों की पुष्टि अवश्य कर लें।
आपको समृद्ध तथा सुखी जीवन की शुभकामनाएँ!

लेखक के बारे में
विनोद पोट्टाइल के पास प्रकाशन और सॉफ़्टवेयर उद्योगों में 20 वर्ष से ज़्यादा का अनुभव है। अपने लंबे कार्यकाल में वे बहुत से ऑफ़लाइन और ऑनलाइन प्रोजेक्टों में शामिल रहे हैं, जिनमें उपभोक्ता व्यवहार, उपभोक्ता की सीखने की वरीयताएँ और डिज़ाइन मेथडोलॉजी की समझ की आवश्यकता होती है। उन्होंने सौभाग्य एडवर्टाइज़िंग, इंडियन एक्सप्रेस, आप्टेक, आईएलऐंडएफ़एस, नेटकोर सॉल्यूशन्स और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ सिक्युरिटीज़ मार्केट्स जैसे संगठनों के साथ काम किया है और परामर्श दिया है।
विनोद उन विचारों और प्रयासों को लेकर जोशीले हैं, जो आम भारतवासी के जीवन पर सकारात्मक फ़र्क़ डाल सकें, जिनकी चिंताएँ और आशाएँ ख़ुद उनसे मेल खाती हैं। वे प्रखरता से मोबाइल प्रोद्यौगिकी, पर्यावरणीय रूपरेखा और शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले विकास पर पैनी नज़र रखते हैं, क्योंकि उन्हें महसूस होता है कि उनमें समाज पर सबसे ज़्यादा फ़र्क़ डालने की क्षमता है। मूलतः केरल के विनोद ख़ुद को असली मुंबईकर मानते हैं और अपने परिवार के साथ मुंबई में रहते हैं।

आभार
यह पुस्तक संभव नहीं थी, अगर मेरे सबसे नज़दीकी लोगों ने मुझ पर विश्वास नहीं किया होता और इसे लिखने की प्रक्रिया में मुझे सहयोग नहीं दिया होता।
यह पुस्तक अधूरी रहती, अगर कई सहयोगी लोगों ने मुझे समर्थन और प्रोत्साहन न दिया होता, जिनसे मैं इसे लिखते समय मिला: एसआईईएससीओएमएस के मेरे प्रोफ़ेसर, विभिन्न वित्तीय संस्थाओं का शिक्षण स्टाफ़, विभिन्न बैंकों और पोस्ट ऑफ़िसों का स्टाफ़ और कुछ अग्रणी वित्तीय संस्थाओं के वरिष्ठ प्रबंधक।
एसआईईएससीओएमएस के प्रो. सुब्रमण्यम को हृदय से धन्यवाद, जिन्होंने मेरे काम में उत्साहपूर्ण विश्वास दिखाया। उनकी समय-समय पर मिली सलाहें और संदर्भ मेरे रास्ते में आने वाले कई अवरोधों से उबरने में अमूल्य साबित हुए। उनकी सहायता और मार्गदर्शन के बिना मेरी यात्रा निस्संदेह ज़्यादा लंबी होती!
मैं इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ कैपिटल मार्केट्स (आईआईसीएम) की डॉ. रचना वैद और डॉ. एम.टी. राजू के प्रति आभारी हूँ, जिन्होंने मूल्यवान जानकारी और सलाह देने के लिए अपनी व्यस्त दिनचर्या में से समय निकाला। भूमिका लिखने के लिए डॉ. राजू को विशेष धन्यवाद।
मैं आरबीआई की चीफ़ जनरल मैनेजर मिस अल्पना किलावाला के प्रति भी अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना चाहूँगा, जिन्होंने मुझे अपना समय, जानकारी और नैतिक समर्थन दिया। आईसीएफ़एआई की मिस लक्ष्मी मोहन और प्रोफ़ेसर शरद को भी बहुत-बहुत धन्यवाद, जिन्होंने इस पुस्तक को हरी झंडी दी। एसआईईएससीओएमएस में वित्तीय प्रबंधन की प्रोफ़ेसर मिस स्वाति गोडबोले को मेरा दिली धन्यवाद, जिन्होंने मेरी पुस्तक की समीक्षा की और बताया कि इसमें कहाँ-कहाँ बेहतरी की गुंजाइश है।
बैंकिंग और निवेश उद्योग के कई लोगों ने अध्यायों की समीक्षा करने, राय देने और पुस्तक पर बातचीत करने में अपना समय दिया, लेकिन वे सार्वजनिक कृतज्ञता नहीं चाहते। मैं अज्ञात रहने की उनकी आवश्यकता का सम्मान करता हूँ, लेकिन इसके बावजूद यहाँ अपना आभार व्यक्त किए बिना नहीं रह सकता। उन सभी के प्रति आभार: इतने अच्छे होने के लिए आपको धन्यवाद!

यह पुस्तक मेरे नए-पुराने मित्रों की मदद से ही इस रूप में आई है, जिन्होंने ज़रूरत के समय अपना मूल्यवान ज्ञान और योग्यताएँ प्रदान कीं। शैरॉन और हस्मिता चंदर, जिन्होंने इस पुस्तक में इतना ज़्यादा योगदान दिया, जितना मैं माँग भी नहीं सकता था; उनकी संपादन योग्यताओं ने इस पुस्तक को बहुत ज़्यादा पठनीय बना दिया है। सीए दीपक लाला को विशेष धन्यवाद, जिन्होंने विभिन्न तकनीकी मसलों पर स्पष्टीकरण दिए। और मेरे व्यक्तिगत निवेश परामर्शदाता श्री चेतन भाटिया को भी धन्यवाद, जिन्होंने मेरे हिसाब से जटिल लगने वाले अध्यायों को पढ़ा और उन्हें सरल बनाने के लिए राय दी। गोपाल गिडवानी को गर्मजोशी भरा धन्यवाद, जिन्होंने विभिन्न विषयों पर तकनीकी जानकारी दी। गोपाल स्व-शिक्षित व्यक्तिगत निवेश विशेषज्ञ हैं, जो वित्तीय साक्षरता पर मेरे ही जैसा नज़रिया रखते हैं।
मेरे पुराने मित्र और अद्भुत विजुअल डिज़ाइनर विवेक सुर्वे, अनीता डाके, सचिन परब, शलाका शिंदे, रूपाली दलवी और रणजीत तेंदुलकर ने पुस्तक के कवर, पेज लेआउट और फ़ॉर्मैटिंग के बारे में विचार दिए और एक ऐसे विषय पर लिखने के लिए बहुत सारा प्रोत्साहन दिया, जिससे व्यक्तिगत रूप से उनके रोंगटे खड़े हो जाते थे। और सबसे अंत में, लेकिन सबसे महत्त्वपूर्ण, मेरी पत्नी जिली को मेरा प्रेम और धन्यवाद, जिसने इस पुस्तक को लिखते समय अपना पूरा समर्थन दिया और धैर्य भी रखा।

अध्याय - 1
मुझे निवेश के बारे में बताएँ
“निवेश करना सरल है, लेकिन आसान नहीं है,” वॉरेन बफ़े ने कहा था, जो संसार के सबसे अमीर इंसानों में से एक हैं और निस्संदेह संसार के सबसे सफल निवेशक हैं, जिन्होंने पूरी तरह से निवेश के ही ज़रिये 60 अरब डॉलर से अधिक दौलत इकट्ठी की है।
बफ़े की इस बात का क्या मतलब है? अगर कोई चीज़ सरल है, तो उसे करना मुश्किल क्यों है? उनकी यह बात निवेश के विचार को समझने के लिए प्रासंगिक है और इससे हमें निवेश को सही दृष्टिकोण से देखने में मदद मिलती है। मैं अपने बचपन की एक घटनाइ बताना चाहूँगा, जिससे आपको बात ज़्यादा अच्छी तरह समझ आ जाएगी। यह कहानी आपमें से कुछ लोगों को जानी-पहचानी लग सकती है, क्योंकि शायद ऐसी ही कोई घटना आपके जीवन में भी हुई होगी।
यह कहानी मेरे बचपन की है। जब विशु के त्योहार पर रिश्तेदार और मित्र हमारे घर आते थे, तो जाते समय वे उपहार में बच्चों को नक़द पैसे देते थे। वह घटना मुझे अच्छी तरह याद है, जब ऐसा पहली बार हुआ था। हम अपने एक प्रिय चाचाजी को विदा कह रहे थे, तभी उन्होंने जेब से रुपये निकालकर हमें पकड़ा दिए। ऐसा हमारे साथ पहले कभी नहीं हुआ था! ग़ौर करें, मैं कई दशक पहले की घटना का ज़िक्र कर रहा हूँ - उस वक़्त बच्चों को ख़र्च करने के लिए पैसे शायद ही कभी दिए जाते थे - ज़्यादा से ज़्यादा उन्हें टॉफ़ी या फुग्गे ख़रीदने के लिए कुछ सिक्के थमा दिए जाते थे, वरना पैसा शायद ही कभी बच्चों को रखने दिया जाता था। कुल मिलाकर, उस दिन की घटना वाक़ई असाधारण थी… आगे की कहानी यह है कि उस दिन ज़्यादातर मेहमानों ने यही किया। हमें वह दिन अद्भुत और जादुई लग रहा था। शाम होने तक हम तीनों भाई-बहनों के पास अच्छी-ख़ासी रक़म जमा हो गई। और जैसा आप बच्चों से उम्मीद कर सकते हैं, हम सभी इस बारे में ख़याली पुलाव पका रहे थे कि हम इस छप्पर फाड़कर मिली दौलत को किस तरह उड़ाएँगे: चॉकलेट, खिलौने, ऑडियो कैसेट, क्रिकेट बैट - हमारे छोटे से दिमाग़ में ढेर सारे रोमांचक विकल्प भरे हुए थे।

लेकिन जब हम अपनी योजनाओं को अंतिम रूप दे रहे थे, तभी एक अप्रत्याशित चीज़ हुई। कोई आया और उसने शांति से हमसे पैसे ले लिए! और अंदाज़ा लगाएँ, वह कौन था? नहीं, यह पड़ोस का गुंडा बच्चा नहीं था; यह तो हमारी प्यारी माँ थीं! हालाँकि वे इतनी “दयालु” थीं कि उन्होंने हमें हमारी दौलत का कुछ हिस्सा लौटा दिया, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा उन्होंने अपने पर्स में रख लिया, जिसे वे अलमारी में ताला लगाकर रखती थीं।
उनकी इस हरकत पर हम बौखला गए। हमने विरोध किया, “आपने ऐसा क्यों किया?”
माँ ने मुस्कराकर कहा, “चिंता मत करो। मैं इसे सुरक्षित रखूँगी, ताकि बाद में हम इससे कोई अच्छी और महँगी चीज़ ख़रीद सकें।”
“बाद में क्यों? अभी क्यों नहीं?” मैं चिल्लाया, क्योंकि मैं सबसे बड़ा था और शुरुआती सदमे से उबर चुका था। उन्होंने जवाब दिया, “मैं कुछ दिनों में इसमें थोड़े पैसे मिला दूँगी और हम कोई ऐसी चीज़ ख़रीद लेंगे, जो तुम्हें बहुत अच्छी लगेगी।”
इसका क्या मतलब था? हमें तो कुछ समझ में नहीं आया।
यह सौदा हमारे लिए फ़ायदेमंद है, हमें यह विश्वास दिलाने की कोशिश में माँ ने आगे कहा, “हम इससे म्यूज़िक प्लेयर या फ़िश टैंक या क्रिकेट सेट कुछ भी ले सकते हैं…”
निवेश मुश्किल इसलिए है, क्योंकि यह हमारे बुनियादी स्वभाव को चुनौती देता है, जिसकी वजह से हम बाद के बजाय जल्दी से जल्दी अपनी आवश्यकताओं को संतुष्ट करना, आनंद लेना और ख़र्च करना चाहते हैं।
क्या हमें विश्वास हुआ? बिलकुल भी नहीं! क्या हमें उस बात पर विश्वास था, जो माँ ने हमसे कही थी? क़तई नहीं! लेकिन उस वक़्त उनसे बहस करना मुश्किल था। अगले कुछ दिनों तक हमने अपना पैसा वापस पाने के लिए हर जतन किया। हमने मुँह फुलाया, तमाशा किया, सौदा करने की उम्मीद में अतार्किक माँगें कीं। हम माँ को चुभती निगाहों से देखते रहे, ताकि उन्हें अपराधबोध हो जाए। लेकिन कोई चीज़ कामयाब नहीं हुई। उनके सामने मेरी बहनें और मैं आपस में ज़ोर-ज़ोर से बातें करते थे कि हम उस पैसे से कितनी चीज़ें ख़रीद सकते थे - लेकिन एक बार फिर, माँ ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की। जब सप्ताह गुज़रते चले गए, तो हमें अहसास हुआ कि हमारा पैसा हमेशा के लिए जा चुका था…
लेकिन कुछ महीनों बाद जब हम स्कूल से घर लौटे, तो हमने क्या देखा! एक बिलकुल नया म्यूज़िक सिस्टम, जो टीवी के पास सजा हुआ था! यह बहुत सुंदर दिख रहा था! और जब माँ ने हमें बताया कि यह उसी पैसे से ख़रीदा गया था, जो हमने उन्हें “दिया” था, तो हमें परम उल्लास की अनुभूति होने लगी! मेरी बहनें और मैं चकित व रोमांचित थे कि हम जिस पैसे से चॉकलेट और छोटे खिलौने ख़रीदना चाहते थे, वह सचमुच इतना ज़्यादा था कि उससे इतनी उपयोगी चीज़ ख़रीदी जा सकती थी!
यह घटना कमोबेश हर वह चीज़ बताती है, जो निवेश के बारे में सरल लेकिन मुश्किल है।

निवेश सरल इसलिए है, क्योंकि इसके लिए हमें बस थोड़ा सा पैसा अलग रखना होता है, ताकि समय के साथ इसका मूल्य बढ़ सके। निवेश मुश्किल इसलिए है, क्योंकि यह हमारे बुनियादी स्वभाव को चुनौती देता है, जिसकी वजह से हम बाद के बजाय जल्दी से जल्दी अपनी आवश्यकताओं को संतुष्ट करना, आनंद लेना और ख़र्च करना चाहते हैं।
यह मुश्किल इसलिए है, क्योंकि इसमें हमें लंबे समय तक धैर्यवान और अनुशासित रहना पड़ता है। यह मुश्किल इसलिए है, क्योंकि चारों तरफ़ हमें ऐसे लोग नज़र आते हैं, जो पैसे उड़ाकर मज़े कर रहे हैं, जबकि हम उन ख़ुशियों का त्याग कर रहे हैं। अगर हमारे घर में छोटे बच्चे या वृद्ध परिजन हैं, जो हम पर आश्रित हैं, तो वे भी इस प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं, जिससे यह और भी ज़्यादा चुनौतीपूर्ण बन जाता है (इसीलिए निवेश संबंधी पारंपरिक सलाह यह है कि इसे जल्दी यानी युवावस्था में ही शुरू कर दिया जाए)।
निवेश इसलिए भी मुश्किल है, क्योंकि हमें बहुत सारे निर्णय लेने होते हैं। हमें यह अंतर समझना होता है कि किन “आवश्यकताओं” को पूरा करना ज़रूरी है और किन “इच्छाओं” को कम किया जा सकता है। भोजन, कपड़े, मकान, दवाएँ और शिक्षा: ये आवश्यकताएँ हैं और आदर्श स्थिति में हमें इन क्षेत्रों में कोई समझौता नहीं करना चाहिए। लेकिन बाहर किसी रेस्तराँ में भोजन करना, सैर-सपाटे के लिए किसी पर्यटन स्थल पर जाना, फ़िल्में देखना - ये सब इच्छाएँ हैं और इन पर ख़र्च होने वाले पैसे में कटौती की जा सकती है, ताकि उस पैसे को अलग रखकर उसका निवेश किया जा सके। चूँकि इन प्रलोभनों के सामने घुटने टेकना आसान होता है, इसलिए निवेश करना हममें से ज़्यादातर लोगों के लिए सच्ची चुनौती हो सकती है। यानी बफ़े ने निवेश के सार को सही तरह से बताया था कि विचार के रूप में यह सरल है, लेकिन इस पर अमल करना मुश्किल होता है!
अच्छी ख़बर यह है कि निवेश करना एक आदत है, जिसे हम किसी दूसरी आदत की तरह डाल सकते हैं। अगर हम कुछ बार अनुशासित रहने में कामयाब हो जाते हैं, तो निवेश की आदत पड़ जाती है। और सफलतापूर्वक डाली गई किसी भी दूसरी आदत की तरह यहाँ भी कुंजी यह है कि हमें पूरी तरह स्पष्ट पता होना चाहिए कि हम इस आदत से कौन से लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। यदि हमारे लक्ष्य स्पष्ट हैं, तो हमारे मन में अपनी इच्छाओं पर अंकुश लगाने और अनुशासित निवेशक बनने की प्रेरणा अपने आप आ जाएगी। एक उपमा देना चाहूँगा, अगर हमें विजय की रेखा दिख जाती है, तो हम ज़्यादा केंद्रित और एकाग्र अंदाज़ में उसकी ओर बढ़ने लगते हैं। लेकिन अगर यही निश्चित नहीं है कि हम कहाँ जा रहे हैं, हम आसानी से भटक जाते हैं और इधर-उधर अलग-अलग दिशाओं में जाने लगते हैं। निवेश में भी यही होता है। अगर आपके पास उद्देश्य या लक्ष्य हों, तो आप ज़्यादा अनुशासित निवेशक बनते हैं। इससे आप ग़ैर-ज़िम्मेदार या अनियोजित ख़र्च के परिणामों के बारे में जागरूक रहते हैं। अगर आपके पास लक्ष्य नहीं हैं, तो आपको इस बात का अहसास भविष्य में होगा, लेकिन तब तक इतनी देर हो चुकी होगी कि आप इस बारे में कुछ नहीं कर पाएँगे। (हम इस पुस्तक के अध्याय 21 में वित्तीय योजना बनाने और लक्ष्य तय करने के बारे में बात करेंगे। उस अध्याय में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि हर लक्ष्य में निवेश के लिए पैसा हम कैसे अलग रखें - एक ऐसा विषय, जिसके बारे में हममें से कई अनिश्चित होते हैं।)

क्या ऐसा हो सकता है कि हमें निवेश करना ही न पड़े?
मुझे यक़ीन है कि इसका जवाब अब तक सभी के सामने स्पष्ट हो चुका होगा! निवेश एक ऐसे चीज़ है, जिसे आप चाहकर भी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। हमें अपने जीवन के मुख्य लक्ष्यों - मकान, उच्च शिक्षा, विवाह, बच्चों की शिक्षा, उनका विवाह, रिटायरमेंट, इलाज आदि - को हासिल करने के लिए निवेश करना होता है। उचित निवेश के बिना हममें से ज़्यादातर लोगों के लिए ये ख़र्च उठाना मुश्किल हो सकता है। उचित निवेश यह सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीक़ा है कि हम जीवन के इन बड़े ख़र्चों के वित्तीय प्रभाव के बारे में ज़्यादा चिंता किए बिना उन्हें कर दें। भले ही हम इनमें से कुछ लक्ष्य कम कर सकते हैं, लेकिन हम अपने इलाज और रिटायरमेंट के वर्षों के लिए निवेश करने से नहीं बच सकते।
हम अपने लक्ष्य हासिल कर लें, यह सुनिश्चित करने के लिए हमें पैसा अलग रखने में ही सक्षम नहीं होना चाहिए, बल्कि हमें इसका अच्छी तरह निवेश करने में भी सक्षम होना चाहिए। यह निवेश के संसार की दूसरी चुनौती है! सही निवेश चुनना आसान नहीं होता; बाज़ार में बहुत सारे विकल्प मौजूद हैं। ध्यान रखें, सही निवेश हमारे सपनों को सच कर सकते हैं, लेकिन ग़लत निवेश न सिर्फ़ हमारा पैसा डुबा देंगे, बल्कि हमारी मानसिक शांति भी छीन लेंगे!
चुनौती इस बात से भी बढ़ जाती है कि हमारे चारों ओर निवेश संबंधी जानकारी का सैलाब मौजूद है, जो लेखों, ब्लॉगों, विज्ञापनों, मार्केटिंग कॉल, ईमेल, पॉवरपॉइंट प्रज़ेंटेशन आदि के रूप में होता है। हम किस पर भरोसा करें? इनमें से कौन हमसे ग़लत निवेश ख़रीदवाने की कोशिश कर रहा है? कौन सा निवेश हमारी भावी आवश्यकताओं के लिए आदर्श है और कौन सा निवेश हमारे पैसे को नाली में बहा देगा? हालाँकि सभी लोग या संस्थाएँ जान-बूझकर भ्रमित करने वाली चालें नहीं चलती हैं, लेकिन फिर भी हमें अपने निर्णयों के बारे में बहुत सावधान रहना होता है, क्योंकि आगे चलकर उनका प्रभाव हमारे जीवन की गुणवत्ता पर पड़ेगा। बड़े निवेश संबंधी निर्णय आने वाले वर्षों में हमारी और हमारे प्रियजनों की वित्तीय सुरक्षा तय करेंगे।

तो हम सही निवेश कैसे चुनें?
हालाँकि हर व्यक्ति वित्त के क्षेत्र में विशेषज्ञ नहीं बन सकता, लेकिन हम निवेश और निवेश विकल्पों के बारे में बुनियादी ज्ञान हासिल करने का लक्ष्य बना सकते हैं। इस ज्ञान से हमें निवेशों का बेहतर मूल्यांकन करने में मदद मिलती है और बहुत सारे उपलब्ध विकल्पों में से यह चुनने की क्षमता मिलती है कि कौन से विकल्प उपयोगी हैं और कौन से नहीं हैं। इससे हमें दी जाने वाली जानकारी से परे देखने और वे जवाब खोजने की शक्ति मिलती है, जो सही निवेश विकल्पों की ओर ले जाएँगे। इस ज्ञान की बदौलत हम प्रश्न करेंगे, जाँच करेंगे और विवरणों का विश्लेषण करेंगे। इसकी बदौलत हम आकर्षक आँकड़ों और उज्ज्वल भावी अनुमानों से डगमगाए बगैर सुविचारित निवेश निर्णय ले पाएँगे। जानकार निवेशक बनना हमारे वित्तीय हितों को सुरक्षित रखने की दिशा में पहला और सबसे अनिवार्य क़दम है।
इस पुस्तक का लक्ष्य आपको निवेश संबंधी बुनियादी बातें बताना और बाज़ार में उपलब्ध सबसे आम निवेश विकल्पों की जानकारी देना है। निवेश के विकल्प अलग-अलग आवश्यकताओं के हिसाब से अलग-अलग हैं, जिनमें से प्रत्येक के अपने फ़ायदे और नुक़सान होते हैं। उनमें से कुछ आपके लिए अच्छी तरह काम करेंगे, लेकिन दूसरों के लिए नहीं करेंगे। और इसका विपरीत भी होगा। आपको तो बस निवेश के इन विकल्पों को सावधानी से पढ़ने की ज़रूरत है, ताकि आप उन विकल्पों को पहचान सकें, जिनकी मदद से आप अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल कर सकेंगे। इस जानकारी का इस्तेमाल करके अपने वर्तमान और भावी निवेशों का आकलन करें और इस ज्ञान को निवेश के संसार में अपनी यात्रा की आधारशिला बना लें। अगर आप जानते हैं कि आपके लक्ष्य, सपने और ज़िम्मेदारियाँ क्या हैं, तो आप इस पुस्तक के अंत तक सही निवेश विकल्पों को पहचान जाएँगे।
समृद्ध वित्तीय भविष्य की यात्रा के लिए आपको शुभकामनाएँ!

पढ़ने और विचार करने के लिए वॉरेन बफ़े के कुछ अन्य मशहूर उद्धरण
आपको अपने जीवन में बहुत कम चीज़ें सही करने की ज़रूरत है, जब तक कि आप बहुत ज़्यादा चीज़ें ग़लत न कर दें।
मैं ऐसी कंपनियों के शेयर ख़रीदता हूँ, जो इतनी अद्भुत हों कि कोई मूर्ख भी उन्हें चला सकता हो। क्योंकि देर-सबेर कोई न कोई मूर्ख ही उन्हें चलाएगा।
पहला नियम: कभी पैसा मत गँवाओ। दूसरा नियम: पहले नियम को मत भूलो।
कोई आज छाया में इसलिए बैठा है, क्योंकि किसी दूसरे ने काफ़ी समय पहले एक पेड़ लगाया था।
जब दूसरे लोग लालची होते हैं, तो हम डरने की कोशिश करते हैं और जब दूसरे डरे होते हैं, तभी हम लालची बनने की कोशिश करते हैं।
सफल और सचमुच सफल लोगों के बीच फ़र्क़ यह है कि सचमुच सफल लोग लगभग हर चीज़ को नहीं कह देते हैं।
कारोबार के संसार में सबसे सफल लोग वही हैं, जो वह कर रहे हैं जिससे वे प्रेम करते हैं।
डाइवर्सिफ़िकेशन अज्ञान के ख़िलाफ़ सुरक्षा है। अगर आप जानते हैं कि आप क्या कर रहे हैं, तो इसमें कोई तुक नहीं है।
अगर पैसे का खेल खेलने के लिए सिर्फ़ इतिहास जानने की ज़रूरत होती, तो लाइब्रेरियन सबसे अमीर इंसान होते।
आदत की रस्सियाँ इतनी हल्की होती हैं कि महसूस ही नहीं होतीं, जब तक कि वे इतनी भारी नहीं बन जातीं कि उन्हें तोड़ा ही न जा सके।

अध्याय - 2
महिलाएँ और निवेश
बहुत से लोग यह सोचते हैं, जिनमें कई महिलाएँ भी शामिल हैं, कि महिलाएँ निवेश के क्षेत्र में अच्छी नहीं होतीं। “महिलाओं को संख्याओं की समझ नहीं होती है,” “महिलाएँ पैसे को नहीं सँभाल सकतीं,” “महिलाएँ महीन शब्दों में लिखी इबारत नहीं पढ़ती हैंय” आम तौर पर महिलाओं और निवेश के विषय पर ये और ऐसे ही दूसरे कथन कहे जाते हैं। इस दृष्टिकोण के समर्थक यह तर्क और प्रमाण देते हैं कि बहुत कम महिलाएँ पेशेवर या व्यक्तिगत स्तर पर सक्रियता से निवेश करती हैं। लेकिन मैं मानता हूँ कि सच्चाई इसके ठीक विपरीत है।
मैं मानता हूँ कि महिलाएँ सिर्फ़ अच्छी निवेशक ही नहीं हो सकतीं, बल्कि निवेश के मामले में वे नैसर्गिक दृष्टि से पुरुषों से बेहतर स्थिति में रहती हैं। मैं मानता हूँ कि यह एक व्यापक सामान्यीकरण है और इसके अपवाद निश्चित रूप से होंगे। लेकिन इतने वर्षों के अपने अनुभव और अवलोकन के आधार पर मुझे महसूस होता है कि महिलाएँ उत्कृष्ट निवेशक बन सकती हैं। इसके कई कारण हैं। महिलाओं को संख्याओं के मामले में सहज बोध होता है, वे ज़्यादा सुरक्षा-केंद्रित होती हैं, उनका दीर्घकालीन दृष्टिकोण होता है, वे जानती हैं कि पैसे का कुशलता से इस्तेमाल कैसे करना है और उनमें से कई अपने निवेश पोर्टफ़ोलियो को पोषण देने में माहिर होती हैं। यही वे घटक हैं, जो किसी को अच्छा निवेशक बनाते हैं!
क्या आप सहमत हैं? आइए मैं कुछ उदाहरणों से इसे समझाता हूँ।
ज़्यादातर भारतीय घरों में रोज़मर्रा का ख़र्च महिला ही सँभालती है, चाहे वह माँ हो या पत्नी। घर चलाना कोई आसान काम नहीं होता। इसमें हर चीज़ को सही मात्रा में और सही भाव पर ख़रीदना शामिल होता है, ताकि यह सुनिश्चित हो जाए कि परिवार स्वास्थ्यवर्धक भोजन करे, रोज़मर्रा के ख़र्च चल सकें और महीने के आख़िर में आपातकालीन स्थितियों के लिए थोड़ा पैसा भी अलग रखा जा सके। भारत की घरेलू महिला यह काम योग्यता से करती है, फिर चाहे मुद्रास्फीति की दर ऊपर रहे या नीचे; चाहे अनिवार्य चीज़ों के भाव आसमान छूने लगें और घर की आमदनी डावाँडोल रहे। कौन कहता है कि महिलाएँ संख्याओं के मामले में निपुण नहीं होतीं?

सुरक्षा के मामले में महिलाएँ आम तौर पर पुरुषों से ज़्यादा जागरूक होती हैं। वे नियमों और उस मार्ग पर चलना ज़्यादा पसंद करती हैं, जो रोमांच के बजाय सुरक्षा प्रदान करता हो। पुरुष आधे-अधूरे विवरण वाली योजनाओं में कूद सकते हैं, लेकिन इसके विपरीत ज़्यादातर महिलाएँ पैसा लगाने से पहले झिझकेंगी, जब तक कि उन्हें अंतिम विवरण के बारे में पूरी तसल्ली न हो जाए। एक अध्ययन में बताया गया है कि निवेश करने से पहले महिलाएँ पुरुषों के मुक़ाबले लगभग 40 प्रतिशत ज़्यादा समय लेती हैं। अन्य अध्ययन साबित करते हैं कि औसतन महिलाएँ पुरुषों से कम जोखिम लेती हैं और इस वजह से कम ग़लतियाँ करती हैं।
महिलाओं में पालने-पोसने की स्वाभाविक भावना होती है - चाहे यह बच्चे हों, पालतू जानवर हों या पौधे हों - उनकी देखभाल में चीज़ें फलती-फूलती हैं। संभवतः ऐसा इसलिए है, क्योंकि उन्हें धैर्य का वरदान मिला है या फिर महत्त्वहीन दिखने वाले चीज़ों में उनकी सच्ची रुचि होती है। यही निवेश में भी होता है - ज़्यादातर महिलाएँ छोटी से छोटी राशि को भी पाल-पोसकर बड़ा करती हैं और उन्हें महत्त्वपूर्ण रक़म में बदल देती हैं।
बदलते सामाजिक परिवेश में निवेश संबंधी मामलों में महिला की भूमिका बहुत मायने रख सकती है। यह वित्तीय दृष्टि से सुरक्षित और संघर्षशील परिवारों के बीच का फ़र्क़ हो सकती है।
और मैंने यहाँ महिलाओं के सिर्फ़ कुछ गुण ही बताए हैं। कई और उदाहरण हैं, जो साबित करते हैं कि मौक़ा मिलने पर महिलाएँ न सिर्फ़ अच्छी निवेशक बन सकती हैं, बल्कि वे पुरुषों से भी आगे निकल सकती हैं। बुरे निवेशक के रूप में महिलाओं की बुरी छवि का मुख्य कारण यह है कि निवेश के निर्णय लेने के मामले में कुछ समय पहले तक सामाजिक परिस्थितियों और मानसिकताओं की वजह से महिलाओं को हाशिये पर रखा गया था। जिन घरों में महिलाएँ वित्तीय चर्चाओं में शामिल होती थीं, वहाँ भी परिवार के पुरुष सदस्य ही अंतिम निर्णय लेते थे। इस तरह महिला की भूमिका घरेलू बजट सँभालने और छोटे निवेश करने तक ही सीमित थी। इसी कारण यह ग़लत धारणा बनी और दुर्भाग्य से स्वीकार कर ली गई कि महिलाएँ अच्छी निवेशक नहीं बन सकतीं।
लेकिन सौभाग्य से परिस्थितियाँ अब बदल रही हैं

आज समाज में एकल परिवारों की संख्या बढ़ी है। साथ ही, नौकरी करने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है। इस कारण महिलाएँ अब वित्त संबंधी मामलों में निष्क्रिय भूमिका नहीं निभाती हैं। ज़्यादातर कामकाजी महिलाओं का ख़ुद का बैंक ख़ाता होता है। कई महिलाएँ शेयर बाज़ार और टैक्स बचाने वाले साधनों में निवेश कर रही हैं। यानी आजकल ख़रीदने, बेचने और निवेश के निर्णय लेने में महिलाएँ बढ़ती संख्या में समान भूमिका निभाने लगी हैं।
यह परिवर्तन इतनी तीव्र गति से हो रहा है और इसका घर की आर्थिक स्थिति पर इतना ज़्यादा प्रभाव पड़ रहा है कि अब महिलाओं को वित्तीय मामलों में अज्ञानी नहीं रहना चाहिए। अब वह पैसों के प्रबंधन के लिए सिर्फ़ अपने सहज बोध पर भरोसा नहीं कर सकती, न ही उस छुटपुट जानकारी पर भरोसा कर सकती है, जो उसने चलते-फिरते हासिल किया है। पैसा कैसे काम करता है और बढ़ता है, यह सीखने और समझने में उसे सक्रिय और प्रोएक्टिव बनने की ज़रूरत है। बदलते सामाजिक परिवेश में निवेश संबंधी मामलों में महिला की भूमिका बहुत मायने रख सकती है। यह वित्तीय दृष्टि से सुरक्षित और संघर्षशील परिवारों के बीच का फ़र्क़ हो सकती है।
अगर आप महिला हैं और आपने अब तक निवेश कभी निवेश नहीं किया है, तो अब समय आ गया है कि आप शुरुआत कर दें! अगर आपको महसूस होता है कि आपके पास निवेश संबंधी पर्याप्त ज्ञान नहीं है, तो निवेश के सुरक्षित और सरल विकल्पों से शुरुआत करें। निवेश शुरू करने के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि आप नौकरीपेशा हों, शादी-शुदा हों या आपके पास बड़ी धनराशि हो। एक बचत ख़ाता खोलकर उसमें थोड़े-थोड़े पैसे डालें या कम राशि वाला रिकरिंग डिपॉज़िट खाता खोल लें। नज़दीकी बैंक में जाकर पूछताछ करें। आपके नज़दीकी पोस्ट ऑफ़िस में भी कई योजनाएँ हैं - वहाँ आप हर महीने 10 रुपये जितनी छोटी राशि से निवेश शुरू कर सकती हैं!
हालाँकि शुरुआत करना महत्त्वपूर्ण है, लेकिन जल्दबाज़ी की ग़लती न करें। आप किस निवेश योजना का विकल्प चुन रही हैं, उसका ज्ञान अनिवार्य है (यह पुस्तक यह सीखने में आपकी मदद करेगी)। यह सुनिश्चित करें कि आप अख़बारों में दिखने वाले या भारी विज्ञापन वाले निवेश विकल्पों से प्रभावित होकर ग़लत दिशा में न चली जाएँ। ज़्यादा गहराई तक जाँच-पड़ताल करें, लोगों से पूछताछ करें और निवेश का निर्णय लेने से पहले योजना के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी लेने की कोशिश करें। बहुसंख्यक लोगों जैसे न बनें, जो सिर्फ़ इसलिए निवेश करते हैं, क्योंकि बाक़ी लोग ऐसा कर रहे हैं। ख़ास तौर पर फटाफट अमीर बनाने वाली योजनाओं के बारे में सावधान रहें, जो लुभावने मुनाफ़े का वादा और दावा करती हैं। उनके चक्कर में प्रायः आपका मूल धन भी डूब सकता है!

अगर आप किसी ख़ास योजना को न समझ पाएँ, तो उसमें कदापि निवेश न करें। आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आपके ज्ञान की कमी की वजह से आप योजना नहीं समझ पाई हैं। लेकिन ऐसा होना ज़रूरी नहीं है। यह भी हो सकता है कि बताने वाले व्यक्ति को पूरे विवरण मालूम न हों, जिस कारण वह आपकी शंकाओं को दूर नहीं कर पाता। या फिर योजना में ऐसी ख़ामियाँ या कमियाँ भी हो सकती हैं, जो इसे अच्छी तरह समझाने पर उजागर हो जाएँगी। इसलिए अगर आपको योजना पर पूरा विश्वास न हो, तो “नहीं” कह दें। जहाँ तक संभव हो, पैसे उधार लेकर निवेश न करें। अपने परिवार में निवेश संबंधी चर्चाओं में अवश्य शामिल हों। प्रश्न पूछें, सुझाव दें - चाहे आप कमा रही हों या नहीं, परिवार के सदस्य के रूप में परिवार की आर्थिक स्थिति आपको भी प्रभावित करती है! अगर शुरुआत में आपको नज़रअंदाज़ किया जाए, तो हताश न हों। अगर आप कोशिश करती रहेंगी, तो बाक़ी लोग आपके विचारों के मूल्य को पहचान लेंगे और आपको चर्चा में शामिल कर लेंगे।
यदि आप पहले से ही वित्तीय चर्चाओं का हिस्सा हैं या निर्णय लेने में शामिल हैं, तो ध्यानशील और संलग्न सहभागी बनें। यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि कई बार महिलाएँ बिना सवाल-जवाब किए परिवार की सारी वित्तीय ज़िम्मेदारियाँ पुरुषों के हवाले कर देती हैं। और जब परिस्थितियाँ गड़बड़ होती हैं, तो पुरुष अपनी असफलताएँ छुपा जाते हैं, क्योंकि उन्हें महसूस होता है कि महिलाएँ विस्तृत विवरण नहीं समझ पाएँगी, जिससे सचमुच दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम मिलते हैं। शोध दर्शाता है कि पुरुष भारी और कई बार तो अनपेक्षित जोखिम लेते हैं, जिसे शुरुआत में ही न रोकने पर तबाही हो सकती है। अपने परिवार के कल्याण के बारे में चिंतित महिला के रूप में आपकी राय उस वित्तीय जोखिम को कम कर सकती है, जो पुरुष इसके बगैर ले लेते। जैसा इस अध्याय में पहले ज़िक्र किया गया है, परिवार को समृद्ध बनाने के लिए आज के दौर में महिलाओं को वित्तीय निर्णयों में सक्रियता से शामिल होना चाहिए। तो जल्दी से जल्दी शुरुआत कर दें!

सात कारणों से महिलाओं को निवेश के बारे में ज़्यादा प्रोएक्टिव बनना चाहिए
भारत में महिलाओं की औसत आयु 70 वर्ष है, जबकि पुरुषों की 67 वर्ष है। चूँकि आम तौर पर महिलाएँ अपने पति से कई साल छोटी होती हैं, इसलिए ज़्यादातर महिलाएँ अपने पतियों की मृत्यु के बाद कई साल या कई बार तो कई दशक तक जीवित रहती हैं। अगर आप अपने निवेशों का पहले से ख़ुद प्रबंधन कर रही हैं, तो बाद में भी इसे करना आपके लिए चुनौतीपूर्ण नहीं होगा। लेकिन अगर आपको अपने जीवनसाथी की मृत्यु के बाद यह शुरू करना पड़े, तो इसमें बहुत जल्दी, बहुत ज़्यादा सीखना होगा।
हालाँकि कई दूसरे देशों की तुलना में भारत में तलाक़ की दर अब भी कम है, लेकिन यह हर साल बढ़ती जा रही है। इसलिए महिलाओं को इस संभावना को ख़ारिज नहीं करना चाहिए कि ऐसी नौबत आने पर उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति ख़ुद सँभालनी पड़ सकती है। बाद में मजबूरी में सीखना पड़े, इससे बेहतर यह है कि अभी इच्छा से सीख लें।
कई महिलाएँ अपने बच्चों और घर को सँभालने के लिए अपनी नौकरी छोड़ देती हैं। अगर महिला निवेश और सेवानिवृत्ति नियोजन प्रक्रिया में शामिल होना भी छोड़ दे, तो असमय विधवा बनने की स्थिति में उसकी स्थिति मुश्किल हो सकती है। उचित निवेश और बीमे के अभाव में उसे न सिर्फ़ दोबारा नौकरी करनी होगी, बल्कि जीवन की उस बहुत असुरक्षित अवस्था में निवेश के बारे में सीखना भी शुरू करना होगा। इसलिए नौकरी छोड़ने के बाद भी अपने निवेशों के प्रबंधन में शामिल रहने में समझदारी है।
कई महिलाएँ आजकल अविवाहित रहने का विकल्प चुनती हैं। हालाँकि उन्हें जीवनसाथी की दूसरी आमदनी का लाभ नहीं मिल पाता, लेकिन अपने वित्तीय जीवन के बारे में वे पूरी तरह ज़िम्मेदार और नियंत्रण में होती हैं। उन्हें कुछ समय तक तो अपने माता-पिता या भाई-बहनों का सहयोग मिल सकता है, लेकिन इस तथ्य से बचना संभव नहीं है कि अंततः उन्हें अपने दम पर ही अपनी वित्तीय स्थिति का प्रबंधन करना होगा। इसलिए इसी समय शुरू कर दें!

चूँकि महिलाएँ पुरुषों की तुलना में कम जोखिम लेती हैं, इसलिए बहुत सी महिलाएँ ऐसे विकल्पों में निवेश को ज़्यादा पसंद करती हैं, जिनमें जोखिम कम होता है, भले ही उनमें मुनाफ़ा कम मिले। यह नीति सुरक्षित तो है, लेकिन यह इतना ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने की आदर्श रणनीति नहीं है, जो मुद्रास्फीति को हरा दे या आपको अपने लक्ष्यों तक ज़्यादा तेज़ी से पहुँचा दे। इसलिए महिलाओं को अपने निवेश से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने के लिए शेयर बाज़ार और रियल एस्टेट संबंधी निवेश के बारे में ज़्यादा जानकारी हासिल करनी चाहिए। हालाँकि ये निवेश पूरी तरह जोखिम रहित नहीं होते हैं, लेकिन जोखिम कम करने और निश्चित ब्याज योजनाओं से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने के तरीक़े मौजूद हैं। कुंजी यह है कि उपलब्ध विकल्पों को समझा जाए और फिर सकारात्मक व नकारात्मक पहलुओं को समझने के बाद सुनियोजित तरीक़े से निवेश किया जाए। इसलिए ज़्यादा से ज़्यादा सीखने की कोशिश करें।
हम काफ़ी नियमित रूप से यह बहुत विचलित करने वाला तथ्य देखते हैं कि गंभीर वित्तीय समस्याओं की वजह से पूरा परिवार एक साथ आत्महत्या कर लेता है। यह बेहद दुखद और मर्मस्पर्शी है, क्योंकि हम जानते हैं कि मासूम बच्चे भी शिकार बन जाते हैं, जिनका इसमें कोई दोष नहीं था। हर मामला अनूठा होता है, इसलिए हम ऐसी घटनाओं पर कोई निर्णय नहीं दे सकते, लेकिन हर अभिभावक को यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश करनी चाहिए कि वे अनावश्यक वित्तीय जोखिम न लें, ताकि ऐसी नौबत ही न आए। वित्तीय विचार-विमर्श और निर्णयों में महिलाओं की संलग्नता ऐसी स्थिति आने से पहले ही उसे रोक सकती है। लेकिन महिलाएँ ऐसा अर्थपूर्ण तरीक़े से तभी कर पाएँगी, जब उन्हें निवेश के बारे में जानकारी हो - जिसमें निवेश के विभिन्न विकल्पों के लाभ और हानियाँ शामिल हैं। निवेश के कुछ निर्णय बुनियादी तौर पर जोखिम भरे हो सकते हैं। जानकार जीवनसाथी ऐसे अनुपयुक्त निर्णयों को भाँप लेगा और सामने वाले जीवनसाथी को चेतावनी दे देगा कि वह पूरे परिवार का जीवन दाँव पर लगाने वाली स्थिति निर्मित न करे। देश भर में ऐसी घटनाओं के काफ़ी उदाहरण देखने को मिलते हैं और यह दोनों अभिभावकों का कर्तव्य है कि बहुत देर होने से पहले ही वे अपने जीवनसाथी के वित्तीय निर्णयों के बारे में जागरूक बनें। पारिवारिक कल्याण के लिए महत्त्वपूर्ण है कि महिलाएँ यह समझ लें कि निवेश कैसे काम करता है।
आजकल माता-पिता दोनों ही अपने बच्चों की परवरिश में समान रूप से शामिल होते हैं। इसके बावजूद माताएँ हर दिन अपने बच्चों के साथ ज़्यादा समय बिताती हैं। इस तरह महिलाओं के पास यह अवसर होता है कि वे बचपन से ही बच्चों को पैसे की अच्छी आदतें सिखा सकती हैं। जानकार निवेशक बनने का फ़ायदा यह होगा कि अपने बच्चों को पैसे संबंधी सही योग्यताएँ सिखाने का आपका काम ज़्यादा आसान बन जाएगा। पैसे की अच्छी आदतें, पैसे के प्रति सही नज़रिया, वित्तीय अनुशासन - ये वे सर्वश्रेष्ठ उपहार हैं, जो आप अपने बच्चों को दे सकती हैं, जिनके लिए वे आपके हमेशा कृतज्ञ रहेंगे।

हालाँकि यह पुस्तक सभी निवेशकों के लिए लिखी गई है, लेकिन मैं इसे भारतीय महिलाओं को समर्पित करना चाहूँगा, जो अपने ख़ुद के पैसों के प्रबंधन में अग्रणी हैं और निवेश में ज़्यादा प्रोएक्टिव रुचि ले रही हैं। महिलाएँ निवेश को ज़्यादा गंभीरता से लें, इसके महत्त्व पर जितना भी ज़ोर दिया जाए, कम है।
महिलाओं के लिए ख़ास प्रोत्साहन और योजनाएँ
उत्तर प्रदेश, ओडिशा, दिल्ली, मध्यप्रदेश, पंजाब और कुछ अन्य राज्य महिलाओं को आसान गृह ऋण, कम स्टाम्प ड्यूटी, कर लाभ आदि विशेष सुविधाएँ देते हैं। मिसाल के तौर पर, दिल्ली में पुरुषों के लिए स्टाम्प ड्यूटी 6 प्रतिशत है, जबकि महिलाओं के लिए यह सिर्फ़ 4 प्रतिशत है। कई बैंक महिलाओं को कम ब्याज दर पर होम लोन भी देते हैं।
स्वास्थ्य बीमा सभी के लिए अनिवार्य होना चाहिए। इसमें महिलाएँ एक क्रिटिकल बीमा पॉलिसी भी ले सकती हैं, जो स्तन कैंसर, गर्भाशय के कैंसर जैसे विशिष्ट स्त्री रोगों से सुरक्षा प्रदान करे। आपको स्वास्थ्य बीमा वाले अध्याय में क्रिटिकल पॉलिसियों के बारे में ज़्यादा जानकारी मिलेगी।
शादी-शुदा महिलाओं के जीवन बीमा लाभ क़र्ज़दारों के दावों से सुरक्षित रह सकते हैं, जिसके लिए उन्हें विवाहित महिला जायदाद अधिनियम (एमडब्ल्यूपी एक्ट) के अनुच्छेद 6 का इस्तेमाल करना होगा। यह अधिनियम पति की मृत्यु के बाद पत्नी और संतानों के वित्तीय हितों की रक्षा करता है। पॉलिसी के लिए आवेदन करते समय पॉलिसीधारक (यानी पति) को इसके लिए एक अलग फ़ॉर्म भरना होता है। एमडब्ल्यूपी एक्ट का उपयोग महिलाएँ भी पॉलिसी ख़रीदते समय कर सकती हैं (अनुच्छेद 5 के अंतर्गत)। इस मामले में उस महिला की संतानों को पॉलिसी का लाभ मिलता है; उसके पति को कुछ नहीं मिलता है। इस बात पर ग़ौर करें कि एमडब्ल्यूपी एक्ट सारे लाभ पॉलिसी के उत्तराधिकारियों को देता है। इसलिए पॉलिसी की अवधि के बाद जीवित रहने पर पॉलिसीधारक को, चाहे वह पति हो या पत्नी, कुछ नहीं मिलता है।
कुछ जीवन बीमा योजनाएँ ख़ास तौर पर महिलाओं की आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। इसमें पति की मृत्यु पर प्रीमियम से मुक्ति, विशेष रोगों के निदान पर प्रीमियम में रियायत आदि शामिल हैं। आप सामान्य जीवन बीमा योजना चुनने के बजाय ऐसी योजनाओं का विकल्प चुन सकती हैं। लेकिन किसी पॉलिसी का विकल्प चुनने से पहले पॉलिसी की शर्तों का अध्ययन अनिवार्य रूप से कर लें।
अगर आप गृहिणी हैं, जिसे रोज़गार या व्यवसाय से कोई आमदनी नहीं होती है, तो आपको निवेश के लिए अपने मासिक व्यय में से थोड़ा पैसा अलग रखने की कोशिश करनी चाहिए, चाहे यह कितना ही कम क्यों न हो। पीपीएफ़ ख़ाता (न्यूनतम 500 रुपये प्रति वर्ष), ऑनलाइन स्वर्ण में निवेश (जीईटीएफ़ या गोल्ड म्युचुअल फ़ंड्स) या किसी बैंक अथवा पोस्ट ऑफ़िस में दीर्घकालीन रिकरिंग डिपॉज़िट (न्यूनतम 50 रुपये) लंबे समय में काफ़ी बड़ी राशि में बदल सकता है।

अध्याय - 3
बुनियादी निवेश शब्दावली और अवधारणाएँ
जिस तरह से अक्षरों और शब्दों से परिचित हुए बिना किसी वाक्य को पढ़ना असंभव है, उसी तरह निवेश संबंधी बातचीत को समझना तब तक मुश्किल होगा, जब तक कि हम निवेश की बुनियादी शब्दावली और अवधारणाओं को न समझ लें। सिर्फ़ निवेश के क्षेत्र में ही अनूठी शब्दावली नहीं होती है - हर उद्योग की अपनी अनूठी शब्दावली होती है - चाहे यह इंजीनियरिंग हो, डिज़ाइन हो, उत्पादन हो या फिर नृत्य-नाटिका हो। इसलिए अगर आप निवेश को ज़्यादा अच्छी तरह समझना चाहते हैं, तो आपको निवेश में आम तौर पर प्रयुक्त शब्दावली और अवधारणाओं से परिचित होना चाहिए।
अक्सर हमारी सीमित वित्तीय शब्दावली हमें दूसरों के साथ निवेश पर बातचीत करने या पूछताछ करने से रोक देती है। जिस पल हम “सेक्शन 80सी” या “बुल और बियर” या “लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स” या “एनईएफ़टी” जैसी शब्दावली सुनते हैं, हम अपने दिमाग़ के वित्तीय शब्दकोष में उनका मतलब खोजने लगते हैं। अगर हम समय रहते उनका मतलब नहीं समझ पाते हैं या हमने पहली बार वह शब्दावली सुनी है, तो उस विषय में हमारी रुचि कम होने लगती है और सुनी या पढ़ी बातों का पूरा मतलब समझने में मुश्किल आती है। ऐसा बार-बार होने पर हम निवेश के बारे में नकारात्मक पूर्वाग्रह पाल लेते हैं या मानसिक अवरोध खड़े कर लेते हैं। नतीजा यह होता है कि जब भी निवेश संबंधी किसी विषय से हमारा पाला पड़ता है, तो हमारा मस्तिष्क अपने आप हमारे दिमाग़ की बत्ती को बंद कर देता है। इसीलिए बातचीत का विषय निवेश पर आते ही कई लोग परे हट जाते हैं, जो दूसरे पेशों में बुद्धिमान और योग्य समझे जाते हैं।
तो क्या कोई समाधान है? सौभाग्य से, व्यक्तिगत निवेश के संसार में अक्सर प्रयुक्त होने वाली बुनियादी शब्दावली और अवधारणाएँ होती हैं, जिनसे परिचित होने पर आपके लिए निवेश को समझना और उस पर चर्चा करना ज़्यादा आसान हो जाएगा। मेरी सलाह है कि इस पुस्तक में बताए गए निवेश के विकल्पों को पढ़ना शुरू करने से पहले आप इस अध्याय को पूरी तरह पढ़ लें। आप जो ज्ञान हासिल करते हैं, उससे न सिर्फ़ आपको बाक़ी अध्यायों को गति से पढ़ने में मदद मिलेगी, बल्कि इससे आपको निवेश के बारे में सीखने और दूसरों से उन पर बातचीत करने का आत्मविश्वास भी आएगा।
पुस्तक के अंत में संगठनों और वेबसाइटों की सूची दी गई है, जो आपकी वित्तीय शिक्षा को आगे जारी रखने में मदद के लिए अतिरिक्त संसाधन प्रदान करते हैं। जब भी आपको समय मिले, उनकी सेवाओं की जाँच करें।

एसेट
रोज़मर्रा की भाषा में “एसेट” का मतलब है कोई मूल्यवान चीज़। यह या तो वस्तु हो सकती है या फिर व्यक्ति भी हो सकती है। वित्त के संसार में एसेट ऐसी चीज़ है, जिसका आर्थिक मूल्य होता है और जिसे पैसों में बदला जा सकता है। लिक्विडिटी का मतलब यह है कि कोई ख़ास एसेट कितनी आसानी से पैसे में बदला जा सकता है। निवेश के संदर्भ में एसेट को आम तौर पर दो श्रेणियों में बाँटा जाता है: लिक्विड और नॉन-लिक्विड। लिक्विड एसेट वह निवेश है, जिसे वर्तमान बाज़ार भाव के आस-पास तुरंत बेचकर पैसों में बदला जा सकता है। शेयर, म्युचुअल फ़ंड, एफ़डी, सोना आदि को लिक्विड एसेट्स माना जाता है, क्योंकि उन्हें उनके वर्तमान बाज़ार भाव पर आसानी से बेचा जा सकता है और पैसों में बदला जा सकता है।
नॉन-लिक्विड एसेट्स वे निवेश होते हैं, जिन्हें आसानी से नक़दी में नहीं बदला जा सकता - जैसे रियल एस्टेट, जीवन बीमा प्रतिफल, प्रॉविडेंट फ़ंड आदि। अगर आप उन्हें तुरंत बेचना चाहते हैं, तो आप ऐसा कर तो सकते हैं, लेकिन आपको उन्हें वर्तमान बाज़ार भाव से कम भाव पर या नुक़सान पर बेचना होगा। नक़द पैसा सबसे लिक्विड एसेट होता है, क्योंकि इसे पैसों में बदलने की कोई ज़रूरत नहीं होती है। लेकिन यह बात ध्यान रखें कि किसी एसेट का मूल्यांकन करते वक़्त लिक्विडिटी ही एकमात्र विचारणीय घटक नहीं होती है। हर एसेट के जोखिमों और मुनाफ़े पर भी अच्छी तरह सोच-विचार करना चाहिए।
एसेट्स को मोटे तौर पर निम्न श्रेणियों में भी बाँटा जा सकता है: डैट, इक्विटी, रियल एस्टेट और कमॉडिटीज़। डैट कोई भी ऐसा एसेट है, जो आपको ब्याज कमाकर देता है; मिसाल के तौर पर, एफ़डी, पीपीएफ़, एनएससी आदि। इक्विटी एसेट्स वे होते हैं, जो आपके पैसे को बढ़ाते हैं, मिसाल के तौर पर, कंपनियों के शेयर और उनमें निवेश करने वाले म्युचुअल फ़ंड। रियल एस्टेट एसेट्स ज़मीन, मकान आदि से सरोकार रखते हैं, जबकि कमॉडिटीज़ में सोना, चाँदी आदि चीज़ें आती हैं, जिन्हें मुनाफ़े पर बेचा जा सकता है।


बीएसई
द बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और द नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) भारत के दो मुख्य स्टॉक एक्सचेंज हैं। 1875 में स्थापित बीएसई एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है। स्टॉक एक्सचेंज शेयरों की ख़रीद-फ़रोख़्त यानी ट्रेडिंग के लिए ब्रोकरों और ट्रेडर्स को सुविधाएँ प्रदान करता है। जो कंपनी अपने शेयर जारी करती है और उनमें ख़रीद-फ़रोख़्त कराना चाहती है, उसे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध या लिस्ट होना पड़ता है। भारत में किसी कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई दोनों में सूचीबद्ध हो सकते हैं और निवेशक उन्हें इनमें से किसी भी स्टॉक एक्सचेंज से ख़रीद सकता है। निवेशक के रूप में आपको सीधे स्टॉक एक्सचेंज से संपर्क नहीं करना होता है। आप अपने ब्रोकर या किसी ऑनलाइन ब्रोकरेज वेबसाइट के ज़रिये शेयर ख़रीदते या बेचते हैं, लेकिन शेयरों का वास्तविक लेन-देन स्टॉक एक्सचेंजों पर होता है।
इसके अलावा, सेंसेक्स, एनएसई और निफ़्टी भी देखें
तेजड़िये और मंदड़िये
तेजड़िये (बुल्स) और मंदड़िये (बियर्स) शेयर बाज़ार में प्रयुक्त शब्दावली हैं। बुल मार्केट में शेयरों के भाव लगातार ऊपर जाते हैं और निवेशक ऊँचे भाव की प्रत्याशा में ख़रीदते रहते हैं। इस दौर में शेयर बाज़ार में बहुत ज़्यादा ख़रीद-फ़रोख़्त होती है। बियर मार्केट में इसका ठीक उलटा होता है। शेयरों के भाव गिरते रहते हैं और निवेशकों का विश्वास कम होता रहता है। ख़रीद-फ़रोख़्त की मात्रा भी कम हो जाती है।
यह ग़ौर करें कि शेयरों के भाव हर दिन घटते-बढ़ते हैं - इसका बुल या बियर मार्केट से कोई संबंध नहीं है। तकनीकी दृष्टि से किसी बाज़ार को बुल या बियर दौर में तब माना जाता है, जब पूरा बाज़ार 20 प्रतिशत बढ़ या घट जाए। मिसाल के तौर पर, अगर सेंसेक्स 25,000 पॉइंट पर था और यह गिरकर 20,000 पॉइंट पर आ जाता है, तो हम कह सकते हैं कि बियर मार्केट या मंदी का दौर शुरू हो गया है।

कैपिटल गेन्स
कैपिटल गेन वह मुनाफ़ा है, जो आपको शेयरों, म्युचुअल फ़ंडों, बॉन्डों, रियल एस्टेट और सोने जैसे एसेट बेचने पर मिलता है। दूसरी तरफ़, अगर आप इन एसेट्स को ख़रीदी के भाव से कम पर बेचते हैं, तो आपको कैपिटल लॉस होता है। कैपिटल गेन और कैपिटल लॉस की गणना करते समय आपको कमीशन, फ़ीस और दस्तावेज़ीकरण लागतों जैसे दीगर ख़र्चों को भी जोड़ लेना चाहिए।
उदाहरण के लिए, अगर आपने शेयर ख़रीदकर बेचे हैं, तो आपका कैपिटल गेन/लॉस (पूँजी लाभ/हानि) निकालने के लिए आपको बिक्री की राशि में से ख़रीदी की राशि और उस कमीशन को घटा देना चाहिए, जो आपने शेयर ख़रीदते-बेचते वक़्त दिया। (लाभ या हानि = बेचने का भाव - ख़रीदने का भाव - अन्य ख़र्चे)।
इसका उदाहरण देखें। यह मान लें कि आपने 5,000 रुपये के शेयर ख़रीदे और उन्हें बाद में 6,000 रुपये में बेच दिया। यह भी मान लें कि ख़रीदते वक़्त आपने ब्रोकरेज में 25 रुपये दिए और बेचते समय 30 रुपये दिए। तो गणना इस तरह होगी:
6000 - 5000 - 25 - 30 = 945
इसलिए आपको 945 रुपये का मुनाफ़ा या पूँजी लाभ हुआ है, हालाँकि यह 1,000 रुपये दिख रहा था (6,000 रुपये - 5,000 रुपये)। आपको 945 रुपये के हिसाब से कैपिटल गेन्स टैक्स की गणना करनी चाहिए।
कैपिटल गेन्स टैक्स
कैपिटल गेन्स टैक्स वह टैक्स है, जो आपके कमाए हुए कैपिटल गेन्स पर लगता है। कैपिटल गेन्स टैक्स दो तरह के होते हैं: शॉर्ट टर्म (अल्पकालीन) और लॉन्ग टर्म (दीर्घकालीन), जो इस बात पर निर्भर करता है कि आपने ख़रीदने के कितने समय बाद अपने एसेट बेचे हैं। यह अवधि अलग-अलग एसेट्स के लिए अलग-अलग होती है। इसके अलावा, कुछ एसेट्स के मामले में आप शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में से कोई एक देना होता है, जबकि कुछ एसेट्स के मामले में आपको सिर्फ़ शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना होता है।

मिसाल के तौर पर, अगर आप सोना ख़रीदते हैं और तीन साल के भीतर इसे बेच देते हैं, तो आपको शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा। अगर आप इसे तीन साल बाद बेचते हैं, तो आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा। लेकिन शेयरों के मामले में अगर आप उन्हें एक साल के भीतर बेच देते हैं, तो आपको शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा। लेकिन अगर आप उन्हें एक साल रखने के बाद बेचते हैं, तो आपको एक लाख रुपये से ज़्यादा के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर 10 प्रतिशत की दर से टैक्स देना होगा।
शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स आम तौर पर आपकी आमदनी में जोड़ दिए जाते हैं। इसके बाद आपकी आमदनी जिस टैक्स स्लैब में आती है, उसके हिसाब से टैक्स लगता है। इसका अपवाद शेयर और इक्विटी म्युचुअल फ़ंड हैं, जहाँ आपको शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स पर 15 प्रतिशत की सीधी दर से टैक्स देना होता है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर टैक्स फ़्लैट रेट पर लगता है (जिसकी समय-समय पर समीक्षा होती है) - लेकिन मुद्रास्फीति के प्रभाव को भी शामिल किया जाता है, जिसे इंडेक्सेशन कहा जाता है। सटीक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन निकालने के लिए इंडेक्सेशन का इस्तेमाल करें, जिससे आपका ख़रीदी का भाव बढ़ जाएगा। इसके बाद इसे ख़रीदी भाव को बिक्री भाव से घटा दें। विस्तृत विवरण के लिए कृपया आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर जाएँ।

इसके अलावा इंडेक्सेशन भी देखें
चक्रवृद्धि ब्याज
चक्रवृद्धि ब्याज में आप न सिर्फ़ मूल धन पर ब्याज कमाते हैं - बल्कि अब तक कमाए हुए ब्याज पर भी ब्याज कमाते हैं। यह सरल ब्याज से भिन्न होता है, जिसमें आपको सिर्फ़ मूल धन पर ही ब्याज मिलता है। इसलिए चक्रवृद्धि ब्याज से आपको अपने निवेशों पर ज़्यादा लाभ होता है।
मिसाल के तौर पर, अगर आप 8 प्रतिशत की ब्याज दर पर 5,000 रुपये का निवेश 5 साल के लिए करते हैं, तो आपको 5 साल के अंत में जो ब्याज मिलता है वह इस प्रकार होगा:
= मूल धन (1 + ब्याज दर/100)^अवधि - मूल धन
= 5000 (1 + 8/100)^5 - 5000
= 5000 (1.08)^5 - 5000
= 7346.64 - 5000 = 2,346.64
अगर ब्याज एक साल से कम समय में चक्रवृद्धि हो रहा है, जैसे हर छह महीने में, तो आपको ज़्यादा ब्याज मिलेगा। इस मामले में इसकी गणना का फ़ॉर्मूला यह होगा P (1 + R/100 x T)^NT। यहाँ N अवधि है और T बताता है कि एक साल में आप कितनी बार ब्याज कमाते हैं।
= 5000 (1 + 8/100 x 2)^2 x 5 - 5000
= 5000 (1 + 0.04)^2 x 5 - 5000
= 5000 (1.48) - 5000
= 7401 - 5000 = 2401
इसलिए जब चक्रवृद्धि ब्याज एक साल में ज़्यादा बार मिलता है, तो आपको ज़्यादा ब्याज मिलता है, भले ही ब्याज दर समान हो। अगर आपको मूल धन पर सरल ब्याज मिल रहा होता, तो 5 साल के अंत में आपको सिर्फ़ 2,000 रुपये ब्याज मिलता।
साधारण ब्याज भी देखें

जीवनयापन की लागत
“जीवनयापन की लागत” का मतलब है धनराशि की वह मात्रा, जिसकी ज़रूरत जीवनयापन के एक निश्चित स्तर को क़ायम रखने के लिए होती है। इसकी गणना करने के लिए भोजन, कपड़े, ईंधन, दवाएँ, यातायात आदि वस्तुएँ और सेवाएँ ख़रीदने की औसत लागत को जोड़ा जाता है। अगर मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो जीवनयापन की लागत भी बढ़ती है। जीवनयापन की लागत वेतन, न्यूनतम मज़दूरी, टैक्स छूटों आदि को भी प्रभावित करती है।
जीवनयापन की लागत भारत में हर शहर के हिसाब से अलग-अलग होती है। मिसाल के तौर पर, महानगरों और बड़े शहरों में जीवनयापन की लागत ज़्यादा होती है। बड़े शहरों में भोजन, कपड़े, मकान किराये और यातायात हर चीज़ की लागत छोटे शहरों, कस्बों और गाँवों से ज़्यादा होगी। इसकी भरपाई करने के लिए बड़े शहरों में वेतन और न्यूनतम मज़दूरी ज़्यादा होती है।

डिविडेंड
डिविडेंड वह राशि है, जो कोई कंपनी अपने शेयरधारकों को या म्युचुअल फ़ंड अपने यूनिटधारकों को अपने कमाए हुए मुनाफ़े में से देते हैं। मुनाफ़े में से कितनी राशि दी जाए, इसका निर्णय कंपनी या म्युचुअल फ़ंड करता है।
पहले डिविडेंड की घोषणा शेयर या यूनिट की फ़ेस वैल्यू के प्रतिशत के रूप में की जाती थी। मिसाल के तौर पर, किसी कंपनी ने 10 रुपये फ़ेस वैल्यू वाले शेयर पर 40 प्रतिशत डिविडेंड घोषित किया, जबकि शेयर बाज़ार में उसका भाव 200 रुपये है। 10 रुपये फ़ेस वैल्यू के हर शेयर पर 40 प्रतिशत का मतलब है एक शेयर पर 4 रुपये डिविडेंड (10 x 40/100)। अगर आपके पास 50 शेयर हैं, तो आपको डिविडेंड में 50 x 4 = 200 रुपये मिलेंगे।

लेकिन निवेशक कई बार यह मानने की ग़लती कर बैठते हैं कि जो प्रतिशत घोषित किया गया है, वह शेयर के मौजूदा बाज़ार भाव पर था। ऊपर दिए उदाहरण में शेयर का बाज़ार भाव 200 रुपये था, यानी अगर आपके पास इसके 50 शेयर थे, तो आपके निवेश का बाज़ार भाव 10,000 रुपये होता (50 x 200)। इस पर 40 प्रतिशत डिविडेंड का मतलब 4,000 रुपये होता। 200 रुपये कमाने और 4,000 रुपये कमाने के बीच भारी फ़र्क़ है, सही है? इसलिए फ़ेस वैल्यू के प्रतिशत के रूप में डिविडेंड की घोषणा करना तकनीकी दृष्टि से तो सही था, लेकिन इसमें निवेशकों द्वारा ग़लत व्याख्या करने की काफ़ी गुंजाइश थी।
यही उन म्युचुअल फ़ंडों के साथ भी होता था, जहाँ डिविडेंड की घोषणा यूनिट की फ़ेस वैल्यू के प्रतिशत के रूप में की जाती थी। जब ज़्यादा प्रतिशत डिविडेंड घोषित होता था, तो कई निवेशक योजना या आँकड़ों की सच्चाई को समझे बिना इन योजनाओं में निवेश करने के लिए दौड़ पड़ते थे।
इसलिए सेबी (सिक्युरिटीज़ ऐंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया) ने कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे प्रति शेयर के हिसाब से डिविडेंड की घोषणा करें। इस नियम के अनुसार ऊपर दिए उदाहरण में कंपनी 40 प्रतिशत प्रति शेयर के बजाय 4 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित करती है। इस तरह निवेशकों के लिए अपने सटीक मुनाफ़े का हिसाब लगाना ज़्यादा आसान हो गया है। अब अगर आपके पास 50 शेयर हैं, तो आप जानते हैं कि प्रति शेयर 4 रुपये के हिसाब से आपको 200 रुपये डिविडेंड मिलेगा।

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