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चाय सी मोहब्बत / Chaay Si Mohabbat PDF Download Free Hindi Book by Paritosh Tripathi

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

नाम / Nameचाय सी मोहब्बत / Chaay Si Mohabbat
लेखक / Author
आकार / Size21.6 MB
कुल पृष्ठ / Pages59
Last UpdatedApril 2, 2022
भाषा / Language Hindi
श्रेणी / Category

लिखना मेरी आदत नहीं है, लिखना इबादत है।

और इबादत ही तो मोहब्बत है... मोहब्बत मुझे चाय-सी लगती है।

चाय और मोहब्बत दोनों की तासीर गर्म होती है पर दोनों ही रूह में ताज़गी और ठंडक भरती हैं। ये कविताएँ और इनका कवि कैसा है यह फ़ैसला तो सुधी पाठक करेंगे पर यह आपके ज़ेहन को मोहब्बत से सराबोर करेंगी ऐसा मेरा विश्वास है। जब हम कविता रचने या चाय बनाने की प्रक्रिया में होते हैं तब हमें उसके स का पता नहीं होता। ज़िन्दगी में और मोहब्बत में भी ठीक वैसा ही होता है, जब हम प्यार में होते हैं तो बस होते हैं... उसके स से बेपरवाह... अनजान। चाय पी लेने और ज़िन्दगी जी लेने के बाद जो बचता है वही उसका असली हासिल है।

अबतक की ज़िन्दगी का हासिल, आप सबों की इबादतों का जो हासिल है उसे बड़े जतन से सहेजकर आज आपके हवाले करता हूँ।

मोहब्बत के नाम पर कितना कुछ किया जाता है या मोहब्बत अपनी क़समें देकर क्या-क्या करा लेती है, मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है जैसा आप सबके साथ होता है। फ़र्क़ बस यही है कि मैं उसे पन्ने पर रख लेता हूँ। बाद में सारे पन्ने जोड़कर ‘उसे’ वापस करता हूँ और लोग समझते हैं कि मैंने किताब लिखी है। आप जब ‘चाय-सी मोहब्बत’ को सीने पर रखकर या गोद में छुपाकर पढ़ेंगे तो आप मोहब्बत की गरमाहट को महसूस करेंगे।

परितोष त्रिपाठी


पुस्तक का कुछ अंश

 

‘मन पतंग दिल डोर’ के बाद...
पहली बात
आप सब ने मेरी आदत बिगाड़ दी है, तभी तो एक ज़ख़्म के सूखने से पहले दूसरा ज़ख़्म मरहम खोजने आ गया।
मुझे लगता था कि ‘मन पतंग दिल डोर’ के बाद शायद और कुछ लिख नहीं पाऊँगा। मगर अब लगता है कि हम और आप जिस डोर से बँध गए हैं, यह रिश्ता चलता रहेगा। जब तक आप पढ़ते रहेंगे, मैं लिखता रहूँगा।
अभिनेता होना मेरा शौक़ था, फिर व्यवसाय बना... पर लिखना ना मेरा शौक़ है ना व्यवसाय। लिखना मेरे ज़िंदा रहने का सबूत है।
तो आपके सामने आज यह दूसरी किताब आ गई है- ‘चाय-सी मोहब्बत’।
मैं अक्सर जवाब में चाय बोलता हूँ, जब कोई पूछ लेता है चाय लेंगे या कॉफ़ी? पता नहीं क्यों बोलता हूँ। दरअसल, मुझे लगता है चाय मोहब्बत है और कॉफ़ी... fantasy है।
यह किताब भी मोहब्बत की किताब है। मोहब्बत से लिखी गई है और मोहब्बत के लिए लिखी गई है। इसमें काफ़ी अलग क़िस्म की कविताएँ हैं।
कुछ फीकी लगेंगी, कुछ मीठी भी लगेंगी और कुछ कड़क... बस एक हिदायत है, हर पन्ने को फूँक-फूँक के पढ़िएगा।
इस यात्रा में सबसे पहले शुक्रगुज़ार हूँ ‘मन पतंग दिल डोर’ के पाठकों का, जिन्होंने लिखते रहने की हिम्मत दी।
हिंद युग्म प्रकाशन तथा शैलेश भारतवासी भैया का, जिनकी वजह से मैं पाठकों तक पहुँच पाता हूँ। शैलेश भैया मुझ पर मुझ से ज़्यादा भरोसा करते हैं।
शुक्रगुज़ार हूँ माई (दमयंती त्रिपाठी) का जिसके लिए मैं सिर्फ़ ‘सिप्पू’ हूँ। मेरे बड़े भाई आशुतोष त्रिपाठी का, जो मेरे सबसे बड़े आलोचक हैं।
बड़ी बहनें- डॉक्टर अर्चना त्रिपाठी, अल्पना त्रिपाठी और गीता कपूर दीदी का जो बिना किसी शर्त के प्रेम करती हैं।
आपका
परितोष त्रिपाठी
मुंबई, 2021
कविता क्रम
पहला आशिक़
अगर हम होते
इश्क़ का मोड़
लौट आओ
निकाह पढ़ लो
तेरे ना होने पर
पहले जैसे
मैं मिल नहीं रहा
पास बुला लेना
सच में
जब तुम थी
फ़्लैशबैक
जिस्मानी-रूहानी
ये सब करना है
चाय-सी मोहब्बत
दिल नहीं मन आया है
अमृता प्रीतम
नज़्म की नज़्म
पूरा का पूरा तुम्हारा
Engagement Ring
तीन तमन्नाएँ
चिट्ठी
नुक़्ता
सिलसिला
लड़कियाँ
माई मुस्कुराती है
हिंदी वाली माँ
अदाकारा
‘सितारा’
रौशनदान
मौसम
पीछे के पीछे
प्यार होता है
तिनका-तिनका
हम साथ नहीं रहते
तुम शायर हो
मोहब्बत से मुलाक़ात
दरख़्त चला गया
Visiting Hours
उम्मीद के फूल
शहर मत उगाना
सवाल तुम्हारा
सर्दियाँ
याद है
रोज़ भुलाया करता हूँ
क़रीब आ गए
हम ही तो हैं
सब अच्छा-अच्छा है
अब भी ऐसी हो क्या
भरोसे की बारिश
तब लिखता हूँ
#
सुनो!
तुमसे पहले चाय लगी थी मेरे होंठों से...
#
कल देखा था उसको तकिया ख़रीदते हुए
मन में आया पूछ लूँ मेरे हाथ में क्या बुराई थी
पहला आशिक़
मुझसे पहले जिसने दर्द सहा होगा
मुझसे पहले जो आशिक़ रहा होगा
मुझसे पहले जो इरादा भाँप लेता था
मुझसे पहले जो बदन का ताप लेता था
मुझसे पहले जिसे यादों ने झकझोरा होगा
मुझसे पहले जिसने अक्षर-अक्षर जोड़ा होगा
मुझसे पहले जिसके सपने नीले थे
मुझसे पहले जिसके तकिए गीले थे
मुझसे पहले जिसने दिल बेक़रार किया
मुझसे पहले जिसने क़लम को हथियार किया
कह गया जो सब कुछ, बिना लिए किसी का नाम
दुनिया के पहले आशिक़, पहले शायर को सलाम
#
तेरा मेरा मिलना अक्सर कैसा
सफ़ेद पन्ने पे काले अक्षर जैसा...
अगर हम होते.....

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