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बफेट एंड ग्राहम से सीखें / Buffett & Graham Se Seekhen Share Market Mein Invest karna PDF Download Free Hindi Book by Aryaman Dalmia

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

नाम / Name 📥बफेट एंड ग्राहम से सीखें / Buffett & Graham Se Seekhen Share Market Mein Invest Karna
लेखक / Author 🖊️
आकार / Size 0.8 MB
कुल पृष्ठ / Pages 📖51
Last UpdatedMarch 13, 2022
भाषा / Language Hindi
श्रेणी / Category,
यह पुस्तक निवेश के उन मूलभूत सिद्धांतों को, वास्तविक उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करती है, जिन्हें वैज्ञानिक निवेश की पद्धति के जनक, बेंजामिन ग्राहम ने प्रतिप्रदित किया है। इसमें उन साधारण, किंतु बेहद कारगर दिशा-निर्देशों का भी विश्लेषण किया गया है, जिन्हें अपनाते हुए उनके सबसे मेधावी छात्र वॉरेन बफे ने निवेश की दुनिया की चुनौतियों को पार कर दुनिया के तीन सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक बनने का सफर तय किया। इसका भी वर्णन किया गया है कि विस्तृत विश्लेषण, स्वतंत्र सोच और अनुशासन की मदद से कैसे लाभ हासिल किया जा सकता है, तथा कैसे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए बाजार के रुझानों को नजरअंदाज कर देना चाहिए। भारतीय बाजारों के सफलतम निवेशकों का भी उदाहरण के तौर पर इसमें जिक्र है—असाधारण रूप से सफल और क्रिस कैपिटल के संस्थापक आशीष धवन, मॉर्गन स्टेनले में इमर्जिंग मार्केट्स के पूर्व प्रमुख माधव धर; चैतन्य डालमिया, जिनकी स्वयं की कंपनी का प्रदर्शन तमाम दूसरी निधियों के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर है, और संजय बख्शी, जो मूल्य निवेश की शिक्षा देते हैं तथा भारत के लिए एक विशिष्ट कोष भी चलाते हैं। इन उदाहरणों से यह स्पष्ट हो जाता है कि निवेशकों ने किस प्रकार ग्राहम और बफे के तरीकों को अपनाया और तर्कसंगत सोच के साथ असाधारण लाभ कमाया है।

पुस्तक का कुछ अंश

1.
पुस्तक रचना क्यों और कैसे?
चाहे आप भरोसा करें कि आप कुछ कर सकते या नहीं भी, आप ठीक होते हैं।
—हेनरी फोर्ड
बेंजामिन ग्राहम और वॉरेन बफे निवेश की दुनिया के अत्यंत सम्मानित लोगों में हैं। हालाँकि, बहुत से युवाओं ने उनके बारे में सुन रखा है और मीडिया में पढ़ा भी है, लेकिन कुछ ही विस्तार से उनके बारे में जानते हैं। बफे के बारे में मुझे खुद कुछ साल पहले ही पता चला, जब मेरे पिताजी ने उन्हें ‘परम गुरु’ बताया। कहने की आवश्यकता नहीं कि मेरा कुतूहल जाग उठा। मुझे जल्दी ही उनके बारे में अनेक पुस्तकें पढ़ने को मिल गईं। फिर उस ‘परम गुरु’ के शिक्षक बेंजामिन ग्राहम पर भी कुछ पुस्तकें और लेख मिल गए।
पिछले डेढ़ साल में मैंने इन दोनों के बारे में काफी कुछ पढ़ा है। जिस पुस्तक से मैंने शुरुआत की, वह थी जेम्स ओलौग्लिन की ‘दी रीयल वॉरेन बफे’। इसके बाद मैंने मैरी बफे और डेविड क्लार्क की ‘दि टाओ ऑफ वॉरेन बफे’ पढ़ी। मैंने वॉरेन बफे के साझीदार और गहरे दोस्त चार्ली मंगर की ‘पुअर चार्लीज आलमनैक’ भी पढ़ डाली। पिछले एक दशक में मूझे ‘फॉर्चून’ पत्रिका में स्वयं बफे और कैरोल लूमिस के लिखे कई उत्तम लेख भी पढ़ने को मिले। मैंने बेंजामिन ग्राहम की पुस्तक ‘दि इंटेलिजेंट इनवेस्टर’ के कई अंश भी पढ़े।
इसके अलावा, वॉरेन बफे ने सन् 2009 और 2010 के बीच शेयरधारकों को जो पत्र लिखे थे, वे भी मैंने पढ़े। ये मुझे बहुत हृदयग्राही लगे। ‘न्यूयॉर्क रिव्यू ऑफ बुक्स’ की वेबसाइट पर संयोगवश मुझे सुइ हापर्न का लेख ‘मेकिंग इट’ पढ़ने का अवसर मिला। इसमें तीन पुस्तकों से लिये गए विचारों का समाकलन है। ये हैं एलिस श्रोडर की ‘दी स्नोबॉल’, मैल्कम ग्लैडवेल की ‘आउटलायर्स’ और ज्यॉफ कॉल्विन की ‘टेलेंट इज ओवररेटेड’। अभी भी मैं बफे के बारे में और अधिक जानकारी की तलाश में था। तभी मुझे 2009 के आखिरी महीनों में कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हुए सी.एन.बी.सी. के एक असाधारण टी.वी. शो का पता चला। इसमें बिजनेस स्कूल के विद्यार्थियों ने वॉरेन बफे और बिल गेट्स से अनेक प्रकार के प्रश्न पूछे थे। अंत में मैं सेथ क्लार्मन की एक लुप्त हो चुकी प्रतिष्ठित पुस्तक ‘मार्जिन ऑफ सेफ्टी’ ढूँढ़ने में सफल रहा। मेरे खयाल से इनकी पुरानी प्रतियाँ amazon.com पर एक हजार डॉलर से भी अधिक मूल्य पर उपलब्ध हैं।
जिन दिनों मैं ये पुस्तकें पढ़ रहा था, मैंने अपने पिता गौरव डालमिया से चर्चा की, जो खुद भी बहुत सफल निवेशक हैं। मैंने अपने चाचा चैतन्य डालमिया से भी बात की, जिनका शेयर बाजार में निवेश करने का बहुत अच्छा रिकॉर्ड है। मुझे श्री आशीष धवन से भी काफी कुछ मिला। वे शायद देश के सफलतम निजी शेयर निवेशक हैं। एम.बी.ए. के छात्रों को व्यावहारिक वित्त-प्रबंध पढ़ानेवाले और निवेशक संजय बक्शी से भी मुझे सामग्री मिली। श्री संजय ने तो निवेश में दिलचस्पी रखनेवाले युवाओं के लिए ‘लोल्लापालूजा’ नाम से एक याहू गु्रप भी बना रखा है। मैंने मोर्गन स्टेनले में उभरते बाजारों में निवेश के पूर्व प्रमुख माधव धर से भी बात की। उन्होंने हाल ही में ‘गेट-वे टू इंडिया’ नाम से एक निवेश कंपनी भी बनाई है।
जब मैंने बेंजामिन ग्राहम और वॉरेन बफे के बारे में पढ़ना शुरू किया तो मुझ में उम्मीद जगी कि निवेश के बारे में भी सीखूँ । पर जब मैं इस राह पर आगे बढ़ा तो मैंने न केवल अर्थशास्त्र, व्यवसाय-चक्र और वित्तीय विश्लेषण के बारे में सीखा, बल्कि मानव आचरण, विचार-भ्रांतियों एवं चरित्र के बारे में भी सीखा। सबसे बड़ी बात तो यह कि जब मैंने उन बहुत सी पुस्तकों और टिप्पणियों पर मनन किया तो मैंने अपने बारे में बहुत कुछ सीखा—मेरा सोचने का तरीका, मेरी प्राथमिकताएँ और मेरा स्वभाव। इसीलिए इस पुस्तक का शीर्षक है ‘बफे & ग्राहम से सीखें Share Market में Invest करना’ इसमें नेताओं एवं राजनेताओं के उद्धरण भी शामिल किए गए हैं। इनमें से अधिकांश हमारे घर पर अध्ययन-कक्ष में दीवार पर टँगे हैं। बेंजामिन ग्राहम और वॉरेन बफे को पढ़ने और आत्मसात् करने के बाद अब ये मेरे लिए और भी प्रासंगिक हो गए हैं।
2.
क्यों महत्त्वपूर्ण हैं बेंजामिन ग्राहम?
अपना सुख-चैन किसी मानव-स्वीकृत मान्यताओं की अपेक्षा दैवी स्रोत से लो। यह तुम्हें मुक्त कर देता है।
स्टीफन कोवे
1914 का साल। एक 20 वर्षीय मेधावी छात्र कोलंबिया यूनिवर्सिटी से स्नातक बनने वाला था। वह अपनी कक्षा में दूसरे नंबर पर आया। अंग्रेजी, दर्शन और गणित—इन तीन विभागों ने उन्हें अपने यहाँ प्राध्यापक पद की पेशकश की। किसी युवक के लिए यह निश्चय ही बड़ा सम्मानजनक प्रस्ताव था। लेकिन उसकी दिलचस्पी तो वित्त क्षेत्र में थी; अतः उसने कोलंबिया के प्रस्ताव अस्वीकृत कर दिए और सीधे ‘वाल स्ट्रीट’ का रुख किया। यह व्यक्ति बेंजामिन ग्राहम था, जो अंततः ‘पूँजी निवेश का पितामह’ बना। या फिर मुझे कहना चाहिए कि ‘सतत सफल निवेश का पितामह’ बना। कई वर्षों तक एक ब्रांड का व्यापार करनेवाली कंपनी के लिए काम करने के बाद उसने ‘ग्राहम-न्यूमैन कॉरपोरेशन’ की स्थापना की, जो एक अत्यंत सफल म्यूचुअल फंड कंपनी बनी।
ग्राहम के असाधारण लाभ
हालाँकि इतने पहले का विश्वसनीय डाटा प्राप्त करना कठिन है, ‘ग्राहम-न्यूमैन कॉरपोरेशन’ ने ग्राहम के 1956 में सेवामुक्त होने तक 20 वर्ष लगातार 20 प्रतिशत प्रतिवर्ष का लाभ अर्जित किया। उसी अवधि में बाजार सूचकांक ने 12.2 प्रतिशत प्रतिवर्ष का लाभ दिखाया था। तीन साल की अवधि में भी इतना अंतर बड़ी बात है। फिर 20 वर्षों की अवधि के लिए तो यह नितांत आश्चर्यजनक है। बहुत कम लोग इतने लंबे अरसे तक इतनी व्यापकता से बाजार को पटकनी दे सके हैं।
हम निवेश की रणनीति को दो अवधियों में बाँट सकते हैं—एक पूर्व ग्राहम-काल, जब लोग मानते थे कि निवेश अटकलबाजी है, असंगठित है, अनुमान-आधारित और विश्लेषण-दृढ़ता विहीन है। दूसरा ग्राहम व उनके बाद का काल है, जब ग्राहम के तर्क आधारित, आत्म-नियंत्रण व अनुभूत साक्ष्यों पर आधारित सिद्धांत थे, न कि अधकचरी सूचनाओं, अफवाहों या बाजार धारणाओं पर आधारित।
उनका विकास काल
1894 में लंदन में बेंजामिन ग्रॉसबॉम के तौर पर जनमे ग्राहम निवेश की दुनिया को मूलभूत रूप से बदलने में सफल रहे। उनके जीवन की आरंभिक उथल-पुथल एवं अनुभवों ने उनके अपने जीवन को स्वरूप दिया। उनके पिता लंदन के एक अत्यंत सफल व्यापारी थे। बेंजामिन जब एक साल के थे, तब उनका परिवार न्यूयॉर्क आ गया। लेकिन 1903 में ग्रॉसबॉम का निधन हो गया। उनका व्यापार संकट में आ गया और परिवार की धन-समृद्धि घट गई। बेंजामिन की माता ने पाँचवें एवेन्यू के अपने बड़े घर को ‘बोर्डिंग हाउस’ बनाकर गुजारा किया। दुर्भाग्य से उन्होंने स्टॉक मार्केट में सट्टेबाजी के लिए पैसा उधार ले लिया। इससे उनका परिवार लगभग दिवालिया हो गया। किशोर बेंजामिन ग्रॉसबॉस पर इस अनुभव का बड़ा गहरा असर पड़ा। अंततः उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में एक छात्रवृत्ति प्राप्त कर ली और पढ़ाई में अव्वल रहे।
लगभग उन्हीं दिनों दूसरा विश्वयुद्ध छिड़ गया। परिवार ने उनका नाम बदलकर ग्राहम रख लिया, क्योंकि उन दिनों जर्मनी सरीखे नामों को अमेरिका में हीन दृष्टि से देखा जाता था। स्नातक बन जाने के बाद वे भी अपने समय के कई अन्य महत्त्वाकांक्षी लोगों की तरह वाल स्ट्रीट चले गए। वहाँ वे एक प्रख्यात निवेशक बने और उनकी ‘ग्राहम-न्यूमैन कॉरपोरेशन’ अमेरिकी इतिहास की सर्वाधिक सफल म्यूचुअल फंड कंपनियों में से एक बन गई।
ग्राहम की विरासत
बेंजामिन ग्राहम का योगदान ऐसा था कि सन् 1976 में ‘फाइनेंशियल एनालिस्ट्स जर्नल ने लिखा, ‘‘शेयर बंधपत्र (प्रतिभूति) विश्लेषण के क्षेत्र में दूसरे स्थान पर भी किसी व्यक्ति के होने के बारे में सोचना कठिन है।’’ सन् 1934 में डेविड डॉड के साथ उन्होंने अपनी सार्वकालिक प्रतिष्ठित पुस्तक ‘सिक्योरिटी एनालिसिस’ (शेयर विश्लेषण) लिखी। वैज्ञानिक तरीके से निवेश पर लिखी गई यह संभवतः पहली पुस्तक थी। आज हम जिन बहुत सी बातों को आम समझ मानते हैं, वे उन दिनों सामान्य नहीं थीं। उदाहरण के लिए इस पुस्तक में लिखा है, ‘‘निवेश वह क्रिया है, जो गहन विश्लेषण के तहत मूलधन की सुरक्षा और पर्याप्त लाभ दिलाती है। जो क्रिया इस आवश्यकता को पूरा नहीं करती, वह अटकलबाजी ही है।’’ आज यह आम समझ की बात है, लेकिन उन दिनों यह दूसरों से आगे ले जाने वाली थी।
वर्ष 1949 में बेंजामिन ग्राहम ने ‘दि इनटेलिजेंट इनवेस्टर’ लिखी। उन्होंने दशकों तक सफल निवेश करते हुए जो ज्ञान और अनुभव पाया था, यह उसका समाकलन था। वॉरेन बफे के शब्दों में, ‘‘निवेश पर लिखी गई यह सर्वोत्तम पुस्तक है।’’
सरल व सशक्त अंतर्दृष्टि
आगे हम ‘दि इंटेलिजेंट इनवेस्टर’ में व्यक्त कुछ विचार उद्धृत कर रहे हैं, जो मेरे मन में कौंधते हैं—
 अपने 50 वर्ष से अधिक के शेयर बाजार के अनुभव और अवलोकन में हमें एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिला जिसने बाजार का अनुसरण करके लगातार और स्थायी रूप से धन कमाया हो। हमें यह कहने में तनिक भी हिचक नहीं है कि यह रवैया जितना लोकप्रिय है, उतना ही भ्रामक भी है।
 अच्छे निवेश के मूलभूत सिद्धांत एक दशक से दूसरे दशक में बदलते नहीं। लेकिन वित्तीय प्रक्रिया और वातावरण के अनुरूप इन सिद्धांतों को लागू करने में परिवर्तन अवश्य करना चाहिए।
 हम एक भ्रांति को दूर करना चाहते हैं, जो जोर पकड़ रही है। वह यह है कि प्रमुख शेयर कभी भी, किसी भी मूल्य पर खरीदे जा सकते हैं—इस विश्वास के साथ कि अततः ये लाभ ही देंगे। अगर इस बीच घाटा होता है तो भी बाजार के नई ऊँचाइयों पर उठने के बाद उसकी भरपाई हो जाएगी। यह सच नहीं है।
 हालाँकि किसी दूसरे क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि के लिए उत्साह जरूरी हो सकता है, लेकिन ‘वॉल स्ट्रीट’ पर तो यह लगभग निरपवाद रूप से अनर्थकारी होता है।
 हमने अपने पाठकों के लिए दो सबक निकाले हैं। (1) किसी व्यापार में स्पष्ट वृद्धि की संभावनाएँ में उसके निवेशकों के लिए जरूरी नहीं कि स्पष्ट लाभ में तब्दील हों (2) विशेषज्ञों के पास सर्वाधिक उम्मीद वाले उजेगों में सर्वाधिक आशाजनक कंपनियों को चुनने और उनपर ध्यान केंद्रित करने के भरोसेमंद तरीके नहीं होते।
 निश्चय ही निवेशक की मुख्य समस्या—और उसका सबसे बड़ा शत्रु—उसके स्वयं होने की संभावना रहती है।
 क्या पेश किया जा रहा है और उसके लिए क्या भुगतान किया गया—चीजों को इस तरह जोड़ने की आदत निवेश मामले में मूल्यवान गुण होता है। हमारी लोगों को सलाह है कि वे शेयरों की खरीददारी दाल, चावल, साबुन, तेल की तरह करें इत्र की तरह नहीं, जिसमें सभी शेयर एक ही वर्ग के होते हैं।
 बहुत बार भयंकर नुकसान तब हुए जब खरीददार ‘कितने का है’ पूछना भूल गया।
 निवेश की कला में एक खूबी है, जिसे आमतौर पर सराहा नहीं जाता। एक आम निवेशक बहुत कम प्रयास और क्षमता के साथ भी बहुत शानदार न सही, लेकिन अच्छा परिणाम हासिल कर सकता है। लेकिन इस आसानी से पा सकने वाले स्तर में सुधार करने के लिए बहुत अधिक बुद्धिमानी और उसके प्रयोग की आवश्यकता होती है। अगर आप अपनी निवेश योजना में थोड़े से अतिरिक्त ज्ञान और होशियारी का ही इस्तेमाल करेंगे तो सामान्य परिणाम से कुछ अधिक पाने के बजाय आप देखेंगे कि आपने बुरा ही कर दिया।
 निवेश सबसे ज्यादा समझदारी वाला तब होता है, जब वह व्यापार-सरीखा हो। उन योग्य व्यापारियों को देखकर तब हैरानी होती है जब वे ‘वॉल स्ट्रीट’ में अपने उन सभी सिद्धांतों को ताक पर रखकर लेन-देन करते हैं, जिनके दम पर वे अपनी कंपनियों में इतने सफल रहे हैं।
 लाभ कमाने के लिए निवेश उम्मीदों पर नहीं, अंकगणित पर आधारित होना चाहिए।
 अपनी जानकारी और अनुभव पर भरोसा रखें। अगर आपने तथ्यों के आधार पर कोई निष्कर्ष निकाला है और आप जानते हैं कि आपका निर्णय सही है, तो उसपर अमल करें—भले ही दूसरे आप से असहमत हों, या हिचक रहे हों। प्रतिभूति की दुनिया में पर्याप्त जानकारी और परीक्षित निर्णय ध्यान में होने के बाद साहस ही सबसे बड़ा गुण है।
उपर्युक्त बुद्धिमानी की बातें हमें 500 पृष्ठों की इस पुस्तक के लगभग 100 पृष्ठों में उपलब्ध हुई हैं। मेरे विचार में इन बारीकियों को समझने की तरकीब उन्हें केवल पढ़ना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मसात् करना है। उन्हें अपनी दैनिक आदतों में शामिल कर और निवेश करते समय सावधानी के साथ उनका प्रयोग करें। अगर लोगों ने इनको पढ़कर इनपर अमल किया होता तो वे नुकसान या अपर्याप्त लाभ से होनेवाले बहुत से दुःख और पीड़ा से बच सकते थे।
3.
क्यों महत्त्वपूर्ण हैं वॉरेन बफे?
आप वे हैं जो आपकी गहन इच्छा है,
जैसी आपकी चाहत, वैसी आपकी सोच,
जैसे आपकी सोच, वैसे आपके कर्म,
जैसे आपके कर्म, वैसा आपका भाग्य।
—‘उपनिषद्’
ब बेंजामिन ग्राहम ‘वॉल स्ट्रीट’ में अपना कैरियर बना रहे थे तभी बड़ी मंदी का दौर शुरू हुआ, एक और निवेश-गुरु ने इस धरती पर जन्म लिया। वॉरेन बफे का जन्म 1930 में ओमाहा नामक एक छोटे से शहर में हुआ। उनके पिता हॉवर्ड बफे एक सफल व्यापारी और राजनीतिज्ञ थे। उनकी माता लैला गृहिणी थीं।
बफे का आरंभिक जीवन
बहुत छोटी उम्र में ही बफे व्यापार से आकर्षित हुए। किशोर अवस्था में उन्होंने जेब खर्च के पैसों के लिए तरह-तरह के पापड़ बेले। घर-घर जाकर गम, सोडा और पत्रिकाएँ बेचीं, अपने दादा की किराने की दुकान पर काम किया, लोगों के घरों में अखबार पहुँचाए। उनकी कर्मशक्ति असाधारण थी। अपना पहला आयकर रिटर्न उन्होंने मात्र 14 साल की उम्र में भरा। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने समाचार पत्र पहुँचाने के ‘व्यापार’ में इस्तेमाल होने वाली साइकिल और घड़ी के लिए 35 डॉलर की कर-कटौती भी ली। जाहिर है कि उनमें गजब की व्यावसायिक प्रतिभा थी।
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