डॉ. आंबेडकर आत्मकथा एवं जनसंवाद | Dr. Ambedkar Atmakatha Evam Jansamvad Book PDF Download | Read

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पुस्तक का विवरण (Description of Book डॉ. आंबेडकर आत्मकथा एवं जनसंवाद | Dr. Ambedkar Atmakatha Evam Jansamvad PDF Download) :-

नाम : डॉ. आंबेडकर आत्मकथा एवं जनसंवाद | Dr. Ambedkar Atmakatha Evam Jansamvad Book PDF Download
लेखक :
आकार : 2.2 MB
कुल पृष्ठ : 333
श्रेणी : आत्मकथा / Autobiographyदलित साहित्य / Dalit Sahityaभाषण / Speech
भाषा : हिंदी | Hindi
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हर व्यक्ति का अपना जीवनदर्शन होना चाहिए; क्योंकि हर व्यक्ति के पास ऐसा मानक होना चाहिए; जिससे वह अपने चरित्र को माप सके। यह दर्शन कुछ और नहीं; चरित्र मापने का एक मानक है। सकारात्मक रूप से मेरे सामाजिक दर्शन को मात्र तीन शब्दों में बतलाया जा सकता है :स्वतंत्रता; समानता एवं बंधुत्व। मेरे दर्शन का आधार धर्म में है; राजनीति विज्ञान में नहीं। मैंने इसे महात्मा बुद्ध के उपदेशों से लिया है। उन्हें मैं अपना गुरु मानता हूँ। उनके दर्शन में स्वतंत्रता तथा समानता का अपना एक स्थान है; लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि असीमित स्वतंत्रता समानता को नष्ट कर देती है तथा पूर्ण समानता से स्वतंत्रता का हनन होता है।

—इसी पुस्तक से

डॉ. बाबासाहब आंबेडकर एक राष्ट्रीय नेता थे। उन्हें मात्र दलित नेता कहना; उनकी विद्वत्ता; जनआंदोलनों; सरकार में उनकी भूमिका के साथ न्याय नहीं होगा। युगों पुरानी जाति आधारित अन्यायपूर्ण और भेदभावकारी समाज में सामाजिक समानता और सांस्कृतिक एकता के जरिए लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने का उनका व्यापक दृष्टिकोण जगजाहिर है। मानवाधिकारों के राष्ट्रवादी और साहसी नेता के रूप में उनके भाषणों में आधुनिक भारत की सामाजिक चेतना को जगाने के लिए उनके जीवनपर्यंत समर्पण की झलक मिलती है।
प्रखर मानववादी डॉ. आंबेडकर के संपूर्ण जीवनदर्शन और प्रेरणाप्रद व्यक्तित्व का दिग्दर्शन कराते उनके भाषणों का पठनीय संकलन।
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Every person should have his own philosophy of life; Because every person should have such a standard; So that he can measure his character. This philosophy is nothing else; Character is a standard of measurement. My social philosophy can be summed up positively in just three words: liberty; Equality and Fraternity. The basis of my philosophy is in religion; Not in political science. I have taken it from the teachings of Mahatma Buddha. I consider him my teacher. Liberty and equality have a place of their own in his philosophy; But he also said that unlimited freedom destroys equality and complete equality leads to violation of freedom.
—from the same book
Dr. Babasaheb Ambedkar was a national leader. Calling him just a Dalit leader; his scholarship; mass movements; Justice will not be done to his role in the government. His broad vision of building a democratic republic through social equality and cultural unity in an age-old caste based unjust and discriminatory society is well known. As a nationalist and courageous leader of human rights, his speeches reflect his life-long dedication to awakening the social consciousness of modern India.
A readable compilation of the speeches of the intense humanist Dr. Ambedkar, guiding his entire life philosophy and inspirational personality.
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पुस्तक का कुछ अंश (डॉ. आंबेडकर आत्मकथा एवं जनसंवाद | Dr. Ambedkar Atmakatha Evam Jansamvad PDF Download)

भारतरत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर, जो स्नेह से बाबासाहब कहे जाते हैं, निश्चित ही भारत के सर्वाधिक यशस्वी सपूतों में से एक हैं। वे भारत के सामाजिक राजनीतिक मंच पर 1920 के दशक के प्रारंभ में प्रकट हुए और ब्रिटिश राज से अंत तक भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक कायाकल्प के अग्रस्थान में रहे। सन् 1947 में स्वतंत्रता के बाद से सन् 1956 में मृत्युपर्यंत आधुनिक भारत की नींव रखने में डॉ. आंबेडकर ने महत्त्वपूर्ण एवं अनूठी भूमिका निभाई।
डॉ. आंबेडकर का जीवन एक अविश्वसनीय आख्यान है: एक अस्पृश्य बालक, बचपन से जवानी तक कदम- कदम पर अपमानित, सभी विवशताओं को पार करते हुए वैश्विक स्तर के विश्वविद्यालयों से उच्चतम डिग्रियाँ प्राप्त करता है। इसके बाद वे अपना जीवन अन्यायपूर्ण एवं मानव अधिकारों से वंचित जातिबद्ध पुरानी सामाजिक व्यवस्था के विनाश हेतु समर्पित कर देते हैं। परिवार के किसी सौभाग्य या किसी राजनीतिक वंशावली के बिना ही केवल कमरतोड़ मेहनत, दृढ़निश्चय, उच्चतम साहस एवं स्वार्थरहित बलिदान के बल पर, जबरदस्त राजनीतिक विरोध तथा सामाजिक भेदभाव पर विजय पाते हुए वे स्वतंत्र भारत के संविधान के प्रधान निर्माता बन जाते हैं। [adinserter block=”1″]
तदुपरांत वे इस सकारात्मक कार्य के लिए रक्षाकवच बनाने के उद्देश्य से एक अधिक न्याययुक्त समाज, जो लाखों-करोड़ों पददलित लोगों को सामाजिक न्याय दे सके, उसकी स्थापना के कार्य में लग जाते हैं और इस प्रकार सामाजिक न्याय एवं तार्किकता पर आधारित एक नए भारत के निर्माण की बुनियाद रखते हैं। इस प्रक्रिया में वे न केवल भारतीय गणतंत्र के साहसी रक्षक वरन् आधुनिक भारत के सजग प्रहरी भी बनते हैं।
कोई आश्चर्य नहीं कि हमारे राष्ट्र के इतिहास में जितने नेता हुए हैं उनमें सबसे अधिक मूर्तियाँ डॉ. आंबेडकर की ही लगी हैं। इन मूर्तियों में वे एक हट्टे-कट्टे, नीले सूट और लाल टाई पहने हाथ में पुस्तक लिये हुए, जो निश्चित ही भारतीय संविधान है, दिखाए जाते हैं। ऐसी मूर्तियाँ सारे देश में हर जगह देखी जा सकती हैं — गाँवों में, शहरों में और अकसर चौराहों पर। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि प्रत्येक वर्ष 6 दिसंबर (डॉ. आंबेडकर की निर्वाण तिथि) को लगभग 20 लाख लोग मुंबई की चैत्य भूमि पर अपने नायक, जिसको वे अपने रक्षक के रूप में पूजते हैं, उनको श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित होते हैं। यह भी आश्चर्य की बात नहीं है कि अगस्त 2012 में कुछ टी.वी. चैनलों (हिस्टरी, टी.वी. 18 और सी. एन. एन. आई.बी.एन.) द्वारा कराए गए इ मतदान में उन्हें (महात्मा गांधी के बाद) सर्वश्रेष्ठ भारतीय चुना जाता है।
इस पृष्ठभूमि में स्पष्टतः यह भारी अन्याय होगा यदि उन्हें केवल दलितों के नेता के रूप में पहचाना जाए, जैसा…
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Bharat Ratna Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar, fondly called Babasaheb, is certainly one of the most illustrious sons of India. He appeared on the socio-political stage of India in the early 1920s and remained at the forefront of India’s social, cultural, economic and political transformation from the end of the British Raj. After independence in 1947 till his death in 1956, Dr. Ambedkar played an important and unique role in laying the foundation of modern India.
Dr. Ambedkar’s life is an incredible narrative: an untouchable child, humiliated at every step from childhood to youth, overcoming all odds to obtain the highest degrees from universities globally. After this he dedicates his life to the destruction of the caste based old social system which is unjust and deprived of human rights. Without any family fortune or any political pedigree, only back-breaking hard work, determination, supreme courage and

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हमने डॉ. आंबेडकर आत्मकथा एवं जनसंवाद | Dr. Ambedkar Atmakatha Evam Jansamvad PDF Book Free में डाउनलोड करने के लिए Google Drive की link नीचे दिया है , जहाँ से आप आसानी से PDF अपने मोबाइल और कंप्यूटर में Save कर सकते है। इस क़िताब का साइज 2.2 MB है और कुल पेजों की संख्या 333 है। इस PDF की भाषा हिंदी है। इस पुस्तक के लेखक डॉ० भीमराव अम्बेडकर / Dr. Br Ambedkar, हैं। यह बिलकुल मुफ्त है और आपको इसे डाउनलोड करने के लिए कोई भी चार्ज नहीं देना होगा। यह किताब PDF में अच्छी quality में है जिससे आपको पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। आशा करते है कि आपको हमारी यह कोशिश पसंद आएगी और आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ डॉ. आंबेडकर आत्मकथा एवं जनसंवाद | Dr. Ambedkar Atmakatha Evam Jansamvad की PDF को जरूर शेयर करेंगे।

Q. डॉ. आंबेडकर आत्मकथा एवं जनसंवाद | Dr. Ambedkar Atmakatha Evam Jansamvad किताब के लेखक कौन है?
 

Answer.

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