Share This Book

बड़ी बेगम / Badi Begum PDF Download Free in Hindi by Acharya Chatursen

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

नाम / Nameबड़ी बेगम / Badi Begum
लेखक / Author
आकार / Size1.5 MB
कुल पृष्ठ / Pages128
Last UpdatedMarch 10, 2022
भाषा / Language Hindi
श्रेणी / Category,

बड़ी बेगम की कई कहानियों में भी मुगलकाल के इतिहास की झलक मिलती है। उनकी पहली कहानी 'सच्चा गहना,' जो इस पुस्तक में भी सम्मिलित है, उस समय की लोकप्रिय मासिक पत्रिका गृहलक्ष्मी में 1917-1918 में प्रकाशित हुई थी। उनकी बहुआयामी प्रतिभा और भाषा पर पकड़ उनके लेखन को विशेष पहचान देती है।

पुस्तक का कुछ अंश :-

दिन ढल गया था और ढलते हुए सूरज की सुनहरी किरणें दिल्ली के बाज़ार में एक नयी रौनक पैदा कर रही थीं। अभी दिल्ली नयी बस रही थी। आगरे की गर्मी से घबराकर बादशाह शाहजहाँ ने जमुना के किनारे अर्द्धचन्द्राकार यह नया नगर बसाया था। लाल किला और जामा मस्जिद बन चुकी थी और उनकी भव्य छवि दर्शकों के मन पर स्थायी प्रभाव डालती थी। फैज़ बाज़ार में सभी अमीर-उमरावों की हवेलियाँ खड़ी हो गयी थीं। इस नये शहर का नाम शाहजहानाबाद रखा गया था, परन्तु पठानों की पुरानी दिल्ली की बस्ती अभी तक बिल्कुल उजड़ नहीं चुकी थी बल्कि कहना चाहिए कि इस शाहजहानाबाद के लिए बहुत सा मलबा और समान पुरानी दिल्ली के महलात के खण्डहरों से लिया गया था, जो पुराने किले से हौज़ खास और कुतुबमीनार तक फैले हुए थे।

नदी की दिशा को छोड़कर बाकी तीनों ओर सुरक्षा के लिए पक्की पत्थर की शहरपनाह बन चुकी थी, जिसमें बारह द्वार और सौ-सौ कदमों पर बुर्ज बने हुए थे। शहरपनाह के बाहर 5-6 फुट ऊँचा कच्चा पुरखा था। सलीमगढ़ का किला बीच जमुना में था जो एक विशाल टापू प्रतीत होता था और जिसे बारह खम्भों वाला पुख्ता पुल लाल किले से जोड़ता था। अभी इस नगर को बने तीस ही बरस हुए थे, फिर भी यह मुगल साम्राज्य की राजधानी के अनुरूप शोभायमान नगरी की सुषमा धारण करता था।

शहरपनाह नगर और किले दोनों को घेरे थी। यदि शहर की उन बाहरी बस्तियों को जो दूर तक लाहौरी दरवाज़े तक चली गयी थीं और उस पुरानी दिल्ली की बस्तियों को, जो चारों ओर दक्षिण-पश्चिम भाग में फैली थीं-मिला लिया जाए तो जो रेखा शहर के बीचों-बीच खींची जाती, वह साढ़े चार या पाँच मील लम्बी होती। बागात का विवरण पृथक् है, जो सब शहज़ादों, अमीरों और शहज़ादियों ने पृथक्-पृथक् लगाये थे।

शाही महलसरा और मकान किले में थे। किला भी लगभग अर्द्धचन्द्राकार था, इसकी तली में जमुना नदी बह रही थी। परन्तु किले की दीवार और जमुना नदी के बीच बड़ा रेतीला मैदान था जिसमें हाथियों की लड़ाई दिखाई जाती। यहीं खड़े होकर सरदार, अमीर और हिन्दू राजाओं की फौजें झरोखे में खड़े बादशाह के दर्शन किया करते थे। किले की चहारदीवारी भी पुराने ढंग के गोल बुज़ों की वैसी ही थी जैसी शहरपनाह की दीवार थी। यह ईंटों और लाल पत्थर की बनी हुई थी इस कारण शहरपनाह की अपेक्षा इसकी शोभा अधिक थी। शहरपनाह की अपेक्षा यह ऊँची और मज़बूत भी थी, उसपर छोटी-छोटी तोपें चढ़ी हुई थीं, जिनका मुँह शहर की ओर था।

Download बड़ी बेगम / Badi Begum PDF Book Free,बड़ी बेगम / Badi Begum PDF Book Download kare Hindi me , बड़ी बेगम / Badi Begum Kitab padhe online , Read Online बड़ी बेगम / Badi Begum Book Free, बड़ी बेगम / Badi Begum किताब डाउनलोड करें , बड़ी बेगम / Badi Begum Book review, बड़ी बेगम / Badi Begum Review in Hindi , बड़ी बेगम / Badi Begum PDF Download in English Book, Download PDF Books of   आचार्य चतुरसेन शास्त्री /Acharya Chatursen   Free,   आचार्य चतुरसेन शास्त्री /Acharya Chatursen   ki बड़ी बेगम / Badi Begum PDF Book Download Kare, बड़ी बेगम / Badi Begum Novel PDF Download Free, बड़ी बेगम / Badi Begum उपन्यास PDF Download Free, बड़ी बेगम / Badi Begum Novel in Hindi, बड़ी बेगम / Badi Begum PDF Google Drive Link, बड़ी बेगम / Badi Begum Book Telegram

Download
Buy Book from Amazon
हमारे Telegram चैनल से जुड़े। To Get Latest Notification!

Related Books

Shares