Share This Book

आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan PDF Download Free Hindi Book by Kamleshwar 

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

नाम / Name 📥आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan
लेखक / Author 🖊️
आकार / Size 1.6 MB
कुल पृष्ठ / Pages 📖145
Last UpdatedApril 16, 2022
भाषा / Language Hindi
श्रेणी / Category

पिछले दिनों कमलेश्वर को पाकिस्तान जाने का अवसर मिला लेखकों के सम्मेलन में। वहाँ रहकर, छोटे-बड़े, सभी व्यक्तियों से मिलकर, पाकिस्तानी लेखकों और लेखिकाओं से खुले दिल से बातें करके, वहाँ की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को देख-भाल कर जो अनुभव उन्होंने प्राप्त किए, उन्हें अपने खास अन्दाज़ में लिखा है। पाकिस्तान आज एक कठिन दौर से गुजर रहा है। अनेक विरोधाभासों, विषमताओं और विसंगतियों में लोग जी रहे हैं। जहाँ एक ओर जागीरदारी की। एक ओर सरकारी तौर पर शराबबन्दी है तो दूसरी ओर अमीरों के घर-घर में मयखाने खुले हैं। इन्हें पढ़कर आज के पाकिस्तान का सजीव चित्र आपके सामने आएगा। इस पुस्तक का एक विशेष प्रसंग है उन कैदियों के पत्र जो उन्होंने कमलेश्वर को लिखे। जो हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के जेलों में कई वर्षों से बन्द हैं।

पुस्तक का कुछ अंश

वाघा बार्डर के उस पार
य ह हम लेखकों के लिए भावनाओं और रोमांच से भरा सफर था, दिल्ली से लाहौर तक का मौका था सार्क देशों के लेखकों का लाहौर में तीन दिवसीय आयोजन। सार्क के सात देशों के लेखकों-कवियों का दसवाँ सम्मिलन, जो पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी लाहौर में पहली बार हो रहा था। वैसे पिछले नौ सम्मेलनों में पाकिस्तानी प्रतिनिधि लगातार शामिल हुए थे लेकिन भारत-पाक के बीच फैली राजनीतिक खटास और जहरीले माहौल के कारण पाकिस्तानी लेखक -शायर भारत की सरजमीं से होकर नहीं गुज़र पाते थे, क्योंकि हवाई, रेल और बस सेवाएँ राजनीतिक विद्वेष और दुश्मनी के कारण बन्द थीं। पिछला जो लेखक सम्मेलन मालदीव में हुआ था, उसमें शामिल होने के लिए पाकिस्तानी प्रतिनिधि मंडल को दुबई होकर आना पड़ा था। उस साल भी जब भारत पाकिस्तान राजनीतिक रूप से एक दूसरे के घनघोर शत्रु थे, भारत की दस लाख सेना युद्ध के लिए तैयार और तत्पर सरहद पर तैनात थी, तब भी भारत और पाकिस्तानी लेखकों के पास भावनाओं और भाई-चारे का भंडार था। लगता ही नहीं था कि हम दो दुश्मन देशों के लेखक आमने-सामने मौजूद हैं। यह भावनाएँ राष्ट्र और देशों की सरहदें स्वीकार नहीं करतीं।

लाहौर में आयोजित इस दसवें लेखक सम्मेलन का आयोजन अकादमी ऑफ फाइन आर्टस एण्ड लिटरेचर की ही आधिकारिक संस्था फाउण्डेशन आफ सार्क राइटर्स ने किया था, जिसके पीछे पंजाबी-हिन्दी की जुनूनी लेखिका अजीत कौर की लगन, भावनाएँ और दिमाग लगातार काम कर रहा है। यह लेखिका दक्षिण एशिया में भाईचारे, शान्ति और सद्भावना के लिए। पिछले सत्ताइस वर्षों से सूफी दरवेश की तरह सिर्फ अपने चरम लक्ष्य के लिए पागल हो चुकी है और घर फूँक तमाशा देख रही है। इसे कहीं से पैसा नहीं मिलता तो यह अपनी बेटी विश्व प्रसिद्ध पेण्टर अर्पणा कौर की कलाकृतियों से आया पैसा इस साहित्यिक-सांस्कृतिक अभियान में झोंकती रहती है, लेकिन साहित्यिक सेतु बनाने से बाज नहीं आती। तो छह देशों-नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और भारत के लेखक दिल्ली में जमा हुए और सातवें सदस्य देश पाकिस्तान के सफर पर चले पड़े।

और यह इत्तफाक ही था कि लगभग पन्द्रह वर्षों बाद 10 मार्च को भारत की क्रिकेट पाकिस्तान दौरे पर गई थी और हम लेखकों का जत्था 11 मार्च को पाकिस्तान के लिए र हुआ। वे हवाई रास्ते से गए थे, हम पैदली रास्ते से जा रहे थे। क्रिकेट टीम की सुरक्षा के उच्च स्तरीय व्यवस्था की जरूरत थी क्योंकि दोनों देशों के युद्ध उन्मादी संगठनों ने खतरों से भ हालात पैदा कर रखे थे। नहीं तो क्रिकेट टीम के लिए हार-जीत का खतरा तो था पर जान जोखि का कोई मसला नहीं था। यह था तो सिर्फ राजनीतिक करतूतों और झूठे अहंकार के कारण मानव-विरोधी रुख अपनाने वाले क्षुद्र नेताओं की वजह से हम लेखकों को कोई खतरा नही था, क्योंकि हमारे पास नानक, बुल्ले शाह और वारिस शाह के वह शब्द थे, जिनके हम वारिस है।

तो वाघा बार्डर से गुजरनेवाला हमारा पैदली सफर शुरू हुआ। नई दिल्ली से अमृतसर के लिए हम सब लेखक शताब्दी से रवाना हुए। पानीपत, कुरुक्षेत्र, अम्बाला और लुधियाना क्रास किया। अम्बाला पहुँचने से पहले ट्रेन परिचारिका ने बताया कि यह शहर भारतीय सेना और वायुसेना की बहुत बड़ी छावनी है। दिल को धक्का-सा लगा कि क्या अम्बाला की और कोई पहचान नहीं? खैर... इस झटके के बाद लुधियाना और फगवाड़ा क्रॉस करते ही सतलज नदी की धार दिखी और मन इतिहास और भूगोल की ओर मुड़ गया। साथ बैठे थे हिन्दी और पंजाबी के प्रखर युवा लेखक बलबीर माधोपुरी ये पंजाब में रचे बसे है। तरह-तरह की गहरी सांस्कृतिक स्मृतियों में वे डूबे हुए थे। जालंधर गुजर कर ट्रेन अमृतसर की और बढ़ी और हमने व्यास दरिया पार किया तो बलबीर ने कहा- शायद लाहौर जाते रावी दरिया भी दिखाई दे जाए...रावी का..

Download आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan PDF Book Free,आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan PDF Book Download kare Hindi me , आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan Kitab padhe online , Read Online आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan Book Free, आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan किताब डाउनलोड करें , आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan Book review, आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan Review in Hindi , आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan PDF Download in English Book, Download PDF Books of   कमलेश्वर / Kamleshwar   Free,   कमलेश्वर / Kamleshwar   ki आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan PDF Book Download Kare, आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan Novel PDF Download Free, आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan उपन्यास PDF Download Free, आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan Novel in Hindi, आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan PDF Google Drive Link, आँखों देखा पाकिस्तान / Ankhon Dekha Pakistan Book Telegram

Download
Buy Book from Amazon

5/5 - (44 votes)
हमारे चैनल से जुड़े। To Get Latest Books Notification!

Related Books

Shares