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यथासम्भव | Yathasambhav Book PDF Download Free : Hindi Books by Sharad Joshi

पुस्तक का विवरण (Description of Book) :-

नाम / Name 📥यथासम्भव PDF | Yathasambhav
लेखक / Author 🖊️
आकार / Size 15.9 MB
कुल पृष्ठ / Pages 📖445
Last UpdatedSeptember 22, 2022
भाषा / Language Hindi
श्रेणी / Category
अथ गणेशाय नमः

श्री गणेशाय नमः, बात गणेश जी से शुरू की जाए, वह धीरे-धीरे चूहे तक 'पहुँच जाएगी या चूहे से आरम्भ करें और वह श्रीगणेश तक पहुँचे । या पढ़ने-लिखने की चर्चा की जाए। श्री गणेश ज्ञान और बुद्धि के देवता हैं। इस कारण सदैव अल्पमत में रहते होंगे, पर हैं तो देवता । सबसे पहले वे ही पूजे जाते हैं। आखीर में वे ही पानी में उतारे जाते हैं। पढ़ने-लिखने की चर्चा को छोड़ आप श्री गणेश की कथा पर आ सकते हैं। विषय क्या है, चूहा या श्रीगणेश ? भई, इस देश में कुल मिलाकर विषय एक ही होता है- गरीबी सारे विषय उसी से जन्म लेते हैं। कविता कर लो या उपन्यास, बात नही होगी गरीबी हटाने की बात करने वाले वातें कहते रहे, पर यह न सोचा कि गरीबी हट गयी, तो लेखक लिखेंगे किस विषय पर ? उन्हें लगा, ये साहित्यवाले लोग 'गरीबी हटाओ' के खिलाफ़ हैं तो इस पर उतर आये कि चलो साहित्य हटाओ। वह नहीं हट सकता। श्री गणेश से चालू हुआ है। वे ही उसके आदि देवता है। 'ऋद्धि-सिद्धि' आसपास रहती है, बीच में लेखन का काम चलता है। चूहा पैरों के पास बैठा रहता है। रचना खराब हुई कि गणेश जी महाराज उसे चूहे को दे देते हैं । ले भई, कुतर खा । पर ऐसा प्रायः नहीं होता। 'निज कवित्त' के फीका न लगने का नियम गणेश जी पर भी उतना ही लागू होता है। चूहा परेशान रहता है। महाराज, कुछ खाने को दीजिए। गणेश जी सूंड पर हाथ फेर गम्भीरता से कहते हैं, लेखक के परिवार के सदस्य हो, खाने-पीने की बात मत किया करो। भूखे रहना सीखो। बड़ा ऊंचा मजाक बोध है श्री गणेश जी का (अच्छे लेखकों में रहता है) । चूहा सुन मुस्कराता है। जानता है, गणेश जी डायटिंग पर भरोसा नहीं करते, तबीयत से खाते हैं, लिखते हैं। अब निरन्तर के लिखते रहने से शरीर में भारीपन तो आ ही जाता है।

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